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नोटबंदी का फैसला हुआ फ्लॉप ? 99.30 फीसदी पुराने नोट वापस पहुंचे बैंक

 Notes Returned Bank After Demonetisation : बंद नोटों में सिर्फ 10,720 करोड़ रुपये ही बैंकों के पास वापस नहीं आए हैं. 

Notes Returned Bank After Demonetisation : नोटबंदी के 2 साल होने वाले हैं ऐसे में हर कोई यह जानना चाहता होगा कि जिस उद्देश्य से हमारे प्रधानमंत्री ने ये कदम उठाया था वो पूरा हुआ या नहीं.

विपक्ष के नेताओं से लेकर आम लोगों तक हर कोई आए दिन सरकार से यह प्रश्न पूछते हते कि हुजुर जरा बताइए तो बैंकों में नोटबंदी के बाद से कितने कालेधन का पता चला है.
दरअसल कई लोगों का ऐसा मानना था कि बाजार में कालेधन की भरमार है और नोटबंदी के बाद से ऐसे लोगों को सारा पैसा बरबाद हो गया हो गया होगा.
लेकिन आज भारतीय रिजर्व बैंक ने नोटबंदी में जमा हुए पैसों को लेकर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो चुका है.
रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि नोटबंदी के दौरान बंद हुए लगभग सभी पुराने नोट वापस आ चुके हैं. बता दें कि वापस आए नोटों की गिनती करने में रिजर्व बैंक को पूरे 21 महीने लग गए.
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RBI ने अपनी इस वार्षिक रिपोर्ट में बैंकों में वापस आए सभी पुराने नोटों का पूरा लेखा जाोखा दे दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक 8 नवंबर 2016 से पहले तक बाजार में मौजूद 500 और 1000 के सभी नोट में से 99.30 फीसदी वापस आ चुके हैं.
भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी इस रिपोर्ट में बताया कि 8 नवंबर, 2016 को 15.41 लाख करोड़ की वैल्यू के 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट सर्कुलेशन में थे. इसके बाद इनमें से जितने नोट वापस आए हैं, उनकी कुल वैल्यू 15.31 लाख करोड़ है.
यानि की इसका मतलब यह हुआ कि बंद नोटों में सिर्फ 10,720 करोड़ रुपये ही बैंकों के पास वापस नहीं आए हैं.
नोटों की छपाई पर कितना हुआ खर्चा
नोटबंदी के बाद 2016-17 में रिजर्व बैंक ने 500 और 2,000 रुपये के नए नोट तथा अन्य मूल्य के नोटों की छपाई पर 7,965 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जबकि उसके पिछले साल खर्च हुई राशि 3,421 करोड़ थी.
वहीं 2017-18 (जुलाई 2017 से जून 2018) के दौरान रिजर्व बैंक ने नए नोटों की छपाई पर 4,912 करोड़ रुपये और खर्च किए.
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100 से ज्यादा लोगों की हुई थी मौत
गौरतलब है कि नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार लगातार लोगों के सवालों के घेरे में रही है क्योंकी कालेधन पर चोट करने के लिए इसकी घोषणा की गई थी.
विपक्षी नेताओं का कहना था कि नोटबंदी की वजह से काले धन में कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है लेकिन इससे आम आदमी का खासी मुसीबत उठानी पड़ी, यहां तक की कई लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी.
बता दें कि देश भर में नोटबंदी से उस समय 100 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर सामने आई थी. यही नहीं लंबी -लंबी कतारों में लोगों को अपना कीमती समय जाया करना पड़ा.
गैर संगठित क्षेत्रों में पैसों की कमी हो गई है, मज़दूरों का काम छिन गया जिससे अचानक देशभर के अंदर बेरोजगारी का माहौल पैदा हो या.
आज तक कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां नोटबंदी का बुरा प्रभाव अभी तक मौजूद है जिसका सबसा बड़ा उदाहरण देश के अंदर चलने वाले लघु उद्योग हैं.

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