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चोट्टानिक्करा देवी मंदिर | Chottanikkara Temple

Chottanikkara Temple – चोट्टानिक्करा देवी मंदिर देवी शक्तिदेवी उर्फ़ राजराजेश्वरी का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जिसे श्री भगवती के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है की यहाँ देवी महालक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ रह रही थी। यह मंदिर भारत के दक्षिणी राज्य केरला के कोच्ची में चोट्टानिक्करा में स्थित है और साथ ही आर्किटेक्चर के मामले में यह राज्य के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। माना जाता है की चोट्टानिक्करा मंदिर 1500 साल पुराना है।

Chottanikkara Temple

चोट्टानिक्करा देवी मंदिर – Chottanikkara Temple

यहाँ पर भगवान की लकड़ी की मूर्ति बनी हुई है और मंदिर के आस-पास एक सबरीमाला मंदिर भी है। श्री महामाया भगवती (आदिपारशक्ति) शक्तियों की देवी और साथ ही केरला की सबसे प्रसिद्ध देवियों में से एक और हिन्दुओ की सर्वोच्च माता देवियों में से एक है।

किंवदंति:

किंवदंतियों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण घने जंगलो में कन्नाप्पन नामक वन निवासी ने किया था। कन्नाप्पन अपनी बेटी को चाहने वाले पिता थे। हर दिन वे देवी भगवती को एक जानवर की बलि चढाते थे और एक दिन किसी अवसर पर उन्हें वध करने के लिए कोई जानवर नही मिला था। इसी वजह से उन्होंने अपनी बेटी से उसके पालतू बछड़े की बलि देने के बारे में पूछा लेकिन उनकी बेटी ने मूक जानवरों की बलि चढाने की बजाए खुद बलि चढ़ जाने को ज्यादा महत्त्व दिया।

इसके बाद बछड़े ने अपना असल रूप धारण कर कन्नाप्पन से कहा की वह जानवर का रूप धारण की हुई देवी है। इसके बाद कन्नाप्पन ने अपना मन बदलकर देवी की पूजा करना शुरू कर दिया और उसी जगह पर वह देवी की पूजा करने लगे जहाँ वे पहले बलि दिया करते थे। लेकिन कुछ समय बाद यह मंदिर अप्रचलित हो गया और फिर बाद में कई सालो बाद बाग़ काटने वाले ने इस मंदिर की खोज की।

चोट्टानिक्करा – Chottanikkara देवी की पूजा मंदिर में विविध रूपों में की जाती है, जैसे की सुबह उन्हें महासरस्वती (ज्ञान की देवी), दोपहर में उन्हें महा लक्ष्मी (समृद्धि की देवी) और शाम में श्री दुर्गा (ताकत की देवी) में रूप में उन्हें पूजा जाता है। साथ ही मंदिर में सर्वोच्च देवता भगवान शिव, गणेश और भगवान धर्मसस्थान (अय्यप्पा) की भी पूजा की जाती है।

मानसिक बीमारियों से जूझने वाले लोग अक्सर इस मंदिर के दर्शन के लिए आते है। माना जाता है की चोट्टानिक्करादेवी उनके दुःखो का निवारण करती है। चोट्टानिक्करा के कीज्ह्क्कावु मंदिर में मनाई जाने वाली गुरुथी पूजा के दर्शन का मौका हमें कभी नही छोड़ना चाहिए।

कहा जाता है की देवी कीज्ह्क्कावु देवी माँ भद्राकाली का ही एक रूप है। देवी महाकाली को आव्हान देने के उद्देश्य से देर शाम यहाँ गुरुथीपूजा का आयोजन किया जाता है। कुछ साल पहले गुरुथीपूजा का आयोजन केवल शुक्रवार के दिन ही किया जाता था। लेकिन वर्तमान में हर दिन इस पूजा का आयोजन किया जाता है।

कोल्लूर (उडिपी जिला, कर्नाटक) के इस मंदिर की संरक्षक देवी मूकाम्बिका है और कहा जाता है की हर सुबह जब मंदिर खोला जाता है तब देवी वहाँ उपस्थित रहती है। लाल रंग से रंगी देवी भगवती की मूर्ति को स्वयंभू भी कहा जाता है। इसका आकार हमेशा बदलता रहता है लेकिन मंदिर के पुजारी मूर्ति को रोज अलंकृत गहनों और रंगीन साडियों से सजाते है। हिन्दू धर्म के बहुत से धर्मगुरु जैसे आदिशंकर ने भी यहाँ देवी की पूजा की है। कहा जाता है की ज्ञान की देवी माँ सरस्वती ने यहाँ अदिशंकर को वचन दिया था की हर सुबह वह अपने भक्तो की मनोकामनाओ को पूरा करेंगी। विल्वामंगलम स्वामियर नामक एक और संत ने यहाँ भद्रा काली के मूर्ति की खोज की थी।

मंदिर में मनाए जाने वाले प्रमुख उत्सव:

  • मंदिर का मुख्य उत्सव (मकोम थोज़ल) – फरवरी-मार्च
  • विशु – अप्रैल माह के बीच में
  • ओणम – अगस्त माह के अंत में
  • नवरात्री – अक्टूबर

मकोम थोज़ल 7 दिनों तक चलने वाला एक उत्सव है। इस विशाल उत्सव में देवी को विशेष वस्त्र पहनाये जाते है और साथ ही विशाल पूजा का भी आयोजन किया जाता है। इस समय मंदिर में सार्वजनिक विवाह का भी आयोजन किया जाता है।

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