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छ. शिवाजी महाराज को मुस्लिम विरोधी बताना मनुवादियों की साजिश

शिवाजी महाराज के वकील काजी हैदर नाम के मुसलमान थे, तो अफजल खान का वकील श्रीधर पंत नाम का ब्राह्मण था. यह बड़ी अजीब बात है की शिवाजी महाराज के वकील मुसलमान होने के बावजूत मनुवादी एसा प्रचार करते है की शिवाजी महाराज हिन्दू धर्म के रक्षक थे और मुसलमान कट्टरपंथी आक्रमणकारी थे .शिवाजी महाराज हिन्दू रक्षक थे तो उनका वकील मुसलमान कैसे हुआ? उनके सेनापति मुसलमान कैसे हुए? और यदि मुसलमान कट्टरपंथी थे तो ३५% मुसलमान उनके सेना में क्यों थे? ब्राह्मणवादियों के कहने से अगर शिवाजी महाराज हिन्दू धर्म की रक्षा करने के लिए लड़ रहे थे, तब यह श्रीधर पंत नाम का ब्राह्मणवादी धर्मशास्त्रों ने जिनको धर्मरक्षा की जिम्मेदारी दि थी तो वह धर्म रक्षक ब्राह्मण उधर औरंजेब की सेना में जाकर क्या कर रहे थे?  इसका मतलब यह हुआ की मुग़लों का शासन मुसलमान और ब्राह्मण मिलजुलकर चलते थे.  मुग़लों के शासन में ब्राह्मणवादियों की बराबरी की हिस्सेदारी थी.

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आज ब्राह्मणवादी यह कह रहे है की मुग़ल शासन में मुसलमान अत्याचार करते थे तो ब्राह्मणवादी भी उसमे बराबर के हिस्सेदार थे. वे यदि कहते है की मुसलमान डाकू, लुटेरे थे तो ब्राह्मणवादी भी उसमे बराबर के हिस्सेदार थे. और आज के ब्राह्मणवादी मुग़लों के ऊपर यह आरोप लगते है की उन्होंने मंदिर उजड़े, मुर्तिया तोड़ी तो ब्राह्मणवादी भी उसमे बराबर के हिस्सेदार थे. ब्राह्मणवादियों द्वारा मुग़ल के शासन प्रशासन में सहयोग देने के उपरांत वे यह दावा नहीं कर सकते है की मुग़लों ने तलवार के बल पर धर्म परिवर्तन कराया था. क्योंकि उसको रोकने के लिए किसी भी ब्राह्मणवादी ने हाथ में तलवार नहीं उठाई नहीं बलिदान दिया नहीं शहीद हुए.  इस सच्चे इतिहास का पता नहीं होने की वजह से ब्राह्मणवादी इसका फायदा उठाते है और प्रचार माध्यमों के आधार पर बहुजन समाज का विचार/मत बनाते है.

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हाथ या पैर में जंजीरे डालने से कोई गुलाम नहीं बनता वह तो केवल शरीर पर बंधन लगाती है. सच्ची जंजीर दिमाग में होती है वो अद्रश्य, लेकिन मजबूत होती है. आज समाचार पत्र कौन सा काम करते हैं. दूरदर्शन की मलिकाएं क्या करती हैं? वहॉ किस पध्दति से काम किया जाता है? किताबें लिखना, कविता लिखना, कथा लिखना, नाटक लिखना यह सब क्या है? भाषण, व्याख्यानमाला, वाचकों व पत्र व्यवहार यह क्या है? यह सारे विचार बनानेवाले साधन हैं. विचारों को दिशा देनेवाले माध्यम हैं. लोगों को कैसा विचार करना चाहिए कैसे निर्णय लेने चाहिए, समाज-व्यवस्था किसके हाथ में रहनी चाहिए यह सब प्रचार माध्यमो द्वारा किया जाता है. और इसी प्रचार माध्यमो द्वारा बहुजन प्रतिपालक शिवाजी महाराज को मुसलमानों का दुश्मन बनाकर पेश किया गया. जबकि असलियत इससे विपरीत है.
-वामन मेश्राम इनके निजी विचार है.
राष्ट्रिय अध्यक्ष, भारत मुक्ति मोर्चा


आरक्षण और बहुजन
जिस दिन सवर्णों को 10-15% आरक्षण मिल गया तो समझिए OBC को 52% मिलने में देर नहीं लगेगी और जिस दिन SC,ST का आरक्षण हट गया तो OBC का प्रतिनिधित्व 0 होने में ज्यादा समय नही लगेगा, सवर्ण बड़े पदों पर लगभग 80% काबिज है,उनके लिए आरक्षण 10-15% करने से अन्य वर्गों का प्रतिनिधित्व संख्यानुपात में आ जाएगा,इसलिए सवर्ण वर्ग अपने लिए कभी आरक्षण की माँग नहीं करता, SC,ST,OBC को चाहिए कि वह सवर्णों की संख्या के अनुपात में आरक्षण देने की लड़ाई लड़े, जो भी सवर्णों के लिए आरक्षण की माँग करता है मैं उसकी diplomacy को सैल्यूट करता हूँ।






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