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Kerala Green Village : सिर्फ 3 महीने में केरल का यह गांव बना राज्य का पहला ग्रीन इको विलेज

Kerala Green Village : सरकार और गांव वालों की साझा कोशिश का नतीजा

Kerala Green Village : शहरों के प्रदुषण और शोर से दूर जाने के बारे में जब भी हम सोचते हैं तो अक्सर हमारे कदम गांव की ओर बढ़ते हैं.

हालांकि वक्त के साथ अब गांवों में भी कई बदलाव आए हैं. यह कहना गलत नहीं होगा कि मौजूदा दौर में विकसित होने की राह पर चलते हुए इन गांवों ने भी अब अपने हरे भरे पेड़ पौधे या खुले वातावरण वाली पहचान को कहीं खो सा दिया है.
लेकिन केरल ने अब इसे एक गंभीर मुद्दा मानते हुए अपने गांवों की शुद्धता को फिर से वापस लाने की कोशिश शुरू की है जिसका असर भी अब वहां के गांवों में दिखने लगा है.
एरनाकुलम जिले के मुलुथुरुथी पंचायत में स्थित, थुरुथिककारा गांव को वैसे तो लोग उसके विभिन्न हिंदू मंदिरों के नाम से जानते हैं मगर अब इस गांव को सिर्फ 3 महीने में पूर्ण रूप से हरित या इको फ्रैंडली गांव बनने का भी प्रमाण मिल गया है.
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राज्य का बना पहला इको गांव
हरिथा केर्यलम मिशन के उपाध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी टी एन सीमा ने मंगलवार को मुल्थुथुरुथी गांव में आयोजित एक समारोह में इस बात की घोषणा की उनका गांव केरल का पहला पूर्ण हरित गांव बन गया है.
उन्होंने बताया कि कचरा प्रबंधन, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में हरित तरीकों की पहल करने के कारण उनके गांव को यह टैग मिला है.
बता दें कि विभिन्न एजेंसियों और राजनीतिक दलों के सहयोग से केरल सरकार साहित्य परिषद( केएसएसपी) ने ऊर्जा निर्मला हरीता ग्रामम नाम से गांवों को पर्यावरण अनूकुल बनाने हेतु विभिन्न कार्यक्रमों को लागू किया है.
इस परियोजना का उद्घाटन पिछले साल अक्टूबर में हुआ था जिसके तहत गांवों में कचरा प्रबंधन, ऊर्जा दक्षता, जल सुरक्षा और वैज्ञानिक खेती की एक नई संस्कृति को विकसित करने की कोशिश की जा रही है.
ऐसा माना जा रहा है कि यह परियोजना पूरे राज्य के लिए एक आदर्श मॉडल है.
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हर क्षेत्र में किया बराबर योदगदान
ऊर्जा मंडल केंद्र केरल, एएनईआरटी, हरीता केरल मिशन, क्लीन केरल मिशन, सुचितवा मिशन, सीयूएसएटी, मॉडल इंजीनियरिंग कॉलेज, थ्रीककरा और एकीकृत ग्रामीण प्रौद्योगिकी केंद्र जैसे विभिन्न एजेंसियों के आपसी समर्थन से ही यह हरित गांव बनाने वाली ऊर्जा निर्मला हरित ग्राम परियोजना को सफलता पूर्वक चलाया जा रहा है.
गौरतलब है कि यह सभी एजेंसियां थुरुथिककारा गांव के  349 परिवारों के 1600 निवासियों के लिए विभिन्न विषयों पर नियमित कक्षाएं आयोजित करती है.
इसके अलावा पीने के पानी की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोचीन विश्वविद्यालय के विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विशेषज्ञों ने घरों से कुओं का पानी की जांच के लिए नमूना लिया. जिसके बाद पानी की गुणवत्ता की जांच करने पर ग्रामीणों के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है.
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स्टॉल लगाकर बेचे गए इको घरेलु आइटम
तीन महीने की इस लंबी पहल के दौरान एक ग्रीन रंग की बिएननेल का आयोजन किया गया, जिसमें हरे, स्वच्छ और ऊर्जा कुशल घरों के मॉडल प्रदर्शित किए गए.
वनस्पतियां, पौधों, जैविक उर्वरक, एलईडी बल्ब, रसोई के डिब्बे, बायोबिंस, बायोगैस प्लांट, प्लास्टिक के बियर बैग, सौर वॉटर हीटर, सौर कुकर और प्रकाश व्यवस्था की बिक्री के लिए इकोफ्रैंडली स्टॉल लगाए गए.
बहरहाल केरल के थुरुथिककारा गांव को एक आदर्श इको फ्रैंडली गांव बनाने में वहां के नागरिकों ने भी अपना अहम रोल निभाया.
आज पूरे देश को इस गांव से यह सीख लेनी चाहिए कि किस तरह हम सभी हरित मॉडल को अपनाकर अपने आने वाली पीढ़ी के लिए एक अच्छा पर्याणवादी भविष्य सुनुश्चित कर सकते हैं

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