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गूगल की ‘ वह ‘ खासियत जिसके चलते इतनी सारी कंपनी को गूगल ने पछाड़ा ?

reasons & secrets behind growth of google

गुगल आज दुनिया का सबसे बडा सर्च इंजिन बन चुका है लेकिन क्या आपको पता है जब गूगल सामने भी एक ज़माने ने बहुत बड़ी बड़ी चुनौतियां थी। गूगलसे पहले भी बहुत सारे सर्च इंजन या फिर वेब डिरेक्टरी थी लेकिन इनको पछाड़कर गूगल आगे निकल गया। अब गूगल हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चूका है। इंटरनेट पर कुछ लोग इसे अपना दोस्त मानते हैं तो कुछ इसे अपना टीचर कहने से भी नहीं चूकते. इसी हफ्ते गूगल 20 साल का हो गया.

4 सितंबर 1998 को इंजीनियर लैरी पेज और सर्गे ब्रिन ने जानकारियों को एक जगह समेटने के लिए एक प्रोजेक्ट शुरू किया. उसके बाद गूगल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा इसका मुख्य कारन है गूगल ने लोगो की जरूरतों को समझा की लोग आखिर में क्या चाहते है ? न सिर्फ वेबसाइट्स बल्कि लोग चाहते है जवाब। दूसरी बात गूगल जल्दी पैसे कमाने के चक्कर में नहीं लगा जैसे की गूगल के उस वक्त के स्पर्धक।

वेब क्रॉलर दुनिया का पहला सर्च इंजन था जिसमें आप सभी शब्दों को एक साथ लिखकर सर्च कर सकते थे. इसे गूगल से कई साल पहले डिज़ाइन किया गया था.इसके नाम यानि कि वेब स्पाइडर या वेब क्रॉलर का मतलब एक कंप्यूटर प्रोग्राम से है जिसका अभी भी इस्तेमाल किया जाता है, जिसे गूगल क्रॉलर के नाम से जाना जाता है वह एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम रहता है जो हर वेबसाइट को विजिट करके ताजा जानकारी इकठ्ठा करता है। गूगल ने भी अपनी वेबसाइट पर इसका ब्योरा देते हुए लिखा है, “हम वेब पेज पर जानकारियों के सही तरीके से पेश करने के दौरान सार्वजनिक रुप से मौजूद जानकारियों को जुटाने के लिए के लिए स्पाइडर्स का इस्तेमाल करते हैं.”

दूसरा एक सर्च इंजिन था लाइकोस। एक समय में वेब क्रॉलर काफी लोकप्रिय हो गया था लेकिन कुछ समय बाद ही लीकोस नाम के एक नए सर्च इंजन के आने से इसका इस्तेमाल कम होने लगा. साल 1995 में अमरीका के कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय लीकोस नाम का एक रिसर्च प्रोजेक्ट लेकर आई जिसे बाद में टेरा नाम की कंपनी ने इसे ख़रीद लिया. साल 1999 में ये सबसे ज़्यादा विज़िट किए जाने वाली वेबसाइट थी, लेकिन धीरे धीरे इस सर्च इंजिन का भी असर काम होता गया।

ऐसा ही एक सर्च इंजन और था, जिसका नाम था अल्टाविस्टा। गूगल के आने से सबसे ज़्यादा नुकसान इसी कंपनी को हुआ। ये सर्च इंजन बाक़ियों से अलग और तेज़ था लेकिन गूगल इससे भी बेहतर प्रोडक्ट लेकर आया और मार्केट पर कब्ज़ा कर लिया। याहू ने साल 2003 में इसे ख़रीदा था, लेकिन 10 साल बाद इसे बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा। याहू ने कामयाबी हासिल की लेकिन इसके संस्थापक अपनी जेबें भरने में लग गए औऱ क्वालिटी में सुधार नहीं हुआ, शायद यहीं याहू गूगल से मात खा गया.

  • कैसे सफ़ल हुआ गूगल

गूगल के पहले सर्च इंजन थे और कई अच्छा प्रदर्शन भी कर रहे थे, लेकिन आख़िर वो क्या कारण थे जिसकी मदद से गूगल सबको पछाड़ने में कामयाब रहा। हर किसी को एक पर्सनल फ़ीलींग देने की कोशिश गूगल ने हमेशा की और लगातार कुछ नया करने की कोशिश भी गूगल करता रहा। गूगल के फाउंडर पेज औऱ ब्रिन ने 1999 में पेज़रैंकवॉज़ अलगॉरिदम लेकर आए थे. ये किसी पेज को उपयोगिता के हिसाब से 1 से 10 के बीच रैंक करता है। आज के सोशल मिडिया के दौर में भी इसका महत्त्व कुछ हद तक तो है ही। लेकिन पेज औऱ ब्रिन ने कई फॉर्मूले सीक्रेट रखे हैं, जो गूगल को दूसरों से बेहतर बनाते हैं. इसलिए वो इन्हे लगातार बदलते रहते हैं। शायद गूगल की सबसे बड़ी उपलब्धि ये है कि वो लोगों की ज़रूरतों को समझने में कामयाब रहा और बहुत जल्द पैसे कमाने के चक्कर ने ना पड़ा।

एक ज़माने में याहू चैट काफी लोकप्रिय था उसके चलते याहू अगर फेसबुक जैसा कुछ निकाल लेता तो आज तस्बीर कुछ अलग होती।



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