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मोदी के कांग्रेस पर प्रहार


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देने पर लोगों की पहली प्रतिक्रिया यही थी कि धो दिया कांग्रेस को। कांग्रेस के कारनामे जनता के सामने आ गए हैं। जमीन से जुड़े हमारे प्रधानमंत्री जी का यह कहना कि ‘ये चाहते हैं कि बैटिंग इन्‍हें ही मिले नहीं तो मैच खत्‍म’। सचमुच बचपन की याद दिला दी। जब एक टीम बैटिंग करने के बाद फील्डिंग करते समय हारने लगती तो मैच खत्म करने की बात करने लगते थे। मोदीजी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का बचपना सबके सामने ला दिया। मोदीजी ने सही कहा है कि राजनीतिक फायदे के लिए कांग्रेस शुरु से ही लोगों का इस्तेमाल करती रही है। कांग्रेस गांधीजी के नाम का इस्तेमाल करके राजनीति में अपनी वंशबेल को बढ़ाती रही। कांग्रेस ने गांधी के नाम का इस्तेमाल तो किया पर उनकी विचारधारा पर कभी अमल नहीं किया। इसी तरह सरदार पटेल का गुजरात विधानसभा चुनाव के समय इस्तेमाल किया और फिर पहले की तरह भूल गए।

मोदीजी से पहले भाजपा अध्यक्ष श्री अमित शाह जी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए राज्यसभा में कांग्रेस की खामियों को जनता के सामने रखा था। कांग्रेस ने मोदीजी के भाषण के दौरान हंगामा मचाकर यह साबित कर दिया कि उनका सदन के नियमों में कोई विश्वास नहीं है। इसी तरह कांग्रेस के नेताओं ने राज्यसभा में अमित शाह जी के भाषण के दौरान टोकाटाकी की थी। अमितजी ने करारा जवाब दिया था कि मेरी बात सुन लो, अभी छह साल और बोलना है। इसी तरह मोदीजी ने कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के नेताओं के हंगामे के बीच अपनी बात को बड़ी मजबूती से रखा। उनकी इस मजबूत शैली का देश कायल है। हमें अपने प्रधानमंत्री पर गर्व हैं। कांग्रेस के खिलाफ मोदीजी की आक्रामकता से देश कांग्रेस मुक्त भारत की तरफ बढ़ रहा है। सच में देश गांधीजी के कांग्रेस को खत्म करने के विचार की तरफ बढ़ रहा है। यह भी सच है अगर पंडित जवाहर लाल नेहरू की जगह सरदार पटेल पहले प्रधानमंत्री होते तो आज देश को तमाम समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता था। सरदार पटेल के प्रयासों के कारण ही देश की तमाम रियासते एक झंडे के नीचे आईं थी। देश की एकता, अखंडता, संप्रभुता और सीमाओं को सुरक्षित बनाने के लिए सरदार पटेल ने बड़ी भूमिका निभाई थी। सरदार पटेल की दमदार भूमिका को राजनीतिक कारणों से कांग्रेस ने कभी तरजीह नहीं दी।

कांग्रेस आज केवल विरोध के लिए विरोध कर रही है। कांग्रेस के पास मोदी सरकार या भाजपा के खिलाफ कोई मुद्दा नहीं है। कांग्रेस तो अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकती है। प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी ने पहले पंजाब में आतंकवाद को बढ़ावा दिया और फिर उनकी हत्या के बाद कांग्रेसियों ने सिखों का नरसंहार किया। कांग्रेस के नेताओं की पुरानी चाल रही है कि मजहब, राज्य और जाति के नाम पर राजनीति की जाए। लोगों को धर्म और जाति के आधार पर बांटा जाए। गुजरात विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस ने जातिवादी राजनीति को बढ़ावा दिया पर सरकार बनाने में कामयाब नहीं हुई। आंध्र प्रदेश के बंटवारे के बाद कांग्रेस सरकार की नीतियों के कारण आंध्र प्रदेश के लोग परेशान हैं। आंध्र प्रदेश को संपत्ति में सही तरह से हिस्सा नहीं मिल पा रहा है। यह सब कांग्रेस ने चुनावी लाभ के लिए किया। हमारे प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश को उसका हक दिलाने के लिए पूरा प्रयास कर रहे हैं।

मोदी सरकार के तीन साल में देश तेजी से तरक्की के रास्ते पर बढ़ रहा है। मोदी सरकार की योजनाओं से गांव, गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं, बुजुर्गों को लाभ हुआ है। गरीबों के बच्चों को स्कूलों में पढ़ने का मौका मिल रहा है। गांवों में महिलाओं को शौच जाने के लिए अंधेरे होने का इंतजार नहीं करना पड़ता। हर घर में रोशनी पहुंचाने का इंतजाम हो रहा है। महिलाओं को धुएं से मुक्ति मिली है। गरीब के बीमार पड़ने पर सस्ते इलाज का इंतजाम हो रहा है। गांवों को सड़कों से जोड़ा जा रहा है। इस कारण कांग्रेस के नेताओं की अपनी लगातार हार के बाद बौखलाहट बढ़ रही है। कांग्रेस के नेताओं का लोकतंत्र में विश्वास ही नहीं है। अगर लोकतंत्र में विश्वास होता तो आज राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं होते। कांग्रेस में अंदरूनी लोकतंत्र का कोई नियम ही नहीं है। इसी वजह से संसद में कांग्रेस के सदस्य अक्सर हंगामा करने पर उतारू रहते थे।
-कैलाश विजयवर्गीय

लेखक भाजपा के महासचिव हैं और राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक विषयों पर बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं।

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