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नाखून की रंगत से जानें शरीर का हाल : Nails give information about Diseases

   नाखून केवल हाथों की सुन्दरता को ही नहीं बढ़ते हैं बल्कि यह आने वाले समय में होनी वाली घटनाओं का भी संकेत देते हैं। इसलिए हस्तरेखा विज्ञान में नाखूनों को हस्तरेखाओं के समान ही महत्व दिया गया है। नाखूनों के चांद के आकार को देखकर यह जाना जा सकता है कि भविष्य में किस क्षेत्र से खुशखबरी मिल सकती है। इसी प्रकार नाखूनों के बनावट से यह जाना जा सकता है कि भविष्य में कौन सा रोग हमें प्रभावित कर सकता है।


 


हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार नाखूनों का अधिक लंबा और चौड़ा होना फेफड़े की कमज़ोरी को दर्शाता है। नाखून अगर बढ़कर उंगली की ओर झुकी हुई हो तब इस बात संभावना अधिक रहती है कि व्यक्ति छाती एवं फेफड़े के रोग से पीड़ित होगा। 

नाखून छोटे हों लेकिन इनकी चौड़ाई अधिक हो तब गले में तकलीफ होने की अशांका प्रबल होती है। इस तरह की स्थिति होने पर व्यक्ति को श्वास नली में सूजन के कारण गले में दर्द, बोलते समय आवाज टूटना। आवाज साफ न होना ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

कुछ व्यक्तियों के नाखून छोटे होते हैं लेकिन इनका आकार वर्गाकार होता है। इस तरह के नाखून जिनके होते हैं उन्हें हृदय रोग हो सकता है। छोटे वर्गाकार नाखूनों में चन्द्र की उपस्थिति इस संभावना को और बढ़ाता है।

नाखून का लचीलापन कम हो गया है और वह आसानी से टूटने लगे हैं तो यह चिंता की बात हो सकती है। हस्त रेखा विज्ञान के अनुसार ऐसा होना दर्शाता है कि व्यक्ति अंदर से कमज़ोर और अस्वस्थ है। अच्छे खान-पान से शरीर में रक्त की कमी को दूर करने की जरूरत है। 
नाखून अंतिम सिरे पर फैलकर अधिक चौड़ा हो गया है और उनका रंग नीला है तो यह संकेत है कि शरीर में रक्त का संचार समुचित प्रकार से नहीं हो रहा है। इस तरह के नाखून जिनके होते हैं उनमें उर्जा की कमी होती है। ऐसे लोग जल्दी थक जाते हैं। नाखून से जुड़े चिकित्सा विज्ञान का इतिहास काफी पुराना है। पुरातन काल में जब बीमारी की जांच के लिए टेस्ट की सुविधा नहीं होती थी, तब हकीम और वैद्य सबसे पहले हाथ के नाखूनों के रंग से बीमारी की जांच करते थे। आयुर्वेद व होमियोपैथी में आज भी कुछ विशेषज्ञ स्वास्थ्य की जांच के समय नाखूनों के रंग को देखते हैं। विभिन्न शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि कई रोगों के पनपने के साथ-साथ नाखूनों का रंग अचानक बदलने लगता है।
 ‘नाखून कैरटिन से बने होते हैं। यह एक तरह का पोषक तत्व है, जो बालों और त्वचा में होता है। शरीर में पोषक तत्वों की कमी या बीमारी होने पर कैरटिन की सतह प्रभावित होने लगती है। साथ ही नाखून का रंग भी बदलने लगता है। यदि नेलपॉलिश का इस्तेमाल किए बिना भी नाखूनों का रंग तेजी से बदल रहा है तो यह शरीर में पनप रहे किसी रोग का संकेत हो सकता है।’
‘जिनके नाखूनों में दरारें होती हैं या नाखून टूटे हुए होते हैं, उनमें आमतौर पर विटामिन सी, फॉलिक एसिड व प्रोटीन की कमी देखने को मिलती है। सिरोसिस की स्थिति में भी ऐसा ही होता है। इसमें क्रेक के अलावा नाखूनों में गड्ढे भी पड़ जाते हैं। ऐसा जिंक की कमी के कारण होता है। अर्थराइटिस से पीड़ित लोगों के नाखूनों में धारियों के साथ-साथ उभार भी देखने को मिलता है।’
विशेषज्ञों के अनुसार जहां गर्मियों में नाखून तेजी से बढ़ते हैं, वहीं सर्दियों में यह रफ्तार धीमी हो जाती है।  ‘तनाव व अवसाद से पीड़ित व्यक्तियों में नाखून बढ़ने की गति धीमी हो जाती है। दरअसल अधिक तनाव की वजह से  हीमोग्लोबिन प्रभावित होता है।’




यह  जरूरी नहीं कि नाखून का बदलता रंग  सभी व्यक्तियों में एक ही तरह की बीमारी का संकेत हो। कई बार नाखूनों का रंग, उन पर पड़ी धारियां, नाखूनों का मोटा-पतला होना आदि बातें एक से अधिक रोगों में भी देखने को मिलती हैं। कई बार हम बेहद सामान्य बातें भी गौर नहीं करते, मसलन पैर के भीतर की ओर धंसे हुए नाखून तंग जूते पहनने का संकेत देते हैं, वहीं नाखूनों का नीला रंग शरीर में ऑक्सीजन की कमी दर्शाता है।’

