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Constipation (कब्ज ) Treatment, Causes, Symptoms, Yoga, Home remedies in Hindi




Constipation Treatment, Causes, Symptoms, Yoga, Home remedies in Hindi, कब्ज पाचन तंत्र से जुड़ी एक सामान्य समस्या है | जो की किसी भी आयु वर्ग के लोगो को प्रभावित कर सकती है | इस रोग की सबसे अच्छी बात यह है की इससे ग्रसित व्यक्ति अपने दिनचर्या में सुधार करके और कुछ घरलू उपायों से इसपर आसानी से काबू पा सकता है | आज हम आपको Constipation यानि की कब्ज से जुड़े कुछ अहम बिन्दुओ पर प्रकाश डालेंगे जो की निम्नलिखित है ……

✪ What is Constipation in Hindi | कब्ज की समस्या क्या हैं ?
✪ Constipation signs in Hindi | कब्ज होने के क्या कारण हैं ?
✪ Constipation symptoms in Hindi | कब्ज होने के क्या लक्षण हैं ?
✪ Constipation Treatment in Hindi | कब्ज के उपाय?
✪ Constipation Medicine name in Hindi | कब्ज की दवा ?
✪ Constipation Ayurvedic & Home remedies in Hindi | कब्ज के घरेलू दवा और इलाज?
✪ Constipation Yogaasan & Exercise in Hindi | कब्ज के लिए योग आसन और व्यायाम?

Constipation (कब्ज ) Treatment, Causes, Symptoms, Yoga, Home remedies in Hindi




Constipation in Hindi | कब्ज (कांस्टीपेशन ) की समस्या क्या हैं ?

कब्ज पाचन तंत्र (आमाशय) से जुड़ी एक समस्या है जिसे कब्ज, मलावरोध, मलबन्ध, कोष्ठबद्धता और कान्सटीपेशन इत्यादि नामों से जाना जाता हैं |
इससे पीड़ित व्यक्ति का पेट ठीक से साफ नहीं हो पाता, कब्ज के कारण अवरोही आंतों में तरल पदार्थो के अवशोशण में अधिक समय लगने के कारण उनमे शुष्क (ठंडा) व कठोर मल अधिक एकत्रित होने लगता है जिसकी वजह से उस व्यक्ति को मल त्याग करने में काफी परेशानी होती है | रोगी को शौच साफ़ नहीं होता है, मल सूखा और कम मात्रा में निकलता है। शौच कुंथन करने या घण्टों बैठे रहने पर निकलता है। जहाँ आम तौर पर लोग दिन में कम से कम एक बार शौच करते हैं वहीँ कांस्टीपेशन का मरीज कई दिनों तक मल त्याग नहीं कर पाता।

Causes of Constipation in Hindi | कब्ज (कांस्टीपेशन ) के कारण ?

i) कब्ज रोग होने की असली वजह भोजन का ठीक प्रकार से न पचना होता है। जो की कई चीजों पर निर्भर करता हैं जैसे की गरिष्ठ भोजन करना (देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन), भोजन चबा-चबाकर न करना अर्थात् जल्दबाजी में भोजन करना खाना खाते समय अधिक जल ग्रहण करना आदि हैं

ii) अगर आप निश्चित मात्रा से कम पानी का सेवन करते हैं तो आप कब्ज से ग्रसित हो सकते है सुबह खाली पेट एवं दिनभर पानी पीते रहने से आंतों में जमा मल निकलने में आसानी होती है, जिससे पेट पूरी तरह से साफ होता है,

iii) अगर कोई व्यक्ति भोजन में रेशायुक्त ( Fiber ) भोजन की मात्रा कम लेता हैं तथा तेल व चिकनाई वाले पदार्थों का अधिक सेवन, अधिक मिर्च-मसाले वाले खाद्य पदर्थो का सेवन, चाय, कॉफी बहुत ज्यादा पीना। धूम्रपान करना व शराब पीना इत्यादि तो ऐशे लोगो के लिए यह सभी चीजे कब्ज का कारण बन सकता हैं

iv) मल तथा पेशाब के वेग को रोकने, व्यायाम तथा शारीरिक श्रम न करने के कारण, घर में बैठे रहना, शैयया पर बहुत समय तक विश्राम करना, शरीर में ख़ून की कमी तथा अधिक सोने के कारण भी कब्ज रोग हो जाता है।

