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गर्मी की दुश्मन सेहत की दोस्त राबड़ी


गर्मी की दुश्मन सेहत की दोस्त राबड़ी


महानगर वासियों के लिए राबड़ी नाम वह भी लू  का दुश्मन।  वह कोतूहल पैदा करने वाला है लेकिन राजस्थान हरियाणा के लोगों से पूछेंगे तो इसके फायदे जानकर आप ताज्जुब करेंगे राबड़ी राजस्थान और हरियाणा का
प्रमुख का शीतलता देने वाला पेय है जो छाछ और आटे से बनाया जाता है। 

आटा, जौ, बाजरा और मक्का का लिया जाता है कुछ जगह जौ की घाट का प्रयोग करते हैं।आटा छाछ में घोल कर कढी की तरह उबाला जाता है।इसमे तड़का नही लगाया जाता। गर्म गर्म खानी होतो रात के भोजन के साथ दूध मिला कर खाते हैं।खाना खाते समय रबडी़ हो तो सब्जी आचार की जरूरत नही होती। यह काफी सस्ता बहुत लाभकारी और लोकप्रिय पर है इसमें प्राकृतिक रूप से ऐसी शक्ति होती है कि सेवन करने वाले को लू और गर्मी से बचाकर शांति प्रदान करती है। 

इसमें मादक द्रव्य यानी कोई नशीला पदार्थ नहीं मिलाया जाता इसमें कुदरती ऐसे तत्व होते हैं जो बहुत शांत और गहरी नींद लाने में सक्षम होते हैं। 

राजस्थान में जहां 50 डिग्री तापमान हो जाता है वहां यह वरदान का काम करती है। भरी दोपहरी में गर्म हवा और लू में काम करने वाले लोग तो इसके सेवन से सुरक्षित रहते हैं। जो पहली बार एक गिलास राबड़ी पी लेगा तो उसे निश्चय ही किसी मादक पय का आभास होगा। जबकि यह सच है कि इसमें बनाने में केवल आटा और छाछ का प्रयोग होता है लेकिन एक गिलास राबड़ी छाछ मिली हुई एक गिलास बियर का नशा देती है।  साथ ही यह दुष्परिणाम रहित शीतलता प्रदान करने वाली शरीर का पोषण करने वाली है। 

घरों में रहने वाले राजस्थानी हरियाणा वासी अब भी सुविधानुसार बनाते हैं स्वाद बढ़ाने के लिए बनाते समय इसमें हरा प्याज भी डाला जाता है। आजकल तो राबड़ी पांच सितारा होटलों में भी उपलब्ध है जो देशों के साथ विदेशी पर्यटकों को भी लुभावनी और स्वदिष्ट लगती है। 

राबड़ी के लाभ :-


राबड़ी पीने से तनाव से मुक्ति मिलती है नींद अच्छी आती है और गर्मी से बचाव होता है। 


रक्तचाप ब्लड प्रेशर में लाभ होता है। भूख खुलकर लगती है। पेट में जलन शांत कर देती है और ठंडक देती है। 

पथरी में सहायक है। आज की नई तकनीक ने हमारा जीवन स्तर को आसान बना दिया लेकिन जीवन के भागमभाग के संघर्ष ने हमें अपने संस्कारों और खान-पान रहन-सहन से कोसों दूर कर दिया। परिणाम भी सामने हैं जिनको देखकर भी आंख बंद किए हैं सवेरे आंख खुलते ही चाय की व्यवस्था तो हो जाती है लेकिन पानी पीना फैशन से बाहर मानते हैं। 

शीतलता प्राप्त करने के लिए कई तरह के शीतल पय  तो आराम से मिल जाते हैं मगर परंपरागत पय  राबड़ी, सत्तू शरबत आज भी दुर्लभ हैं। संभव हो तो परंपरागत संस्कार अपनाएं और स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए पैसे और परेशानी से बचें।  

कड़ी की तरह उबाला जाता है इस में तड़का नहीं लगाया जाता गरम खानी हो तो रात को दूध के साथ खाते हैं सवेरे और दोपहर में दही या छाछ के साथ खाते हैं। 

खाते समय राबड़ी हो तो सब्जी आचार की जरूरत नहीं होती यह काफी सस्ता बहुत लाभकारी और लोकप्रिय  है। इसमें प्राकृतिक रूप से ऐसी शक्ति होती है कि सेवन करने वाले को लू और गर्मी से बचाकर शांति प्रदान करती है। 

वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय 'हरीश'



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