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जिस ओम माथुर की शक्ल देखना पसंद नहीं था उन्हीं के घर पर तीन घंटे तक बैठी रही राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे।

जिस ओम माथुर की शक्ल देखना पसंद नहीं था उन्हीं के घर पर तीन घंटे तक बैठी रही राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे। अब पता चला कैसी होती है राजनीति। शेखावत ही हो सकते हैं प्रदेश अध्यक्ष।
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राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे जिन ओम माथुर की शक्ल देखना पसंद नहीं करती थी, उन्हीं ओम माथुर के दिल्ली स्थित सरकारी आवास 9 सफदर गंज में 15 जून को तीन घंटे तक बैठी रहीं। मुख्यमंत्री का पूरा लवाजमा भी माथुर के घर पर टिका रहा। लम्बे अर्से बाद माथुर के आवास पर इस तरह की चहल पहल देखी गई। 14 जून की रात को राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति और अन्य मामलों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह के बीच जो गंभीर मंत्राण हुई उसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर भी उपस्थित रहे। इससे वसुंधरा राजे के समझ में आ गया कि अब राजस्थान की राजनीति में ओम माथुर को महत्व मिलने वाला है। इसे राजनीति का चरित्र ही कहा जाएगा कि वसुंधरा राजे प्रातः 11 बजे ही ओम माथुर के सरकारी आवास पर पहुंच गई। कोई तीन घंटे की मुलाकात में ओम माथुर ने भी बता दिया कि राजस्थान के बारे में राष्ट्रीय नेतृत्व क्या चाहता हैं। हालांकि सीएम राजे अभी भी दिल्ली में ही है और प्रधानमंत्री से मिलने का इंतजार कर रही हैं। लेकिन जानकारों की माने तो ओम माथुर के घर से निकल कर सीएम राजे बीकानेर हाउस पहुंच गई। सीएम के प्रवेश करने के साथ ही बीकानेर हाउस में मीडिया की एंट्री बंद कर दी गई है। जानकारों के अनुसार माथुर से मिलने के बाद सीएम राजे बेहद खफा है। मालूम हो कि पिछले दो दिन से दिल्ली में रहते हुए सीएम राजे ने प्रदेश अध्यक्ष को लेकर जबरदस्त लाॅबिंग की। राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने यह दिखाने की कोशिश की कि राजस्थान भाजपा के सारे नेता और मंत्री एक साथ हैं। यहां तक कि औंकार सिंह लखावत जैसे नेताओं को भी दिल्ली बुला लिया गाय, लेकिन मुख्यमंत्री के इन तौर तरीकों का राष्ट्रीय नेतृत्व पर कोई असर नहीं पड़ा। सीएम के विरोधी माने जाने वाले राज्यसभा के सांसद ओम माथुर को ही मोदी और अमितशाह की मंत्रणा में शामिल किया गया। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय नेतृत्व अभी भी केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहता है। जबकि सीएम राजे अंतिम समय तक विरोध में है। सूत्रों के अनुसार सीएम राजे ने पिछले दो दिन में दिल्ली में जो राजनीतिक गतिविधियां की उससे भी राष्ट्रीय नेतृत्व बेहद खफा है। अब देखना है कि सीएम की मुलाकात प्रधानमंत्री से हो पाती है या नहीं। इस बीच भापा पुनः शामिल हुए राज्यसभा के सांसद किरोड़ीलाल मीणा ने 15 जून को दिल्ली में केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से कोई एक घंटे तक मुलाकात की। राजस्थान की राजनीति की दृष्टि से इस मुलाकात को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
माथुर से मतभेदः
राजस्थान की राजनीति में ओम माथुर और वसुंधरा राजे का विवाद जग जाहिर है। हालांकि माथुर लम्बे समय तक प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रहे और राजस्थान भर में संगठन को मजबूत करने में माथुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही, लेकिन सीएम राजे से विवाद के चलते माथुर को राजस्थान की राजनीति से दूर कर दिया गया। कभी गुजरात तो कभी यूपी, के चुनावों का प्रभारी बना दिया। माथुर जब कभी राजस्थान आते तो भाजपा के कार्यकर्ता नेता बचते दिखे। ऐसा माहौल बना कि यदि माथुर का स्वागत सत्कार किया गया तो सीएम राजे नाराज हो जाएंगी। यही वजह रही कि राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होने के बाद भी राजस्थान में माथुर का कोई कार्यक्रम नहीं हुआ। राज्यसभा का सदस्य भी राष्ट्रीय नेतृत्व के दबाव से बनाया गया। लेकिन 15 जून उन्हीं ओम माथुर के दर पर सीएम राजे को जाना पड़ा।


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