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तो क्या बैन हो जाएगा सितारे वाला इस्लामिक झंडा ? : सुप्रीम कोर्ट ने माँगा जवाब

sk asks centre for bann on islamic flag

सुप्रीम कोर्ट ने को केंद्र सरकार से कहा है की, केंद्र सरकार चांद-सितारे वाले हरे झंडे को बैन करने की याचिका पर अपना जवाब दे। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी की जनहित याचिका को स्वीकार कर लिया जिसमें उन्होंने हरे रंग के चांद-सितारों वाले झंडे को पूरे भारत में बैन करने की मांग की थी. रिजवी ने यह याचिका 17 अप्रैल को दाखिल की थी, क्यूंकि रिज़वी के मुताबिक इसका इस्लाम से कोई वास्ता नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान के झंडे से मेल खाता है और इसी वहज से भारत में सांप्रदायिक तनाव पैदा होते है।

  • क्या कहते है वसीम रिज़वी ?

सितारेवाला हरा झंडा पाकिस्तान के राष्ट्रीय ध्वज से मिलता जुलता हैं. कुछ मौलवियों ने गलत तरीके से इस झंडे को इस्लाम से जोड़ दिया है, जबकि इनका इस्लाम से कोई लेनादेना नहीं है. इस झंडे के कारण अकसर सांप्रदायिक तनाव फैलता है और दो समुदायों के बीच दूरी बढ़ती है. इसलिए इसे बैन कर देना चाहिए. पैगम्बर मोहम्मद साहब अपने कारवां में सफेद या काले रंग का झंडा प्रयोग करते थे. आधे चांद और तारे के निशान वाला यह हरा झंडा 1906 में आजादी से पहले पुरानी मुस्लिम लीग के वकार उल माली और मोहम्मद अली जिन्ना ने इजाद किया था.

मगर यह मुस्लिम लीग 15 अगस्त 1947 को खतम हो गई और उसके बाद पाकिस्तान में इसकी उत्तराधिकारी नई मुस्लिम लीग पार्टी बनी जिसका नाम पाकिस्तान मुस्लिम लीग और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (कायदे आजम) है. ये पार्टी पाकिस्तान में इस झंडे को अपने चिन्ह की तरह इस्तेमाल करती है. दूसरी ओर भारत में मुसलमान बिना कोई वजह इस्लामिक झंडे की तरह इसका इस्तेमाल करते हैं और इस झंडे को मुस्लिम बहुल इलाके में फहराया जाता है जिससे कई बार हिंदू और मुसलमानों के बीच सौहर्द बिगड़ता है. याचिकाकर्ता का कहना है कि हरे झंडे में आधा चांद और तारा कभी भी इस्लामिक प्रैक्टिस का कतई हिस्सा नहीं रहा और ना ही इसकी इस्लाम धर्म में इस झंडे का कोई महत्व है.



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