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पेट साफ़ करने के लिए घरेलु नुस्के

पेट साफ़ करने के लिए घरेलु नुस्के




दिनभर कुर्सी पर बैठे रहना, ना खाना और अनियमित जीवनशैली इन्हीं वजह से आज कब्ज किसी ना किसी रूप में सब को परेशान कर रहा है।  अपनाये कुछ उपाय और भगाइए कब्ज का अनचाहा तनाव।








किसी समय जब मोटा खाना और मोटा पहनने का जमाना था, तब कब्ज का रोगी ढूंढने से मिलता था। बदलाव की बयार में सब कुछ बदल रहा है खानपान के साथ जीवन शैली भी बदल गई है। इसलिए कब्ज अब कोई रोग नहीं, आम  समस्या मानी जाने लगी है। लेकिन आपको बता दें कि यह कब्ज  कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। इसलिए कब्ज को पनपने न  दे उसे बाहर खदेड़े। 

उठने सोने में कोई दिनचर्या ना होना, वातानुकूलित भवनों का निवास, सुबह जल पीने की जगह आधुनिक पेय  का सेवन, घूमने के स्थान पर घर में ही चक्कर काट लेना, आदि बातें कब्ज के प्रमुख कारण हैं। लेकिन पहले यह जानिए कब्ज होती कैसे हैं ? स्वास्थ्य के ऊपर क्या प्रभाव डालता है कब्ज ? आप रोज दिन  मैं दो बार भोजन करते हैं यदि वह भोजन पचने के बाद आंतों में मल के रूप में रुका रहे तो कब्ज हो जाता है। पाचन का सिद्धांत तो यह है कि जो व्यक्ति दिन में दो बार भोजन करें उसे दो बार टॉयलेट जाना चाहिए। सवेरे एक बार जाता है और उसमें भी पेट पूरी तरह साफ नहीं हो पाता तो मानिए  कब्ज है। दिन में दो-तीन बार शौच जाना कई दिन तक टॉयलेट ना जाना भी कब्ज का ही लक्षण है।

पाचन शक्ति का असंतुलन


आयुर्वेद के अनुसार जब मल  आमाशय में इकठ्ठा होकर वायु विकार का रूप लेकर बाहर ना निकले तो अनाह  कब्ज होने लगता है।  चिकित्सकों के अनुसार दूषित खान पान से पाचन शक्ति संतुलित नहीं रहती तो पेट में अपानवायु एकत्रित कर कब्ज पैदा करती है। अन्य कारणों से रूखा-सूखा खाना, पानी कम पीना, चाय कॉफी का अधिक सेवन करना, धूम्रपान, तंबाकू, गुटखा, शराब का सेवन, पखाना लगने पर उसे रोकना, शारीरिक श्रम या व्यायाम ना करना, परिश्रम के बाद आराम ना करना, मैदा, बेसन और तली चीजें ज्यादा खाना, बिना भूख खाना, जल्दी-जल्दी खाना, बार-बार खाना, मिर्च मसाले, अचार आदि का ज्यादा सेवन करना, भोजन में दाल, सब्जियां, हरी सब्जियों का अ भाव, खाने के साथ ही आप बीच-बीच में पानी पीना, खाना खाते ही बैठकर काम पर लग जाना, खाते ही सो जाना, अभी पाचन तंत्र को प्रभावित कर कब्ज करते हैं।  इसके अलावा उड़द की दाल, राजमा, अरबी, भिंडी, बासी भोजन भी कब्ज करता है। कब्ज वाले व्यक्ति को थकान, सुस्ती, आंखों में भारीपन, मुंह का बिगड़ा जाएगा, काम में मन ना लगना आदि लक्षण होते हैं। कभी कभी पेट के भारीपन के कारण दूषित वायु गैस बनकर हृदय  को भी प्रभावित करती है।

कैसे पाएं छुटकारा:-


इसके लिए कुछ साधारण और प्राकृतिक उपाय उपचार इस प्रकार हैं-

सबसे पहले भरपूर नींद लेना आवश्यक है। सवेरे उठकर दो गिलास पानी पीजिए।  टॉयलेट जाने का  रूटीन  बनाइए।  हल्का व्यायाम करने के बाद स्नान करें और फिर हल्का नाश्ता लीजिए। पहले या भोजन के आधे घंटे बाद पानी पीना चाहिए।  पालथी लगाकर धीरे-धीरे चबाकर भोजन करें।  यदि आवश्यक हो तो खाने के बीच पानी पिए सिर्फ एक दो घूंट। पूरे दिन में आठ -10 गिलास पानी पीना जरूरी है। मोटे पिसे  आटे की रोटी या मिस्सी रोटी खाएं, घी, मक्खन, छाछ, पत्तेदार सब्जियां, केले के अतिरिक्त सभी फल, अंकुरित अन एवं सलाद का प्रयोग करें।

चीनी तथा चीनी से बनी चीजें हानिकारक होती हैं इसके गुड़ की डली उपयोगी है।  रात को सोने से 2 घंटे पहले भोजन करना हितकर है। भोजन के बाद धीमी गति से 200 कदम अथवा यथासंध्या टहलना हितकर है।  सवेरे उठते ही 2-4 गिलास पानी या एक गिलास गर्म पानी में आधा नींबू शहद मिलाकर पीना लाभकारी है।

सामान्य उपचारों में रात को हरड़ का चूर्ण 3 ग्राम व जरा सा नमक मिला गर्म पानी से लीजिए 3 से 6 ग्राम पानी से लें। बचआदि चूर्ण 2 ग्राम गुनगुने पानी से चित्रकादि वटी दो-दो गोली दिन में तीन बार चूसे या पानी से लें।

रात में भोजन के बाद कुमारी आसव 20 मिलीलीटर बराबर पानी में मिलाकर दोपहर भोजन के बाद अभयरिस्ट 20 मि.ली. 6 चम्मच बराबर पानी में मिलाकर लेंगे तो कब्ज की समस्या दूर हो जाएगी अंगूर और मुनक्का का सेवन हितकर है।

सप्ताह में 1 दिन का उपवास, नशीले पदार्थों का त्याग, विषय वासना से संकोच, अकारण क्रोध को त्यागने से भी कब्ज की समस्या का निवारण आसान आता है। 

वैद्य हरिकृष्ण पाण्डेय 'हरीश '




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