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विश्व साक्षरता दिवस 2018 : जानें क्यों पड़ी इस दिन को मनाने की जरूरत

World Literacy Day 2018 : इस साल पूरी दुनिया अपना 52वां साक्षरता दिवस(Literacy Day) मना रही है

World Literacy Day 2018 : कहते हैं इस दुनिया को अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाने का अगर कोई पर्याप्त साधन है तो वो है हमारी शिक्षा.

किसी भी इंसान के जीवन में शिक्षा का महत्व क्या होता है ये हम सब बखूबी जानते हैं, व्यक्ति निर्माण से लेकर समाज के विकास तक हमारा पहला आधार शिक्षा ही बनती है.
यही कारण है कि दुनिया के तमाम देश शिक्षा की अहमियत को हर कोनों में फैलाने के लिए प्रयासरत रहते हैं.
इसी संकल्प को पूरा करने के उद्देश्य से साल में आज का दिन यानि की 08 सितंबर अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में चयनित किया गया है.
बता दें कि इस साल पूरी दुनिया अपना 52वां साक्षरता दिवस(Literacy Day) मना रही है जिसकी इस बार की थीम ‘साक्षरता और कौशल विकास‘ है.
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कब और कहां से हुई शुरूआत
समाज से अशिक्षा को खत्म करने और शिक्षा को बढ़ावा देने के विचार के साथ पहली बार इसकी असल जरूरत समझ आई.
दरअसल ईरान के तेहरान शहर में 1965 में 8 से 19 सितंबर तक आयोजित दुनिया के शिक्षा मंत्रियों के वैश्विक सम्मेलन में प्रथम बार इस विषय पर गंभीर चर्चा हुई.
इसके बाद 26 अक्टूबर, 1966 को यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल साइंटिफिक ऐंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन (यूनेस्को) की मीटिंग मे पहली बार यह तय किया गया क अब से 8 सितंबर को अंतराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के तौर पर मनाया जाएगा.
क्या है इस बार की थीम का मतलब
गौरतलब है कि अक्सर यह देखा जाता है हम किताबी ज्ञान तो हासिल कर लेते हें मगर जब हमें बाहर निकलकर किसी कंपनी में काम करना पड़ता है तो हमारे हाथ लड़खाने लगते हैं.
यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में दुनिया के कई देशों ने पढ़ाई के साथ साथ युवाओं के कौशल विकास पर भी ध्यान दिया है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार की योजनाएं चला रहे हैं.
इस बारे में प्रधानमंत्री का मानना है कि रोजगार, करियर और आजीविका कमाने के लिए किताबी ज्ञान के अलावा कौशल और तकनीकी एवं वोकेशनल स्किल्स की भी जरूरत है.
साक्षरता की उपयोगिता
इस समय दुनिया के सभी देशों के आंतरिक विकास के लिए लोगो का शैक्षिक होना बहुत जरूरी हो गया है. जिस तरह हम सब भाग रहे हैं ऐसे में एक अशिक्षित व्यक्ति के लिए बड़ी मुश्किल है कि वो हमारे साथ एक कदम भी चल सके.
इसलिए समय के हिसाब से चलने के लिए आज हर इंसान का साक्षर होना बहुत जरूरी है.
यहां हम सबके लिए एक बात यह भी समजने वाली है कि साक्षरता का मतलब केवल 2-4 किताबों का ज्ञान हासिल करना ही नहीं होता .यह हमारी खुद के अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता लाकर समाज सशक्त बनाने में मुख्य आधार भी बन सकती है.
यूनीसेफ के आकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में चार अरब लोग साक्षर हैं लेकिन आज भी 1 अरब ऐसे लोग हैं जो अपना नाम भी पढ़ना लिखना नहीं जानते.
पढ़ें जानिए भारत के अलावा कैसा है अन्य देशों में शिक्षा का स्तर
भारत में साक्षरता दर
हाल के सरकारी आंकडों के मुताबिक हमारे देश की कुल साक्षरता दर 74.04% है.जिसमें केरल में सबसे ज्यादा साक्षरता प्रतिशत 93.91 फीसदी है यानि की वहां के अन्य राज्यों के मुकाबले ज्यादा पढ़े लिखे हैं. वहीं बिहार में सबसे कम 63.82 फीसदी लोग सिर्फ पढ़े लिखे हैं.

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