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Water Pollution : Causes, Effects and Solution in Hindi | जल प्रदूषण

Water Pollution : Causes, Effects and Solution in Hindi | जल प्रदूषण, प्रदूषण का एक सबसे खतरनाक और खराब स्वरूप है। ऐशा प्रदूषण जो जल के स्वाभाविक गुणों को इस प्रकार परिवर्तित कर दे कि जल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो जाए या उसकी उपयोगिता कम हो जाए जल प्रदूषण कहलाता है। या दूसरी शब्दो में कह सकते हैं जल प्रदूषण जल की गुणवत्ता में प्राकृतिक अथवा मानवकृत परिवर्तन है, जो भोजन एवं पशु स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि, मत्स्य अथवा मनोरंजन के प्रयोजनों के लिये अप्रयोज्य एवं खतरनाक हो जाता है।जल प्रदूषण एक प्रमुख वैश्विक समस्या है। इसके लिए सभी स्तरों पर चल रहे मूल्यांकन और जल संसाधन नीति में संशोधन की आवश्यकता है। क्योंकि जल प्रदूषण के कारण पूरे विश्व में कई प्रकार की बीमारियाँ और लोगों की मौत हो रही है



Water Pollution : Causes, Effects and Solution in Hindi

जल जो की एक ऐसा रंगहीन द्रव है जो हाइड्रोजन का मोनो आक्साइड होता है। इसका सूत्र H2O है। 4° सेल्सियस पर इसका घनत्व अधिकतम होता है। हिमांक 0° सेल्सियस होता है एवं क्वथनांक 100° सेल्सियस होता है। पृथ्वी पर जितना जल है उसका केवल 0.3 प्रतिशत भाग ही स्वच्छ एवं शुद्ध है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पेयजल ऐसा होना चाहिए जो स्वच्छ, शीतल, स्वादयुक्त तथा गंधरहित हो तथा जिसका पीएच मान 7 से 8.5 के मध्य हो। जल के महत्वता का इसी से पता लगे जा सकता है की मनुष्य के शरीर में वजन के अनुसार 60 फीसदी जल होता है। वनस्पतियों में भी काफ़ी मात्रा में जल पाया जाता है। तो आइये जल प्रदूषण से जुड़े कारण , जल प्रदषूण के दुष्टप्रभाव तथा जल प्रदषूण के समाधान और रोकथाम के उपाय के बारे में विस्तार से जाने।

Water Pollution Causes in Hindi | जल प्रदूषण के स्रोत अथवा कारण

जल प्रदूषण (Water Pollution) के स्रोतों अथवा कारणों को दो वर्गों में बांटा गया हैं –

1) प्राकृतिक स्रोत प्राकृतिक रूप से जल का प्रदूषण जल में भूक्षरण खनिज पदार्थ, पौधों की पत्तियों एवं ह्यूमस पदार्थ तथा प्राणियों के मल-मूत्र आदि के मिलने के कारण होता है। जल, जिस भूमि पर एकत्रित रहता है, यदि वहाँ की भूमि में खनिजों की मात्रा अधिक होती है तो वे खनिज जल में मिल जाते हैं। इनमें आर्सेनिक, सीसा, कैडमियम एवं पारा आदि (जिन्हें विषैले पदार्थ कहा जाता है) आते हैं। यदि इनकी मात्रा अनुकूलतम सान्द्रता से अधिक हो जाती है तो ये हानिकारक हो जाते हैं।

2) मानवीय स्रोत: मानव की विभिन्न गतिविधियों के फलस्वरूप निःसृत अपशिष्ट एवं अपशिष्ट युक्त बहिस्रावों के जल में मिलने से होने वाला जल प्रदूषण मानवीय स्रोत कहलाता हैं जैसे की….

