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इस्लाम तलवार के बल पर फैला होता तो आज मैं मुसलमान नहीं होती- अमरीकी सेना अधिकारी


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मेने मार्च 2011 को इस्लाम धर्म अपनाया था मुझे मालूम नही था मेरा इस्लाम अपनाना इतना खतरनाक होगा लेकिन यह था में उस समय अमेरिकन सेना में थी वे मुझे इस्लाम धर्म छोड़ने को मजबूर कर रहे थे

ओर बिना मुझसे पूछे मुझे मनोरोगी वार्ड में भर्ती कर दिया गया जहाँ मुझे अपमानित किया गया और मेरे ऊपर इल्जाम लगाए गए में आत्महत्या कर रही थी वे उनका एक बहाना था वास्तव में मुझे वे इस्लाम धर्म छोड़ने को मजबूर कर रहे थे में अमेरिकी सेना में अधिकारी थी मेरी रुचि इस्लाम मे बढ़ने लगी मेने पूरे पाँच साल इस्लाम का अध्ययन किया फिर मुझे जापान के ओकोनिवा शहर में मुस्लिमो का नेतृत्व का मौका मिला जिससे मुझमे बहुत बदलाव आया और मुझे अपनी पिछली जिंदगी पर बहुत अफसोस होने लगा और

अफ़सोस इतना होने लगा फिर में तनाव में रहने लगी फिर मेने महसूस किया में तनाव में हु या नही मेने क़ुरान ऐ करीम को लिया और पढ़ने लगी जिससे तनाव कम हुआ और में मुस्लिम महिलाओं के साथ रहने लगी उनसे मुझे नमाज़ सीखने मिलती ओर बहुत इस्लामिक बाते वे मुझे सिखाती मुझे खुशी होती अब मेरी जिंदगी 6 साल पहली नही रही और 6 साल पहले ,हिजाब पर मेरा विचार सिर्फ इतना था यह काला कपड़ा है मगर मेने 2015 में इसको पहनना सुरु कर दिया

 मेरा दीन बड़ा हुआ मेने महसूस किया पश्चिमी कपड़ो में मेरा दुव्यर्वहार हुआ और अब में घर से बाहर बुरखा पहन कर निकलती हु ओर में अपने रब से प्रार्थना कर रही हु सब महिलाएं हिजाब पहन कर देखे लेकिन कुछ लोगो को लगता है में अपनी पहचान खो रही हु लेकिन उन्हें मालूम नही मेने अपने रब को पाने के लिए हिजाब पहनती हु

ओर अब में क़ुरआन ऐ करीम को याद कर रही हु

दोस्तो यह है अमेरिकन सैनिक बहन इस्लाम अपनाने की कहानी है इसको इतना शेयर करो कि हर गैर मुस्लिम के पास पहुच जाए इस्लाम तलवार से नही अपनी अच्छाई से फैला है

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"I reverted on 20 March 2011. I didn't realize my reversion would be so controversial, but it was. At...

"I reverted on 20 March 2011. I didn't realize my reversion would be so controversial, but it was. At that time, I was in the US Army. They assumed I was forced and involuntarily admitted me to the psychiatric ward where I was humiliated. The excuse they used was I was suicidal and being forced. In reality, I had been studying Islam for five years. The post I had left from had a Muslim officer who lead the Muslim community in Okinawa, Japan. He gave me such great dawah when I left, I was ready to say shahada. When I first reverted, I think I felt regret at first. Wondering if I had felt pressured or not, but I kept on the path. I took classes at the masjid to increase my knowledge, learn how to recite the Qur'an, and meet other Muslim women in the area. I definitely was not at the point I am now six years ago. My idea of hijab was tight clothes and a scarf. I had always admired the niqab. I made the decision in 2015 to wear it and my deen grew. I traded my western clothes for abayat. I now mainly just wear black. But my niqab has not made me plain, because I now stand out to Allah SWT by praying on time, one thing I didn't really do and I didn't do properly. I began to learn more surat. What others think I lost of my identity, I have gained in the view of my Creator SWT."


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