v) ज्यादा या कम भोजन करना, बगैर भूख के भोजन करना कई कई दिनों अथवा घंटो तक खाली पेट रहना भी हमारे लिवर के कार्य क्षमता पर दुष्ट प्रभाव डालती हैं | जो आगे चलकर कब्ज का कारण बन सकता हैं

vi) कभी-कभी किसी अन्य शारीरिक समस्या के चलते भी कब्ज हो सकता है जैसे की – थायरॉयड हार्मोन का कम बनना, आँत, लिवर और तिल्ली की बीमारी, बड़ी आंत में घाव या चोट के कारण, पार्किंसन बीमारी, मधुमेह के रोगियों में भी पाचन संबंधी समस्या देखने को मिलती हैं

vii) महिलाओं में गर्भावस्था के कारण। चिन्ता, भय, शोक इत्यादि उद्दीपनों के कारण। यकृत के रोग, मलाशय की वातिक निर्बलता।

Symptom of Constipation in Hindi | कब्ज (कांस्टीपेशन ) के लक्षण ?

i) कब्ज बनने पर शौच खुलकर नहीं आती, जिससे पेट में दर्द होता रहता है।
ii) रोगी को शौच साफ़ नहीं होता है, मल सूखा और कम मात्रा में निकलता है।
iii) कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को रोजाना मलत्याग नहीं होता है। कब्ज रोग से पीड़ित रोगी जब मल का त्याग करता है तो उसे बहुत अधिक परेशानी होती है।
iv) कब्ज रोग से पीड़ित रोगी की जीभ सफेद तथा मटमैली हो जाती है। जीभ मलावृत रहती है तथा मुँह का स्वाद ख़राब हो जाता है। कभी कभी मुँह से दुर्गन्ध आती है
v) रोगी व्यक्ति के आंखों के नीचे कालापन हो जाता है तथा रोगी का जी मिचलता रहता है। रोगी की भूख मर जाती है, पेट भारी रहता है एवं मीठा मीठा दर्द बना रहता है, शरीर तथा सिर भारी रहता है।
vi) सिर तथा कमर में दर्द रहता है, शरीर में आलस्य एवं सुस्ती, चिड़चिड़ापन तथा मानसिक तनाव सम्बन्धी लक्षण भी मिलते हैं। बहुत दिनों तक मलावरोध की शिकायत रहने से रोगी को बवासीर इत्यादि रोग भी हो जाता हैं।
vii) कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को कई प्रकार के और भी रोग हो जाते हैं जैसे – पेट में सूजन हो जाना, मुंहासे निकलना, मुंह के छाले, अम्लता, गठिया, आंखों का मोतियाबिन्द तथा उच्च रक्तचाप आदि।

Constipation Ayurvedic remedies in Hindi | कब्ज (कांस्टीपेशन ) की आयुर्वेदिक दवा ?

i) त्रिफला चूर्ण दो चम्मच हल्के गरम पानी में घोल कर नित्य रात्रि में सोते समय लेने से कब्ज की तकलीफ में तुरंत राहत मिलती है।
ii) सौंठ अजवायन और काला नमक समान मात्रा में मिश्रित कर के मिश्रण तयार कर लें और एक चम्मच सुबह और एक चमच सोने के पूर्व पानी के साथ लेना कब्ज मिटाता है।
iii) लौंग अजवायन, काली मिर्च, लाहौरी नमक और मिश्री को समान मात्रा में निकाल कर पीस लें और उसमे नींबू निचोड़ कर सुखाने सुखाने के लिए रख दें। इस मिश्रण को गरम पानी के साथ लेने से पेट की तकलीफ़ों में राहत हो जाती है।
थोड़े गरम दूध या पानी के साथ हरड़, बहेड़ा, और आंवला का समान मात्रा में तैयार किया हुआ चूर्ण रात्री में सोने के पहले रोज लेने से कब्ज की बीमारी दूर होती है।
iv) कब्ज़ की तकलीफ दूर करने के लिए मुनक्का एक असरदार उपाय है। आठ से दस मुनक्का गरम दूध में उबाल कर नित्य सेवन करने से पेट को राहत मिलती है। और मल सरलता से त्याग हो जाता है।
v) तुलसी के पत्ते, अनार, लीची, काजू, मटर, खीरा, बादाम, खजूर, पका केला दही के साथ, हींग, गेहूं के पौधे क रस, संतरा, मेथी, गौमूत्र, केसर, अंजीर, दूध और अंजीर, मूली का रस, मूली के हरे पत्ते, मूली के बीजो का चूर्ण और कच्चा प्याज आदि चीजें पाचन शक्ति अनुसार ग्रहण करने से कब्ज की तकलीफ दूर होती है।
vi) त्रिफला, अजवायन और सेधानमक क समान मात्रा वाला मिश्रण रात को सोते समय एक चम्मच गरम पानी के साथ रोज लेने से कब्ज में राहत हो जाती है।