i) घरेलू बहिःस्राव विभिन्न दैनिक घरेलू कार्यों तथा खाना पकाने, स्नान करने, कपड़ा धोने एवं अन्य सफाई कार्यों में विभिन्न पदार्थों का उपयोग किया जाता है, जो अपशिष्ट पदार्थों के रूप में घरेलू बहिःस्राव के साथ नालियों में बहा दिए जाते हैं और अन्ततः जलस्रोतों में जाकर गिरते हैं। इस तरह के बहिःस्राव में सड़े हुए फल एवं सब्जियाँ, रसोई घरों से निकली चूल्हे की राख, विभिन्न तरह का कूड़ा-करकट, कपड़ों के चिथड़े, अपमार्जक पदार्थ, गंदा जल एवं अन्य प्रदूषणकारी अपशिष्ट पदार्थ होते हैं, जो जलस्रोतों से मिलकर Water Pollution का कारण बनते हैं।
ii) वाहित मलः घरेलू तथा सार्वजनिक शौचालय से निकला मल-मूत्र जब नदी-नालों, तालाबों अथवा अन्य जल स्रोतों में मिल जाता है। तो वह जल प्रदूषण का कारण बन जाता है। खुले स्थानों में मनुष्य एवं पशुओं द्वारा त्याज्य मल भी वर्षाजल के साथ बहता हुआ जल स्रोतों में मिलकर जल प्रदूषण का कारण बनता है।
iii) औद्योगिक बहिःस्रावः उद्योग में उत्पादन प्रक्रिया के पश्चात अनेक अनुपयोगी पदार्थ, जिन्हें औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थ कहा जाता है। इनमें से अधिकांश औद्योगिक अपशिष्टों या बहिःस्राव में मुख्य रूप से अनेक तरह के तत्त्व एवं अनेक तरह के अम्ल, क्षार, लवण, तेल, वसा आदि विषैले रासायनिक पदार्थ विद्यमान रहते है। ये सब ही जल में मिलकर जल को विषैला बनाकर प्रदूषित कर देते हैं।
iv) कृषि बहिःस्रावः वर्तमान समय में फसलों से अधिक उत्पादन प्राप्त करने हेतु रासायनिक उर्वरकों, अपतृण नाशकों एवं कीटनाशक दवाओं के प्रयोग का प्रयोग बढ़ता जा रहा है जिससे भू-क्षरण में अत्यधिक वृद्धि हुई है, जिससे नदियों का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है तथा नदी तल भी ऊँचा होने लगता है। झीलें धीरे-धीरे पट कर समतल की स्थिति में पहुँच जाती हैं। कीचड़ मिट्टी के जमाव से जल भी प्रदूषित हो जाता है।
v) ऊष्मीय या तापीय प्रदूषणः विभिन्न उत्पादक संयन्त्रों में विभिन्न रियेक्टरों के अति ऊष्मीय प्रभाव के निवारण के लिये नदी एवं तालाबों के जल का उपयोग किया जाता है। शीतलन की प्रक्रिया के फलस्वरूप उष्ण हुआ यह जल पुनः जल स्रोतों में गिराया जाता है। इस तरह के उष्ण जल से जल स्रोतों के जल के ताप में वृद्धि हो जाती है, जिससे जल प्रदूषित हो जाता है।
vi) तैलीय प्रदूषणः औद्योगिक संयन्त्रों से नदी एवं अन्य जल स्रोतों में तेल एवं तैलीय पदार्थों के मिलने के कारण तैलीय प्रदूषण होता है।
vii) रेडियोएक्टिव अपशिष्ट एवं अवपातः विकसित एवं कुछ विकासशील देशों द्वारा विभिन्न उद्देश्यों के लिए परमाणु परीक्षण किए जा रहे हैं। परीक्षण के दौरान असंख्य छोटे-छोटे रेडियोधर्मी कण वायुमण्डल में दूर-दूर तक फैल जाते हैं और ये कण धीरे-धीरे ज़मीन पर गिरते हैं। इसे अवपात कहते हैं। ये रेडियोधर्मी अवपात पृथ्वी पर गिरकर अन्ततः जलस्रोतों मे पहुँच जाते हैं। इस प्रकार के दूषित जल का उपयोग मानव द्वारा करने पर रेडियोधर्मी पदार्थ शरीर के विभिन्न अंगों में जमा होकर हानिकारक प्रभाव दिखाते हे।




