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Liver disease in Hindi | लिवर से जुडी बीमारियाँ

हमने इससे पहले अपने लेख में लिवर और उसकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से पढ़ा आइये इस लेख में हम Liver disease in Hindi | लिवर से जुडी बीमारियाँ के बारे में जानते है…..

Liver Disease in Hindi

1. विषाणुज हैपेटाइटिस (Viral Hepatitis) – हेपेटाइटिस एक ऐसा विकार है । इससे संक्रमित रोगी के लिवर में सूजन आ जाती है। यह आमतौर पर हेपेटाइटिस नामक वायरस से फैलता है । यह मुख्यतः पाँच प्रकार के होते है जिसे A,B,C,D,E के नाम से जानते है  ।
Hepatitis A और E को आम बोलचाल की भाषा में जोडिंस और पीलिया कहा जाता है । आमतौर पर इसका संक्रमण दूषित पानी और दूषित भोजन के सेवन से होता है । Hepatitis C, और D आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के मूत्र,खून अथवा अन्य द्रवय पदार्थों के संपर्क में आने से होता है । और Hepatitis B का संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के साथ शारीरिक संसर्ग से फैलता है । इसके अलावा इससे संक्रमित माँ से होने वाले बच्चो को भी हो सकता है ।

2. जोडिंस/पीलिया (Yellow Fever/Jaundice) – जिगर (Liver) के बीमार होने के कारण रोगी को पीलिया होता है । सामान्यत: रक्तरस में पित्तरंजक (Billrubin) का स्तर 1.0 प्रतिशत या इससे कम होता है, किंतु जब इसकी मात्रा 2.5 प्रतिशत से ऊपर हो जाती है तब जोडिंस/पीलिया के लक्षण प्रकट होते हैं । इसमें उसकी त्वचा का रंग पीला पड़ जाता है । इसी कारण इस बुखार को पीलिया कहते है । Jaundice में अक्सर मरीजों को तेज बुखार होता और शरीर पीला पड़ जाता है। इस रोग का कारक एक सूक्ष्म विषाणु (Flavivirus) है, जिसका संवहन एडीस ईजिप्टिआई (Aedes Aegypti) जाति के मच्छरों द्वारा होता है ।

3. ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर (Autoimmune Disorder) – यह रोग अधिकतर महिलाओं में पाया जाता है। इसके संक्रमण से शरीर के तंत्रिका तंत्र,कोशिकाओं और उतकों को नुकसान पहुचता है । इस रोग के दौरान लीवर पर भी असर पड़ता है और लीवर का कार्य-क्षमता घटती है ।

4. लीवर सिरोसिस (Liver Cirrhosis) :- Liver Cirrhosis धीमी गति से बढ़ने वाली लीवर की बीमारी है ।जिससे संक्रमित व्यक्ति का लिवर में लिवर अपने वास्तविक आकार में न रहकर सिकुड़ने लगता है और लचीलापन खोकर कठोर हो जाता है। । इस रोग से ग्रसित मनुष्य के Liver की कोशिकाएं बडे पैमाने पर नष्ट हो जाती हैं और उनके स्थान पर फाइबर तंतुओं का निर्माण हो जाता है । जो कि स्वस्थ लीवर के उत्तको को क्षतिग्रस्त कर देता है, और इससे लीवर की कार्यप्रणाली में दिक्कते पैदा हो जाती है. ये स्कार उत्तक रक्त प्रवाह को रोक देते हैं तथा पोषण और हार्मोन की प्रक्रियाओं को धीमा कर देते हैं. साथ ही ये प्रोटीन सहित लीवर द्वारा अन्य स्रावित हार्मोन की प्रक्रिया को धीमा या प्रभावित करता है.

5. फैटी लिवर (Fatty Liver) :- लिवर में वसा यानि fat के अधिक जमाव से उत्पन होने वाला संक्रमण ही फैटी लिवर कहलाता है । यह भी लिवर सिरोसिस की तरह ही लिवर की एक खतरनाक संक्रमण है । वसायुक्त भोजन करने, अनियमित दिनचर्या जैसे व्यायाम न करना, तनाव, मोटापा, शराब का सेवन या किसी बीमारी के कारण लंबे समय तक दवाइयां लेने से फैटी लिवर की समस्या हो सकती है।

6. लिवर फेल्योर(Liver Failure) :- लिवर से संबधित किसी भी बीमारी की समस्या यदि लंबे समय तक चले या उसका ठीक से इलाज न हो तो इसमें अवरोध उत्पन होने लगता है और यह अंग काम करना बंद कर देता है जिसे लिवर फेल्योर कहते हैं। यह समस्या दो तरीके की होती है। पहली एक्यूट लिवर फेल्योर, जिसमें मलेरिया, टायफॉइड, हेपेटाइटिस- ए, बी, सी, डी व ई जैसे वायरल, बैक्टीरियल या फिर किसी अन्य रोग से अचानक हुए संक्रमण से लिवर की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं। दूसरा, क्रोनिक लिवर फेल्योर है जो लंबे समय तक LIver से जुड़ी बीमारी के कारण होता है। इन दोनों अवस्थाओं में लिवर ट्रांसप्लांट से स्थायी इलाज होता है।

7. लीवर/यकृत कैंसर (Liver Cancer/Hepatic cancer यह सबसे घातक रोग है । जो की अमूमन बहुत कम ही देखनो को मिलता है । लिवर या यकृत कैंसर लीवर की कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि से उत्पन होने वाला रोग है । मानव शरीर अपनी आवश्यकता अनुसार ही नई कोशिकाओं का निर्माण करता है जब कुछ कोशिकाओं का एक ऐसा समूह जो कि अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगता है । उनकी बढ़त नियंत्रित नहीं होती है। इसी अवस्था को ही Liver Cancer कहते है । ये कोशिकाएं दो प्रकार की होती है जिसमें पहला बिनाइन ट्यूमर (Benign Tumour) और दूसरा मेलिगनेन्ट ट्यूमर (Malignant Tumour) कहा जाता है। जब मेलिगनेन्ट ट्यूमर असीमित तरीके से बढ़ने लगती है और मानवीय शरीर को प्रभावित करने लगता है और साथ ही साथ  अपने पास के सामान्य ऊतकों (Tissues) को नष्ट करने लगती है इस संक्रमण को Liver Cancer के नाम से हम जानते है ।

8. लिवर एबसेस (Liver Abscess) – Liver Abscess को आम बोल चाल के भाषा में जिगर का फोड़ा कहते है ,इससे संक्रमित रोगी के जिगर में सिकुड़न पैदा होती है और फिर उसमें फोड़ा निकल आता है। Liver में उत्पन्न होने वाला यह फोड़ा जब पक जाता है तो रोग सांघातिक हो जाता है। इसके बाद ऑपरेशन करने की नौबत आ जाती है लेकिन अधिकतर देखा गया है इस रोग से पीड़ित रोगी का ऑपरेशन करने पर अधिकतर रोगियों की मृत्यु हो जाती है। जिगर में घाव होने से इससे निकलने वाला दूषित द्रव खून में मिलकर खून को गन्दा कर देता है, जिससे शरीर कमजोर और रोगग्रस्त हो जाता है।

संबधित लिंक
1. लिवर और उसकी कार्यप्रणाली
2. लिवर | जिगर खराब होने के लक्षण
3. लिवर ख़राब होने के कारण

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