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विश्व पटल पर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी


भारत के 69वें गणतंत्र दिवस पर पहली बार राजपथ पर दस आसियाऩ देशों मलेशिया, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, कंबोडिया, इंडोनेशिया, थाइलैंड, फिलीपींस, म्यांमार और सिंगापुर के प्रमुखों को मुख्य अतिथि बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अन्तराष्ट्रीय स्तर पर देश की नई छवि गढी है।

गणतंत्र दिवस पर दुनियाभर ने भारत की ताकत और महत्व को पहचाना है। यह भी पहला अवसर है कि दस आसियान देशों के दस भाषाओं के 27 अखबारों ने गणतंत्र दिवस पर मोदीजी का लेख छापा है। ‘साझा मूल्य, एक मंजिल’ शीर्षक से लिखे गए लेख में प्रधानमंत्री ने लिखा है कि भारत और आसियान देशों की दोस्ती बेहद महत्वपूर्ण है।

आसियान देशों के नेताओं का अतिथि के तौर पर आना हमारे लिए सम्मान की बात है। यह सामान्य अवसर नहीं है। आसियान देशों और भारत की दोस्ती लगातार गहरी हुई है और 1.9 अरब लोगों की यह पार्टनरशिप दुनिया की करीब एक चौथाई लोगों की दोस्ती है।

मोदीजी ने लिखा, ‘यह साझेदारी भले ही 25 साल पुरानी है, लेकिन भारत के दक्षिणपूर्व एशिया के साथ संबंध दो हजार वर्ष से ज्यादा पुराने हैं। धर्म, संस्कृति, कला, वाणिज्य, भाषा और साहित्य से लेकर सभी क्षेत्रों में हम विविधता के साथ आगे बढ़ रहे हैं

इस लेख के जरिये मोदीजी ने विश्व को संदेश दिया है कि भारत सभी देशों के साथ दोस्ताना संबंध बनाकर हर क्षेत्र में सहयोग चाहता है। इससे पहले दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) सम्मेलन में उनके दिए गए भाषण की पूरी दुनिया में तारीफ हुई है।

भारत के विरोधी देशों को भी आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और संरक्षणवाद पर मोदी के विचारों को समर्थन करना पड़ा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को विश्व आर्थिक मंच में अपने भाषण में ‘अमेरिकी संरक्षणवाद’ पर सफाई देनी पड़ी।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका फर्स्ट का मतलब अकेला अमेरिका नहीं है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि वे हमेशा अमेरिका फर्स्ट की बात तो करेंगे पर अमेरिका फर्स्ट का मतलब अकेला अमेरिका नहीं। इसी दौरान भारत समेत कई देशों के प्रति अमेरिका ने अपनी नीतियों में बदलाव करने की घोषणा की है।

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दावोस में विश्व आर्थिक मंच सम्मेलन में दिए गए भाषण की चीन ने भी खुलकर सराहना की है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संरक्षणवाद के खिलाफ दिया भाषण दर्शाता है कि मौजूदा वक्त में ग्लोबलाइजेश दुनिया का ट्रेंड बन गया है। इससे विकासशील देशों समेत सभी देशों को लाभ पहुंचता है। संरक्षणवाद के खिलाफ लड़ने और ग्लोबलाइजेशन को बढ़ावा देने में भारत और चीन के बीच काफी समानता है। निश्चित तौर पर यह भारत की एक बड़ी जीत है।

मोदी सरकार ने देश को तेजी से तरक्की के रास्ते पर बढ़ाते हुए दुनियाभर के देशों के साथ दोस्ती के लिए कई कदम बढ़ाएं हैं। आसियान देशों के आतंकवाद के खिलाफ अभियान को भारत ने तेजी से आगे बढ़ाया है।

इससे पहले 2015 में गणतंत्र दिवस पर तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबाम को मुख्य अतिथि बनाकर भारत-अमेरिका के संबंधों को मजबूती मिली। 2015 में पहली बार गणतंत्र दिवस पर किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहली बार राजपथ पर भारत की ताकत देखी। 2016 में मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाकर फिर दुनिया को एक नया संदेश दिया। यूरोप के बदलते माहौल के बीच रक्षा समझौतों के लिए यह एक बड़ा मुकाम माना गया। खाड़ी देशों के साथ नए दोस्ताना और कूटनीतिक संबंधों की पहल के लिए 2017 में गणतंत्र दिवस पर अबू धाबी के शहजादे मोहम्मद-बिन-जायेद-अल-नाहयान को में मुख्य अतिथि तौर पर बुलाय गया। इस साल आसियान देशों के 10 राष्ट्राध्यक्षों को बुलाकर चीन को बड़ा संदेश दिया गया है।

डोकलाम विवाद पर बार-बार भारत को चेताने वाले चीन के समक्ष एक नई चुनौती पेश की गई है। भारत की आवभगत से अभिभूत आसियान देशों के राष्ट्र प्रमुखों ने भी दोस्ती के नये आयामों की भरपूर प्रशंसा की है। दावोस में मोदीजी के भाषण की हर कोई तारीफ कर रहा है। यह माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने दुनियाभर के सामने भारत की ताकत और नए कार्यों को मजबूती से सामने रखा है। उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि भारत में ही पूरे विश्व को शांति के लिए एक मंच पर लाने की क्षमता है।

दावोस के बाद गणतंत्र दिवस पर अपने लेख जिस तरह से प्रधानमंत्री दुनिया को आतंकवाद से मुक्त कराने के लिए व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों की बात की है उससे भी यह संदेश गया है कि भारत प्राचीन काल में हमेशा शांति की बात करता रहता है और आज भी उसी रास्ते पर दुनिया को आगे ले जाना चाहता है।

कोई देश छोटा हो या बड़ा सभी की स्वायत्ता का सम्मान करते हुए ही दुनिया में तरक्की हो सकती है और शांति आ सकती है। जलवायु परिवर्तन पर दुनिया को चेताते हुए प्रधानमंत्री ने वैश्विक चुनौती पर भारत का पक्ष बहुत मजबूती से रखा है। इसी तरह आतंकवाद के खात्मे के लिए उन्होंने सभी देशों से मजबूती से खड़े होने की अपील की है। इससे विश्वभर में शांति के लिए सभी की निगाहें भारत पर टिकी है और इस पहल से मोदी विश्वपटल पर छा गए हैं।

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