Water Pollution Effects in Hindi | जल प्रदूषण के दुष्टप्रभाव

i) प्रदूषित जल में अनेक प्रकार के रोगकारक जीवाणु होते हैं जिनसे अनेक प्रकार की बीमारियां फैलती हैं जैसे पोलियो, हैजा, पेचिस, पीलिया, मियादी बुखार, वायरल फीवर आदि बीमारियां फैलती हैं।
ii) प्रदूषित जल जलीय स्रोतों में अधिकता होने से सूर्य का प्रकाश गहराई तक नहीं पहुंच पाता जिससे जलीय पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्रिया और उनकी वृद्धि प्रभावित होती है तथा जलीय फर्न एवं जलीय हाईसिंथ की वृद्धि होती है।
iii) जल प्रदूषण का दुष्प्रभाव कृषि भूमि पर भी पड़ रहा है। प्रदूषित जल जिस कृषि योग्य भूमि से होकर गुजरता है, उस भूमि की उर्वरता को नष्ट कर देता है तथा इसका दुष्टप्रभाव कृषि उत्पादन पर भी पड़ता है।
iv) जल प्रदूषण का गम्भीर परिणाम समुद्री जीवों पर भी पड़ता है। उद्योगों के प्रदूषणकारी तत्वों के कारण भारी मात्रा में मछलियों का मर जाना देश के अनेक भागों में एक आम बात हो गई है।
v) जल में विद्यमान सूक्ष्म जीवों एवं विभिन्न पदार्थों के कारण पेयजल का स्वाद अरुचिकर हो जाता है। इसमें कार्बनिक अपशिष्ट पदार्थों के सड़ने से हाइड्रोजन सल्फाइड तथा अमोनिया आदि गैसों की उत्पत्ति होती है, जिससे जल दुर्गन्धयुक्त हो जाता है।

Water Pollution Prevent tips in Hindi | जल प्रदूषण रोकथाम के उपाय

i) जल स्रोतों के पास गंदगी फैलाने, साबुन लगाकर नहाने तथा कपड़े धोने पर प्रतिबन्ध लगाया जाना चाहिए।
ii) किसी भी प्रकार के अपशिष्ट या अपशिष्ट युक्त बहिःस्राव को जलस्रोतों में मिलने नहीं दिया जाना चाहिए।
iii) पशुओं को जल में नहलाने से रोगाणुओं के जल मे फैलने की सम्भावना रहती है इसलिए पशुओं को नदियों, तालाबों आदि मे नहलाने पर प्रतिबन्ध लगाया जाना चाहिए।
iv) औद्योगिक बहिःस्राव या अपशिष्ट को बिना समुचित उपचार किये जलस्रोतो में न बहायें।
v) नदियो मे शवो, अधजले शवो, राख तथा अधजली लकड़ी के बहाने पर प्रतिबन्ध लगाया जाना चाहिए तथा नदी घाटों पर विद्युत शवदाह गृहो का निर्माण कर उसके उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए।
vi) उर्वरकों तथा कीटनाशकों का उपयोग आवश्यकता अनुसार ही किया जाय। डी.डी.टी. ताकि इसी प्रकार स्थायी प्रकृति के कीट नाशको के उपयोग पर प्रतिबन्ध लगाया जाय।
vii) प्रदूषित जल को प्राकृतिक जल स्रोतों में गिराने से पूर्व उसमें शैवाल की कुछ जातियों एवं जलकुम्भी के पौधों को उगाकर प्रदूषित जल को शुद्ध कर लिया जाय।
viii) ऐसी मछलियों को जलाशयो मे छोड़ा जाना चाहिए जो मच्छरों के अण्डे, लारवा एवं जलीय खरपतवार कार क्षरण करती है।
ix) जल प्रदूषण रोकने के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए रेडियो, टेलीविजन आदि संचार माध्यमो से जागृति उत्पन्न करनी चाहिए।
x) शहरों एवं कस्बों में कचरा वर्गीकृत कूड़ेदानों के अनुसार ही फेंकना चाहिए ताकि जल को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। प्राकृतिक तरीके से सड़ने वाले कूड़े का इस्तेमाल खेतों में खाद के रूप किया जा सकता है और इस तरह से ये फसलों के उत्पादन में मदद कर सकते हैं।



Water Pollution Solution tips in Hindi | जल प्रदूषण के समाधान और उपाय

i) धार्मिक समारोह के दौरान मूर्तियों का विसर्जन केवल नियत जगह पर किया जाना है।
ii) पानी में बैक्टीरिया को नष्ट करने के लिए इसमे ब्लीचिंग पाउडर या अन्य रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
iii) घरों में पानी रोगाणु मुक्त बनाने के लिए क्लोरीन की गोलियां, आयोडीन, आदि का इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही बाजार में कुछ अच्छी गुणवत्ता वाले जल शोधक मौजद हैं जो जल को छान कर जल की सफाई करते हैं, हमें इनका इस्तेमाल करना चाहिए।
iv) कोशिस करे की पानी को गर्म करके छान करके उपयोग में लाये
v) पानी की एक बूंद भी बर्बाद करने से हमें बचना चाहिए।

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