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गुजरात चुनाव: राहुल गाँधी के इंटरव्यू पर बीजेपी ने की शिकायत, राहुल को चुनाव आयोग का नोटिस

राहुल गांधी और उनका इंटरव्यू दिखाने वाले टीवी चैनलों पर FIR दर्ज करने का फैसला कांग्रेस को नागवार गुजरा है. आनन-फानन में कांग्रेस के तमाम बड़े नेता चुनाव आयोग दस्तक देने पहुंचे. अहमद पटेल, अशोक गहलोत, रणदीप सुरजेवाला, आनंद शर्मा, आरपीएन सिंह, सुष्मिता देव, राजा बरार सभी देर रात सवा नौ बजे केंद्रीय चुनाव आयोग में नजर आए. FIR रद्द हो और अगर नहीं तो इसी मामले में प्रधानमंत्री मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर भी FIR हो इस पर कांग्रेसी नेता जोर देते रहे. 

कांग्रेस के नेता चुनाव आयोग पहुंचे तो आनन-फानन में कमीशन सुनवाई के लिए तैयार हुआ. मुख्य चुनाव आयुक्त एके ज्योति खुद वहां मौजूद थे. शुरुआत कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने की. आनंद शर्मा ने तमाम वह बातें उठाई जो कांग्रेस पार्टी ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में रखी थी, यानी चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद या यूं कहें कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के समय के बाद 8 तारीख को बीजेपी का घोषणा पत्र जारी हुआ, जिसमें अरुण जेटली समेत तमाम नेता मौजूद थे. प्रधानमंत्री मोदी ने 9 दिसंबर को चार बड़ी रैलियां की. जिसको गुजराती समेत तमाम राष्ट्रीय चैनलों ने दिखाया. बुधवार की पीयूष गोयल की प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोग के सामने रखी गई तो वहीं मनमोहन को जवाब देता अमित शाह का बयान भी सवालों के घेरे में लाया गया.

इसके तुरंत बाद अशोक गहलोत जो गुजरात कांग्रेस के प्रभारी महासचिव हैं, उन्होंने वीडियो दिखाया जिसमें प्रधानमंत्री मोदीचुनाव प्रचार समाप्त होने की तारीख और समय यानी 7 दिसंबर शाम को 5:00 बजे के बाद यह कहते दिखे कि 9 तारीख को और 14 तारीख को बीजेपी को वोट दें. अशोक गहलोत ने आयोग से पूछा कि क्या यह चुनाव आचार संहिता का सीधा उल्लंघन नहीं है और इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई.  

इसके बाद बारी आई कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला की, जिन्होंने एक-एक करके हिंदी में सारी बातें आयोग के सामने रखी. शायद सुरजेवाला जानते थे अंग्रेजी में आनंद शर्मा अपनी बात कह चुके हैं. तमतमाए सोनिया गांधी के सचिव अहमद पटेल, जो अमूमन पर्दे के पीछे से पूरी रणनीति बनाते रहे हैं, उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि राहुल गांधी ने अगर इंटरव्यू दिया है तो उसमें कहीं जनता से वोट नहीं मांगा. 

कांग्रेस दबाव बढ़ा रही थी, आयोग से अपनी निष्पक्षता को साबित करने की बात कर रही थी. तभी पूर्व गृह राज्य मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आरपीएन सिंह बोले, ‘जिस तरह चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव के दौरान गुजरात में अहमद पटेल के मसले पर दो विधायकों का वोट रद्द करने का फैसला सुनाया था और अपनी निष्पक्षता साबित की थी, ठीक वैसे ही चुनाव आयोग अपनी गरिमा को साबित करे, मैं आयोग से यही विनती करता हूं.’

इसके बाद आयोग ने कहा कि आपने अपनी बात कह दी हम इस पर जांच-पड़ताल करने के बाद जल्दी से जल्दी फैसला करेंगे. ऐसे में कांग्रेस नेताओं ने आयोग से कहा, ‘देखिए वक्त कम है, कल ही मतदान है. आज देर रात या फिर कल सुबह ही आपको फैसला लेना होगा.’ आयोग ने कहा, ‘हम जांच-पड़ताल के बाद जल्दी से जल्दी अपना पक्ष और एक्शन सामने रखेंगे.’ इसी के बाद कांग्रेस नेता वापस बाहर आ गए मीडिया से मुखातिब हुए.

कांग्रेस को उम्मीद है कि आयोग कुछ ना कुछ करेगा. इसीलिए कांग्रेस ने चुनाव आयोग के बाहर पहले ही महिला कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को भी बुला लिया था. वह तैयारी कर रही थी कि अगर आयोग ने उसकी नहीं सुनी और उसे ठोस आश्वासन नहीं दिया तो देर रात 11:00 बजे धरने पर बैठ जाएगी. लेकिन तकरीबन सवा घंटे के अपने डेलीगेशन से तर्क के बाद कांग्रेस महसूस कर रही है कि आयोग कुछ ना कुछ करेगा. इसलिए उसने बाद में अपने यूथ कांग्रेस और महिला कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को वापस जाने को कह दिया और धरने की बात फिलहाल छोड़ दी.

p style=”text-align: justify;”>कुल मिलाकर देश की सियासत में गुजरात से आने वाले नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए गुजरात का चुनाव रसूख की बात है, तो कांग्रेस को लगता है कि बुझी, डूबी, गिरी और बैकफुट पर पड़ी कांग्रेस के लिए गुजरात का चुनाव नया सवेरा साबित हो सकता है.



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