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जानिए, केरल की उस जमीदा को जिसने इस्लाम की पुरानी परंपराओं से करी खिलाफत

Women Lead Namaz : मुस्लिम कट्टरपंथियों ने जताया विरोध

Women Lead Namaz : आज के दौर में महिलाओं ने हर वर्ग और क्षेत्र में पुरूषों से बराबरी करने की ठान रखी है.

चाहे धर्म का मसला हो है खुद का शक्ति प्रदर्शन हर जगह यह महिलाएं अपने हक की वकालत करते हुए सालों पुरानी रूढ़ी वादी सोच को कुचलने का काम कर रही हैं.
ऐसी ही एक मिसाल पेश की है केरल की जमीदा ने जिन्होंने पहली बार हमारे देश के अंदर एक महिला के तौर पर जुमे की नमाज अदा किया है. दिलचस्प बात यह है कि उनके द्वारा नमाज अदायगी में पुरूष भी शामिल थे.
कौन हैं जमीदा
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम की रहने वाली जमीदा कुरआन और सुन्नत सोसायटी की महासचिव हैं, इन्हे प्यार से ज्यादातर लोग जमीदा टीचर के नाम से पुकारते हैं.
जमीदा ने क़ुरान एवं सुन्नत सोसायटी के मुख्यालय चेरूकोड में जुमे की नमाज़ और उसके बाद होने वाले भाषण ‘खुतबा’ की अगुवाई कर एक नया एतिहास रच दिया है.
इससे पहले यह साहस यूएसए की एक स्कॉलर और प्रोफेसर अमीना वदूद ने 2005 में जुमे की नमाज अदा कर दिखाया था.
बता दें कि इस क़ुरान एवं सुन्नत सोसायटी की स्थापना इस्लामिक क्लेरिक चेकन्नूर मौलवी द्वारा किया गया था, जो कि इस्लाम के विवादित और गैर-रुढ़िवादी व्याख्या के लिए जाने जाते थे.
Women Lead Namaz
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कुरान में महिला पुरूष एक समान
26 जनवरी को हुई इस नमाज में महिला समेत करीब 80 लोगों ने शिरकत की थी जिसकी अगुवाई टीचर जमीदा ने करी थी.
ऐसा करने के पीछे जमीदा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पवित्र कुरान मर्द और औरत में कोई भेदभाव नहीं करता है तथा इस्लाम में महिलाओं के नमाज पढ़ने पर कोई रोक भी नहीं है.
उन्होंने कहा कि नमाज, हज, जकात, रोज़ा जैसे धार्मिक कृत्यों में औरत और मर्द के बीच भेदभाव करना कुरान नहीं बल्कि इस्लाम के पुरूष ठेकेदारों ने सिखाया है. टीचर जमीदा ने बताया कि वो इन लोगों के द्वारा बनाई इस महिला विरोधी नियम कानून को तोड़ना चाहती है.
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मुस्लिम कट्टरपंथियों ने जताया विरोध
जमीदा के इमामत करने को लेकर मदरसा दारुल उलूम निस्वाह के नायब मोहतमिम मौलाना नजीफ कासमी का कहना है कि इस्लाम औरतों को इमामत करने की इजाजत नहीं देता. शरीयत में औरतों के लिए हुक्म है कि वो अपने घर में नमाज पढ़ें.
जमीदा ने इमामत करके मुसलमानों और इस्लाम के साथ भद्दा मजाक करने की कोशिश की है. क्योंकि, इस्लाम में इसकी कतई इजाजत नहीं है.
उन्होंने कहा कि जो लोग महिला इमाम के पीछे नमाज अदा कर रहे थे उनकी नमाज भी अल्लाह के द्वारा कबूल नहीं की गई होगी.
वहीं एक सलाफी संगठन ‘विज़डम ग्लोबल इस्लामिक मिशन’ के प्रवक्ता सीपी सलीम का कहना है कि ये सब प्रसिद्धि पाने और इस्लाम की आलोचना करने के मकसद से किया जा रहा है.
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नहीं लगता किसी से डर
जमीदा ने कहा कि उन्हें पता था कि उनके इस कदम से इस्लाम का सहारा लेकर महिलाओं के प्रति रूढ़ीवादी सोच रखने वाले लोग उनपर हमला करेंगे.
उन्होंने कहा कि वो अब इन सब बातों से डर कर पीछे हटने वाली नहीं है बल्कि उनकी भविष्य में यह कोशिश रहेगी कि वो केरल के दूसरे हिस्सों में भी महिलाओं को खुद नमाज अदा करने के लिए प्रेरित कर सकें
गौरतलब है कि जमीदा को तीन तलाक और जबरदस्ती धर्म परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से पहले भी धमकियां मिलती रही हैं.

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