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एकोनाइट (Aconite Nap ) के लक्षण औषधीय उपयोग

लक्षण तथा मुख्य-रोग प्रकृति
* शीत से शोथ की प्रथमावस्था में एकाएकपना और प्रबलता
*जलन और उत्ताप
*अत्यन्त प्यास
* शीत द्वारा दर्द-स्नायु-शूल
*भय के कारण बीमारियां
*घबराहट तथा बेचैनी
* खुश्क-शीत को कारण यकायक रोग

लक्षणों में कमी (Better)
* खुली हवा से रोग में कमी
लक्षणों में वृद्धि (Worse)
* बिछौने से उठने पर रोग-वृद्धि
*रोगाक्रान्त अंग की तरफ लेटने से
* शाम तथा आराम के समय
* गर्म कमरे में रोग-वृद्धि
*सड़क पार करने से भय खाता है – इसका रोगी सड़क पार करते हुए डरता हैं कि कहीं मोटर की लपेट में न आ जाय। वैसे तो सब – कोई मोटर की लपेट में आते हुए डरेगा, परन्तु एकोनाइट का रोगी बहुत दूर से आती हुई मोटर से भी भय खा जाता है।
*भीड़ में जाने से डरना – रोगी भीड़ में जाने से, समाज में जाने से डरता है, बाहर निकलने में भय खाता है।
मृत्यु की तारीख बतलाता है – इस रोगी का चेहरा घबराया हुआ रहता है। रोगी अपने रोग से इतना घबरा जाता हैं कि जीवन की आशा छोड़ देता है समझता है कि उसकी मृत्यु निश्चित है। कभी-कभी अपनी मृत्यु की तारीख तक की भविष्यववाणी करता है। डॉक्टर के आने पर कहता है: डाक्टर, तुम्हारा इलाज व्यर्थ है, मैं शीघ्र ही अमुक तारीख को मर जाने वाला हूँ। घड़ी को देख कर कहता है कि जब घड़ी की सूई अमुक स्थान पर आ जायगी तब मैं मर जाऊँगा।
* भय के कारण बीमारियां – एकोनाइट का मुख्य तथा प्रबल लक्षण ‘भय’ है। किसी भी रोग में ‘भय’ अथवा ‘मृत्यु के भय’ के उपस्थित रहने पर इसका प्रयोग आवश्यक हैं। मैटीरिया मैडिका की किसी अन्य औषधि में भय का लक्षण इतना प्रधान नहीं है जितना इस औषधि में। उदाहरणार्थ –
*प्रथम प्रसूति-काल में लड़की डर के मारे रोती है – जब नव-विवाहिता लड़की प्रथम बार गर्भवती होती हैं तब माँ को पकड़ कर रोती है, कहती है: इतने बड़े बच्चे को कैसे जानूंगी, मैं तो मर जाऊंगी। उसे एकोनाइट 200 की एक खुराक देने से ही उसका भय जाता रहता है और चित्त शान्त हो जाता है।
*भय से किसी रोग का श्रीगणेश – जब किसी बीमार का श्रीगणेश भय से हुआ हो तब एकोनाइट लाभप्रद है।
*भूत-प्रेत का डर – बच्चों को अकारण भूत-प्रेत का भय सताया करता है। अन्य कारणों से भी बच्चे, स्त्रियां तथा अनेक पुरुष अकारण भय से परेशान रहते हैं। इन अकारण-भयों को यह औषधि दूर कर देती है।
*भय में एकोनाइट तथा अर्जेन्टम नाइट्रिकम की तुलना – इन दोनों औषधियों में मृत्यु-भय है। दोनों रोगी कभी-कभी अपने मृत्यु-काल की भविष्यवाणी किया करते हैं। दोनों भीड़ से डरते हैं, घर से निकलने से डरते हैं। अर्जेन्टम नाइट्रिकम की विशेषता यह है कि अगर कुछ काम उसे करना हो, तो उससे पहले ही उसका चित्त घबरा उठता है। किसी मित्र को मिलना हो, तो जब तक मिल नहीं लेता तब तक घबड़ाया रहता है: गाड़ी पकड़नी हो तो जब तक गाड़ी पर चढ़ नहीं जाता तब तक परेशान रहता है; अगर व्याख्यान देने उसे जाना है तो घबराहट के कारण उसे दस्त आ जाता है, शरीर में पसीना फूट पड़ता है। आगामी आने वाली घटना को सोच कर घबराये रहना, उस कारण दस्त आ जाना, पसीना फूट पड़ना, उस कारण नींद न आना अर्जेन्टम नाइट्रिकम का विशेष लक्षण है। ऊंचे-ऊंचे मकानों को देखकर उसे चक्कर आ जाता है। एकोनाइट ठंड से बचता है, अर्जेन्टम नाइट्रिकम ठंड को पसन्द करता है। अर्जेन्टम नाइट्रिकम ठंडी हवा, ठंडे पेय, बर्फ, आइसक्रीम पसन्द करता है। पल्सेटिला की तरह बन्द कमरे में उसका जी घुटता है, एकोनाइट में ऐसा नहीं होता। अर्जेन्टम का भय ‘पूर्व-कल्पित भय’ (Anticipatory) है, एकोनाइट का भय हर समय रहने वाला भय है।
*भय में एकोनाइट तथा ओपियम की तुलना – भय से किसी रोग का उत्पन्न हो जाना एकोनाइट तथा ओपियम इन दोनों में है, परन्तु भय से उत्पन्न रोगी प्रारंभिक अवस्था में एकोनाइट लाभ करता है, परन्तु जब भय दूर न होकर हृदय में जम जाय और रोगी अनुभव करे कि जब से मैं डर गया हूँ तब से यह रोग मेरा पीछा नहीं छोड़ता, तब ओपयिम अच्छा काम करता है। इस लक्षण के साथ ओपियम के अन्य लक्षणों को भी देख लेना चाहिये।



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