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बलात्कारी आसाराम का अब जेल में कटेगा पूरा बुढ़ापा, पढ़िए उसके अर्श से फर्श का सफर

Asaram Life Imprisonment : आसाराम पर नाबालिग से रेप के आरोप में मिली सजा

Asaram Life Imprisonment : आज यानि की 25 अप्रैल का दिन आसाराम और उनके अंधभक्तों के लिए काले दिन के समान सामने आया है.

दरअसल जोधपुर सेंट्रल जेल में बनी विशेष अदालत ने आसाराम को लगभग 5 वर्षों से चल रही नाबालिग से बलात्कार मामले में दोषी करार देते हुए फैसला सुना दिया है.
कोर्ट ने अपने इस फैसले आसाराम को उम्रकैद और 1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई है.
बता दें कि आसाराम के अलावा इस केस के दो अन्य आरोपी शिल्पी और शरदचंद्र को भी 20-20 साल की सजा और 50-50 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई दी है.
आसाराम पर नाबालिग से रेप का है आरोप
गौरतलब है कि कथित संत आसाराम एक नाबालिग लड़की से रेप के आरोप में क़रीब 5 साल से ज़्यादा वक़्त से जेल में बंद था. इस मामले में कुल पांच लोग आरोपी थें, जिनमें से दो लोगों को सबूतों के आधार पर बरी कर दिया गया है.
बता दें कि पुलिस ने आसाराम रेप केस में उनके सेवादारों के ख़िलाफ़ नवंबर 2013 में सबसे पहली चार्जशीट दाख़िल की थी जिसमें कुल 58 गवाहों ने अपनी गवाही दर्ज कराई थी.
आसाराम के ख़िलाफ़ जिन धाराओं में केस दर्ज किया गया था उसमें उम्रक़ैद तक की सज़ा हो सकती थी जिसे कोर्ट ने भी मंजूर किया.
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आसाराम का अर्श से फर्श तक का सफर
आसाराम का जन्म अप्रैल साल 1941 में पाकिस्तान के सिंध इलाके के बेरानी गांव में हुआ था, आसाराम का असली नाम असुमल हरपलानी है.
सिंधी व्यापारी समुदाय से संबंध रखने वाले आसाराम का परिवार साल 1947 में विभाजन के बाद भारत के अहमदाबाद शहर में आकर बस गया था, जहां साठ के दशक में उन्होंने लीलाशाह को अपना आध्यात्मिक गुरु बनाया.
बाद में लीलाशाह ने ही असुमल का नाम आसाराम रखा और उसे अपने पास रखकर ही शिक्षा दीक्षा देने लगे.
इसके बाद साल 1972 में आसाराम ने अहमदाबाद से लगभग 10 किलोमीटर दूर मुटेरा कस्बे में साबरमती नदी के किनारे अपनी पहली कुटिया बनाई, और यहीं से शुरू हुआ आसाराम का आध्यात्म का पाखंड.
इसके बाद धीरे- धीरे यह गुजरात के अन्य शहरों से होता हुआ देश के अलग-अलग राज्यों में फ़ैल गया.
लोग आसाराम को भगवान मानने लगे और धीर धीरे उनकी कुटिया आलीशान आश्रम में बदल दी गई जिसमे आसाराम अपने गंदे कामों को अंजाम देता था.इस समय आसाराम के नाम से लगभग 400 आश्रमों का संचालन होता है.
यहीं नही आसाराम की संस्थाओं द्वारा बेचें जाने वाली पत्रिकाओं, उत्पादों की बिक्री, श्रद्धालुओं के चंदे और आश्रम की जमीन पर होने वाली खेती से भी मोटी कमाई होती है.
शुरुआती सालों में प्रवचन के बाद प्रसाद के नाम पर वितरित किए जाने वाले मुफ़्त भोजन ने भी आसाराम के ‘भक्तों’ की संख्या को तेज़ी से बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
 आयकर विभाग के मुताबिक इस समय आसाराम के पास 2 हजार करोड़ रुपए से भी ज्‍यादा की संपत्ति है.
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देश के दिग्गज नेता भी आसाराम के रह चुके हैं अनुयायी
एक समय था जब आसाराम का असर देश से बाहर विदेशों तक भी था. 1990 से लेकर 2000 के दशक तक उनके भक्तों की सूची में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लालकृष्ण आडवाणी और नितिन गडकरी जैसे दिग्गज नेता शामिल हो चुके थे.
इस सूची में दिग्विजय सिंह, कमल नाथ और मोतीलाल वोरा जैसे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भी शामिल रहे.
आसाराम की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार आज दुनिया भर में उनके चार करोड़ अनुयायी हैं. आसाराम पर 2 केस दर्ज हैं पहला मुटेरा कांड और दूसरा जोधपुर रेप केस.
मुटेरा कांड में 5 जुलाई 2008 को आसाराम के मुटेरा आश्रम के बाहर मौजूद साबरमती नदी के सूखे तल में 10 वर्षीय अभिषेक वाघेला और 11 वर्षीय दीपेश वाघेला के अध-जले शरीर विकृत अवस्था में बरामद हुआ, यह मामला भी अहमदाबाद के सत्र न्यायलय में अभी भी चल रहा है और दूसरा जोधपूर रेप केस जिसपर उनका आज फैसला आया है.
वहीं उम्रकैद की सजा सुनते आसाराम कोर्ट रूम में ही सर पकड़ कर रोने लगे हालाकि उनके वकिल ने कोर्ट के इस फैसले को अग्रीम कोर्ट में चैलेंज करने की बात कही है.
अब देखना है कि आसाराम और उनके अनुयायी कोर्ट के इस फैसले पर किस तरह से जवाबी कार्यवाही करते हैं.

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