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12 साल तक की बच्चियों से दुष्कर्म करने वाले अब लटकेंगे फांसी पर, अध्यादेश को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी

Death For Child Rape : जानिए क्या कुछ बदला इस अध्यादेश में

Death For Child Rape : 12 साल से कम की बच्ची के साथ रेप के आरोपी को फांसी की सजा दिए जाने वाले अध्यादेश को राष्ट्रपति कोविंद ने अपनी मंजूरी दे दी है.

बता दें कि कल कैबिनट ने पॉक्सो एक्ट मे संसोधन करते हुए एक नया अध्यादेश तैयार किया था जिसे आज राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून के रुप में लागू कर दिया गया है.
दरअसल हाल में हुए कठुआ में बच्ची के साथ दुष्कर्म व हत्या,सासाराम रेप , सूरत रेप केस औऱ उन्नाव गैंगरेप के मामले ने पूरे देश में एक जन आक्रोश पैदा कर दिया था, जिसके बाद हर तरफ से रेप के आरोपियों को फांसी की सजा दिए जाने वाले कानून की मांग की जाने लगी थी.
इसी के मद्देनजर सरकार ने शनिवार को 12 साल तक की बच्ची से दुष्कर्म करने वाले दोषियों को मौत की सजा दिए जाने वाले अध्यादेश को तैयार किया.
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुए इस कैबिनेट मीटिंग में इस अधायदेश पर प्रस्ताव पेश किया गया था जिसपर सर्वसम्मति से कैबिनेट सदस्यों ने अपनी मुहर लगाई.
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क्या कुछ बदला इस अध्यादेश में
इस अध्यादेश के लागू हो जाने के बाद अब से महिलाओं के साथ रेप करने वाले आरोपी की न्यूनतम सजा 7 साल से बढ़ाकर 10 वर्ष कर दी गई है जबकि अधिकतम इसे उम्रकैद तक बढ़ा दी गई है.
वहीं 16 साल से कम उम्र की लड़कियों के साथ अपराध करने वाले आरोपियों की सजा भी 10 से 20 साल तक बढ़ाने का प्रावधान कर दिया गया है.
जबकि 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के बलात्कारियों को पोक्सो एक्ट में बदलाव किए जाने के बाद अब मौत की सजा दी जा सकेगी.
अध्यादेश के कुछ अहम बिंदू
बच्चियों से दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित की जाएंगी.
वैज्ञानिक जांच के लिए सभी पुलिस थानों और अस्पतालों में फॉरेंसिक किट मुहैया कराई जाएंगी.
रेप की जांच के लिए एक समर्पित पुलिस बल होगा जो तय समय सीमा के अंदर जांच कर आरोप पत्र अदालत में पेश करेगा.
क्राइम रिकार्ड ब्यूरो यौन अपराधियों का डेटा तैयार करेगा जिसे राज्यों से साझा किया जाएगा.
पीड़ितों की सहायता के लिए देश के सभी जिलों में एकल खिड़की बनाया जाएगा.
मामलों में पीड़ितों का पक्ष रखने के लिए राज्यों में विशेष लोक अभियोजकों के नए पद सृजित होंगे.
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बाल यौन अपराध संरक्षण ( पॉक्सो ) अधिनियम के अंतर्गत आने वाले अपराधों में पिछले 10 सालों में नाबालिगों के खिलाफ होने वाले क्राइम में 500 प्रतिशत से ज्यादा का इजाफा देखने को मिला है.
वर्ष 2006 में जहां सालाना इन अपराधओं की संख्या 18,967 थी वहीं 2016 में ये बढ़कर 1,06,958 हो गई.
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2012 से 2016 के दौरान बाल यौन अपराधों के मामलों में तेजी से बढ़तरी हुई जबकि 2016-11 में यह रफ्तार कम थी.

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