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Muhammad Bin Tughlaq | मुहम्मद बिन तुग़लक़ का इतिहास

Muhammad Bin Tughlaq in HindiMuhammad Bin Tughlaq

Muhammad Bin Tughlaq – मुहम्मद बिन तुग़लक़

पूरा नाम (Name) मुहम्मद बिन तुग़लक़
जन्म (Birthday) इ.स. 1300. ( अनुमानित )
जन्मस्थान (Birthplace) मुल्तान, पाकिस्तान
माता (Mother Name) फ़िरोज़ शाह तुग़लक़
पिता (Father Name) गयासुद्दीन तुग़लक़
मृत्यु (Death) 20 मार्च 1351
मुहम्मद बिन तुग़लक़ ये मध्यकालीन भारत के इतिहास के सनकी समझने वाला लेकिन महत्वाकांक्षी राज्यकर्ता। राजधानी दिल्ली से देवगिरी को हिलाने का उसकी असफल कोशिश की वजह से मुहम्मद खास तौर पर ध्यान में रहता है। तत्कालीन आक्रमणों से ज्यादा उसकी नजर दूर तक थी। मुहम्मद बिन तुग़लक़ का राजघराना इ.स. 1321 से 1388 इस समय में दिल्ली के तख़्त पे था। पहले चार साल मुहम्मद बिन तुग़लक़ के पिता गियासुद्दीन तुग़लक़ सत्ता पे थे। पिताजी के खिलाफ आवाज उठाने के बाद और उनकी अचनक मौत के बाद 1325 के मार्च महीने में मुहम्मद बिन तुग़लक़ ये दिल्ली के गद्दीपर बैठे। यही से मुहम्मद की राज शुरू हुआ। गददीपर आते ही मुहम्मद बिन तुग़लक़ के आगे राज्य में हुये वृद्धि तोडने की चुनौती थी। वो उसने सफलता पूर्वक पार की। उसने सिर्फ वृद्धि ही नहीं तोड़े तो उसके वजह से कर्नाटक के होयसल का राज्य पर जित हासिल करके दक्षिण में अपनी सत्ता प्रस्थापित की। इस समय में मतलब 1327 में तर्मशिरिन के नेतृत्त्व में मोघल ने दिल्लीपर चाल चली। लेकीन तुग़लक़ ने दिमाग से काम लेकर उन्हें बहोत पैसा देकर वापीस भेज दिया। राज्य की तिजोरी और सैनिको का खर्चा निकालने के लिये उसने बाद में गंगा – यमुना के ‘दुआब’ इस उपजाऊ क्षेत्रों के किसानो से ज्यादा कर वसूला। अकाल की वजह से वसूली नहीं हो पाती तब जनता को फार्म टैक्स के लिये तकलिफ दी। उसमे से ‘दिवान-ए-मुस्तखरिज’ ये सक्त कर वसूली का नया खाता शुरू हुवा। उसके खिलाफ प्रदर्शन हुये फिर भी वो उसमे सफल रहा। मुहम्मद बिन तुग़लक़ का और एक महत्त्वपूर्ण प्रयोग मतलब आर्थिक प्रयोग और वो मतलब तांबा मुद्रा में लाने का उस समय में चांदी के सिक्के प्रचलित थी। उस वजह से चांदी की कमी महसूस होने लगी। इसी समय में चीन में कुबलाई खान का कागजी मुद्रा का प्रयोग सफल होने का मुहम्मद के सुनने में आया। तब उसने सोने चांदी के अलावा तांबे का सिक्का उपयोग में लाने का आदेश दिया। लेकीन परदेशी व्यापारीयों ने तांबे का सिक्का लेने से इन्कार किया। मुद्रा का अवमूल्यन हुवा और सरकारी तिजोरी में की संपत्ती खतम हुई। इस वजह से आखीर मुहम्मद को अपना आदेश पीछे लेना पडा। लेकीन इस प्रक्रीया में उसने ‘दोकानी’ और ‘दिनार’ ये नान प्रचार में लाया। Muhammad Bin Tughlaq ये इसलिये सबसे ज्यादा पहचाने जाते है की उसने उसकी देश की राजधानी दिल्ली से महाराष्ट्र में देवगिरी यहाँ हिलाने की कोशिश की थी। सच तो अपनी राजधानी दिल्ल्ली से देवगिरी ले जाने के पीछे उसकी सनकी वृत्ती नहीं थी। उसके पीछे निश्चित ही कुछ वजह थी। देवगिरी ये साम्राज्य के दृष्टी से उसे दिल्ली से ज्यादा बिच में और महफूज लगता था। और मंगोल का धोका भी दक्षिण की तरफ नहीं था। इस वजह से उसने जल्द ही राजधानी देवगिरी को हिलाने का आदेश दिया। सिर्फ कचेरी ही नहीं तो सभी लोगों को उसने देवगिरी को जाने का हुकुम दिया। उस वजह से लोगों के बहोत तकलिफ झेलनी पड़ी। दिल्ली से देवगिरी इस सफर में बहोत से लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी। देवगिरी में आने के बाद मुहम्मद को वहा के अराजकता देखकर उसने अपना मन बदल दिया। ऐसे हिलने के वजह से बंगाल, पंजाब, सरहद प्रदेश नियत्रंण से बाहर जाने लगे ये उसके ध्यान में आया। इस वजह से राजधानी वापीस दिल्ली को हिलाई गयी। फिर से लोगों को तकलिफ हुयी। सरकारी तिजोरी खाली हुयी। और व्यापार बैठने के कारण दिल्ली का भी बड़ा नुकसान हुवा। 1336 में विजयनगर का राज्य स्वतंत्र हुवा। और 1347 में बहमनी सत्ता आयी। 1351 में बंगाल स्वतंत्र हुवा। कुछ एक पक्की भूमिका और विचार इनके आधार पर नयी योजना लाके राज्य बिठाने की मुहम्मद की कोशिश नाकामयाब रही। और दुर्भाग्य से उसके वजह से जनता को बहोत तकलीफ सहनी पड़ी। अपने लहर पे सबको नचाने वाला राज्य कर्ता ऐसी उसकी छवि निर्माण हुयी। मुहम्मद धर्मशिल होने के बावजूद वो समय आने पर क्रूरता से बर्ताव करता था। उसने किये हुये अनेक योजना में से एक – दो को ध्यान से निकाल दे तो उसे पूरी सफलता कभी नहीं मिली। उसकी योजना में रचनात्मकता थी और वो लागु करने की उसकी इच्छा शक्ती भी बड़ी थी। उसके पीछे जनता का कल्याण यही हेतु था। लेकीन बहोत उपलब्धियां होने के बावजूद भी व्यवहार ज्ञान में वो कम गिरा। सभी इतिहासकारों में तुग़लक़ ये सबसे ज्यादा विवाद का विषय रहा। मतलब वो सारी कमजोरी मान कर मुहम्मद तुग़लक़ ये समय से सबसे आगे दौड़ने वाला था, ऐसा मानना ही पड़ेगा। योजना और अमल करना इस मुकाबला में वो पीछे रहा। ये मुकाबला इतना मुश्किल था और उसी वजह से मुहम्मद आखीर में असफल हुआ। 20 मार्च 1351 को गुजरात के टठठा यहाँ बिमारी से मुहम्मद बिन तुग़लक़ / Muhammad Bin Tughlaq की मौत हुयी। और भी है यहाँ:
  • History in Hindi
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