Constipation Home remedies in Hindi | कब्ज (कांस्टीपेशन ) की घरेलू दवा ?

i) तांबे के बर्तन में एक चुटकी नमक डाल कर पानी रात भर ढक कर रख कर सुबह में उस पानी को पीने से कब्ज में राहत हो जाती है।
ii) हल्के गरम गुनगुने पानी में चुटकी भर नमक मिला कर सोने से पूर्व पीने से भी आंते साफ रहती है। और अशुद्ध जमा हुआ मल शौच के समय आसानी से निकल जाता है।
iii) इसबगोल की की भूसी कब्ज में परम हितकारी है। दूध या पानी के साथ २-३ चम्मच इसबगोल की भूसी रात को सोते वक्त लेना फ़ायदे मंद है। दस्त खुलासा होने लगता है।यह एक कुदरती रेशा है और आंतों की सक्रियता बढाता है।
iv) टमाटर खाने से भी कब्ज़ खत्म हो जाता है। खाने के साथ सलाद में कच्चा टमाटर खाना लाभदायी होता है। टमाटर का सूप भी पिया जा सकता है। टमाटर जिद्दी आंतों में जमे पुराने मल को साफ करने का सटीक उपाय है।
v) पपीता पेट ठीक करने में काफी लाभदायक होता है। सेब तथा अंगूर खाने से भी पेट साफ आता है। सेब का ज्यूस काफी उपयोगी होता है। सेब का ज्यूस पीने से आंतों की अंदरूनी सतह पर बदबू और संकमण नाशक परत का सर्जन हो जाता है। और सेब का नित्य सेवन अन्य कई बीमारियों से रक्षण प्रदान करता है।
vi) आंवला का चूर्ण कब्ज़ को जड़ से मिटा देता है। आंवला का चूर्ण रात्री में सोने से पहले अति गुणकारी है।आंवला कई तरह से ग्रहण किया जा सकता है। आप इसका जूस पी सकते हैं। आंवला को सूखा कर चूर्ण बनाया जा सकता है। और आंवला की चटनी भी बना कर खायी जा सकती है। आंवला के मुरब्बे को खाने के बाद ऊपर दूध पीने से कब्ज में राहत हो जाती है।

Medicine name of Constipation in Hindi | कब्ज (कांस्टीपेशन ) की दवा ?

यदि कब्ज किसी अन्य रोग के साथ जुड़ा हो तो उपचार सबसे पहले उस रोग का करना चाहिए जिसके कारण से कब्ज की समस्या हुई हो । कब्ज से जुडी दवा का उपयोग करने से पहले अपने चकित्षक से सलाह अवश्य लें ।

i) यदि हृदय के रोग के कारण से कब्ज की समस्या हो तो उपचार करने के लिए स्पाइजेलिया औषधि का उपयोग करना चाहिए।
ii) आधासीसी (माइग्रेन) रोग के कारण से कब्ज होने पर रोग को ठीक करने के लिए आइरिस औषधि अधिक उपयोगी होती है।
iii) सिर दर्द होने के साथ ही कब्ज की समस्या होने पर रोग का उपचार करने के लिए जेल्सीमियम औषधि का उपयोग करना उचित होता है।
iv) कब्ज होने के साथ ही पेट में दर्द हो तो इस रोग को ठीक करने के लिए प्लम्बम औषधि की 6 शक्ति का उपयोग करना लाभकारी होता है।
v) लगातार मलत्याग करने पर भी पेट साफ न रहे और कब्ज की समस्या हो तो उपचार करने के लिए नेट्रम-म्यूर औषधि की 200 शक्ति का प्रयोग करना अधिक लाभदायक होता है।
vi) गर्भावस्था के समय में और गर्मी के दिनों में कब्ज की समस्या हो तथा बच्चों को कब्ज की समस्या हो तो ऐसी अवस्था में इस रोग को ठीक करने के लिए ब्रायोनिया औषधि की 6 से 30 शक्ति का सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है।
vii) पुरानी कब्ज की समस्या होने के साथ ही बार-बार मलत्याग करने की इच्छा होना लेकिन मलत्याग करने पर मल पूरा न निकलना और बवासीर हो जाना। इस अवस्था में रोग को ठीक करने के लिए सल्फर औषधि की 30 या 200 शक्ति का उपयोग करना चाहिए।
viii) बार-बार दस्त लाने वाली दवाईयों का सेवन करने से कब्ज की समस्या हो और रोगी अधिक कमजोर तथा दुबला हो तो उसके इस रोग को ठीक करने के लिए हाइड्रैस्टिस औषधि की 3 शक्ति का प्रयोग करें।

