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सीसीटीवी फुटेज में दो पुलिस कर्मियों के साथ डाॅक्टर और नर्स भी दिखे।

सीसीटीवी फुटेज में दो पुलिस कर्मियों के साथ डाॅक्टर और नर्स भी दिखे।
रेजीडेंट डाॅक्टर मरीजों के हित में सोचे।
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22 नवम्बर को अजमेर में रेजीडेंट डाॅक्टर 8वें दिन भी हड़ताल पर रहे। पिछले दो दिन से प्रदेश के पांचों मेडिकल काॅलेजों के रेजीडेंट डाॅक्टर भी हड़ताल पर हैं। सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। अजमेर के डाॅक्टरों ने गत 11 नवम्बर की एक घटना को लेकर विरोध जताया था और फिर हड़ताल पर चले गए थे। डाॅक्टरों का कहना है कि 11 नवम्बर को कई पुलिस वाले जनाना अस्पताल के लेबर रूम में जबरन घुस गए, इससे महिलाओं की लज्जा भंग हुई। डाॅक्टरों का कहना है कि पुलिस को लेबर रूम में घुसने या कोई जांच करने से पहले अस्पताल के प्राचार्य और अधीक्षक से वार्ता करनी चाहिए थी। पुलिस ने यह घिनौना कृत्य किया है कि वे जूते पहन कर सीधे लेबर रूम में घुस गए। हालांकि इस संबंध में पुलिस का कहना है कि लेबर रूम में भर्ती एक महिला ने डाॅक्टर पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। उसी की जांच करने पुलिस कर्मी लेबर रूम में गए थे। जांच के दौरान ही रेंज के आईजी बिजू जाॅर्ज जोसफ ने जनाना अस्पताल के प्रबंधन से सीसीटीवी फुटेज मंगा कर जांच की तो पता चला कि 11 नवम्बर को मात्र दो पुलिस कर्मी लेबर रूम में मौका मुआयना करने के लिए गए थे। इन दोनों पुलिस कर्मियों के पीछे एक डाॅक्टर और नर्स भी थी। मौका देखने के बाद दोनों पुलिस कर्मी लौट आए। यानि अनेक पुलिस कर्मियों के लेबर रूम में प्रवेश करने वाले आरोप सही नहीं है। सीसीटीवी फुटेज के बारे में प्रशासन ने रेजीडेंट डाॅक्टरों को भी जानकारी दी है और आग्रह किया है कि वे हड़ताल को समाप्त कर दे। जहां तक पीड़िता की शिकायत पर डाॅक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की बात है तो पुलिस को किसी भी शिकायत पर मुकदमा दर्ज करना ही होता है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने अभी तक भी किसी डाॅक्टर के खिलाफ कार्यवाही नहीं की है। उल्टे दो दिन पहले एक महिला डाॅक्टर ने जो शिकायत दी, उस पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जहां तक अस्पताल परिसर में डाॅक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा का सवाल है तो पर्याप्त इंतजाम किए जाते हैं। दोनों प्रकरणों में जांच विचाराधीन है।
मरीज के हित में सोचे डाॅक्टरः
दो पुलिस कर्मियों के लेबर रूम में घुसने की घटना वाकई निदंनीय है और अस्पतालों में चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा होनी भी चाहिए। लेकिन डाॅक्टरों को भी अब मरीजों के हित में सोचना चाहिए। पिछले एक सप्ताह से अजमेर में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। गरीब व्यक्तियों के आॅपरेशन नहीं होने से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समाज में डाॅक्टरों को भगवान का दर्जा दिया गया है। ऐसे में डाॅक्टरों को हड़ताल का रास्ता छोड़कर मरीजों की सेवा करनी चाहिए। वैसे भी डाॅक्टर और पुलिस के विवाद में मरीजों का कोई कसूर नहीं ंहै। डाॅक्टरों को यदि प्रशासन और पुलिस के खिलाफ कार्यवाही करवानी ही है तो अन्य रास्ते भी है। डाॅक्टर समुदाय तो वैसे भी संगठित समूह है। वैसे भी अपनी मांग को मनवाने के लिए दबाव बनाया जा सकता है। यह माना कि राज्य की भाजपा सरकार से डाॅक्टरों की नाराजगी हो सकती है, लेकिन चुनाव के मौके पर इस नाराजगी को मरीजों की कीमत पर दूर नहीं किया जा सकता। इस मामले में सरकार में बैठे उच्चाधिकारियों को भी संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। अधिकारियों का भी यह प्रयास हो कि वे हड़ताल को जल्द से जल्द खत्म करवावे।
एस.पी.मित्तल) (22-11-18)
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