मोटे, रूखे व टूटे हुए नाखून- ‘मोटे तथा नेल बेड से थोड़ा ऊपर की ओर निकले नाखून सिरोसिस व फंगल इन्फेक्शन का संकेत देते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी व बालों के गिरने की स्थिति में भी नाखून बेरंग और रूखे हो जाते हैं। इसके अलावा त्वचा रोग लाइकन प्लेनस होने पर, जिसमें पूरे शरीर में जगह-जगह पस पड़ जाती है, नाखून बिल्कुल काले हो जाते हैं। हृदय रोग की स्थिति में नाखून मुड़ जाते हैं।  नाखूनों में सफेद रंग की धारियां व रेखाएं किडनी के रोगों का संकेत देती हैं। मधुमेह पीड़ितों का पूरा नाखून सफेद रंग व एक दो गुलाबी रेखाओं के साथ नजर आता है। हृदय रोगियों के नाखून में लाल धारियां देखने को मिलती हैं।’
नाखून में होने वाला संक्रमण -नाखूनों के रंग बदलने की वजह फंगल इन्फेक्शन भी हो सकता है। शुरुआत में नाखून सफेद या पीले रंग के दिखाई देते हैं, पर संक्रमण बढ़ने पर बदरंग होने के साथ-साथ पतले और खुरदरे होने लगते हैं। डॉ़ सचिन धवन बताते हैं कि हम सभी का शरीर कई प्रकार के सूक्ष्म जीवाणुओं और विषाणुओं के संपर्क में आता है। त्वचा पर हुए संक्रमण को यदि नाखून से खुजाया जाए तो भी नाखून संक्रमित हो जाते हैं। जो लोग अधिक स्विमिंग करते हैं या ज्यादा देर तक पानी में रहते हैं या फिर जिनके पैर अधिकतर जूतों में बंद रहते हैं, उनमें  संक्रमण का खतरा अधिक होता है।  
संक्रमण के असर से नाखून भुरभुरे हो जाते हैं और उनका आकार बिगड़ जाता है। नाखूनों के आसपास खुजली, सूजन और दर्द भी होता है। 




नाखूनों के पोर भी देखें-
 ‘छोटी-छोटी कोशिकाओं से बने नाखून के पोरों के आस पास  के क्षेत्र से भी सेहत से जुड़े रहस्यों का पता चलता है। आयरन और विटामिन-बी 12 की कमी होने पर नाखून अन्दर की ओर धंस जाते हैं। रक्ताल्पता  की स्थिति में नाखूनों में उभरी हुई धारियां पड़ जाती हैं। विटामिन-सी की कमी होने पर नाखून कटने-फटने लगते हैं और उनके पोरों का मांस उखड़ने लगता है।’

, नाखूनों को फंगल इन्फेक्शन से बचाने के लिए हाथ और पैर अच्छी तरह से धोएं। उंगलियों के बीच के हिस्सों को अच्छी तरह सुखाएं और पैरों में साफ-सुथरी मौजे  ही पहनें।
यूं बनाए रखें नाखूनों की सेहत-
 1) पूरे शरीर के पोषण का ध्यान रखें। पौष्टिक आहार की मदद से न सिर्फ नाखून स्वस्थ रहते हैं, बल्कि उनमें दरार या कट भी नहीं पड़ते। विटामिन बी का सेवन नाखूनों की सुंदरता बढ़ाता है।

 2) नाखूनों की बाहरी त्वचा का खास ध्यान रखें। क्यूटिकल्स ही फंगस और बैक्टीरिया के संक्रमण से बचाव करते हैं। नाखून व पोरों के आसपास की त्वचा को नियमित रूप से मॉइस्चराइजर की नमी दें। विटामिन सी का सेवन नाखूनों के आसपास की त्वचा को कटने-फटने से रोकता है।
3) नाखूनों पर कम से कम रासायनिक उत्पादों का इस्तेमाल करें।
क्या बताता है नाखूनों का रंग-

उभरे हुए नाखून -

बाहर और आसपास की त्वचा का उभरा होना हृदय समस्याओं के अतिरिक्त फेफड़े व आंतों में सूजन का संकेत देता है।
नीले नाखून-
शरीर में ऑक्सीजन का संचार ठीक प्रकार से न होने पर नाखूनों का रंग नीला होने लगता है। यह फेफड़ों में संक्रमण, निमोनिया या दिल के रोगों की ओर भी संकेत करता है।
आधे सफेद और आधे गुलाबी नाखून -
नाखूनों का रंग अचानक आधा गुलाबी व आधा सफेद दिखाई दे तो ऐसा होना गुर्दे के रोग व सिरोसिस का संकेत देता है।
लाल व जामुनी रंग -
नाखूनों का गहरा लाल रंग हाई ब्लड प्रेशर का संकेत देता है, जबकि जामुनी रंग के नाखून लो ब्लड प्रेशर का संकेत देते हैं।
चम्मच की तरह नाखून-
खून की कमी के अलावा आनुवंशिक रोग, ट्रॉमा की स्थिति में भी नाखूनों का आकार चम्मच की तरह हो जाता है और नाखून बाहर की ओर मुड़ जाते हैं।
पीले नाखून-
फीके, हल्के पीले व कमजोर नाखून रक्ताल्पता, हृदय संबंधी परेशानी, कुपोषण व यकृत  रोगों का संकेत देते हैं। फंगल इन्फेक्शन के कारण पूरा नाखून ही पीला हो जाता है। कई बार पीलिया, थाइरॉएड, मधुमेह और सिरोसिस में भी ऐसा हो सकता है। नाखून पीले व मोटे हैं और धीमी गति से बढ़ रहे हैं तो यह फेफड़े संबंधी रोगों का संकेत हो सकता है।
सफेद नाखून -
कई बार नाखूनों पर सफेद धब्बे नजर आते हैं तो कई बार वे पूरे सफेद दिखते हैं। नाखूनों की सफेदी लिवर रोगों के अलावा हृदय व आंत की ओर भी संकेत करती है। 








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