Reference By – jkhealthworld.com

संबधित लिंक

1. लिवर और उसकी कार्यप्रणाली
2. लिवर से जुडी बीमारियाँ
3. लिवर | जिगर खराब होने के लक्षण.
4. लिवर ख़राब होने के कारण
5. लिवर | जिगर की देखभाल
5. लिवर | जिगर रोगो का घरेलू उपचार

Yogaasan & Exercise for Constipation in Hindi | कब्ज के लिए योग आसन और व्यायाम?

योगाभ्यास में कुछ आसनों और मुद्रा के माध्यम से हम कब्ज रोग से मुक्ति पा सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं- अग्निसार क्रिया, मयूरासन, वज्रासन, सुप्तपवनमुक्तासन, पश्चिमोत्तान आसन, धनुरासन, मत्स्यासन, कूर्मासन, चक्रासन, योग मुद्रा।
किसी दो का चयन कर इसे नियमित करें।

अग्निसार क्रिया व मयूरासन की विधि-

अग्निसार क्रिया विधि: पद्मासन या सुखासन की स्थिति में या फिर खड़े होकर भी अग्निसार क्रिया की जा सकती है। अपने दोनों हाथ घुटनों पर रखें और सांस छोड़कर पेट अन्दर खींचें और उसे तेजी से 8-10 बार छोड़ें व पिचकाएं। फिर यथासंभव अपनी क्षमता अनुसार जब तक आप सांस रोककर यह क्रिया कर सकते हैं करें, उसके बाद सांस लें। और फिर सारा श्वास बाहर निकालकर पेट को अन्दर-बाहर खींचें। शुरू-शुरू में अभ्यास 4 से 5 बार करना चाहिए।
लाभ: इस क्रिया के द्वारा मंदाग्नि दूर होकर जठराग्नि प्रदीप्त होती है। कब्ज के लिए यह रामबाण है। पेट का कड़ापन, वायु, गोला और तिल्ली में लाभदायक है। मासिक संबंधी विकार दूर होते हैं और मोटापे के लिए लाभदायक है।
विशेष: इसको करने की जल्दबाजी न करें। यह क्रिया हमेशा खाली पेट करनी चाहिए। हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए यह वजिर्त है।

मयूरासन विधि: इसमें शरीर की आकृति मोर जैसी हो जाती है। भूमि पर आसन बिछाकर सर्वप्रथम वज्रासन लगाइए। जांघों और नितम्बों को उठाते हुए आगे की ओर झुकिये। दोनों हाथों एवं घुटनों के बल मयूर की आकृति में आएं। हथेलियां व पंजों और दोनों कोहनियों को नाभि से लगाते हुए दोनों टांगों को भूमि से ऊपर उठाइये। टांगों को पीछे की ओर तानिये, शरीर का भार बाहों और कोहनियों पर डालते हुए धरती के समान्तर शरीर को उठाइये। शुरू में यह आसन एक बार ही करें। धीरे-धीरे क्षमता के अनुसार बढ़ाएं।
लाभ: पेट के रोग, कृमि और कब्ज के लिए यह रामबाण है और हृदय और छाती, अमाशय एवं आंतों के लिए लाभप्रद है।
विशेष: वृद्ध एवं कमजोर स्त्रियों के लिए यह वजिर्त है। यह एक कठिन आसन है। इसे करने के लिए अभ्यास की जरूरत है।

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