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Sanvidhan kise kahate hain ( संविधान ) Constitution की पूरी जानकारी

Sanvidhan kise kahate hain ( संविधान ) :- संविधान किसी संस्था को प्रचालित करने के लिये बनाया हुआ दस्तावेज है। यह प्रायः लिखित रूप में होता है। यह वह विधि है जो किसी राष्ट्र के शासन का आधार है; उसके चरित्र, संगठन, को निर्धारित करती है तथा उसके प्रयोग विधि को बताती है, संविधान ( Sanvidhan ) कहलाती है। संविधान को अंग्रजा भाषा में Constitution भी कहा जाता हैं।

संविधान किसे कहते हैं?:- किसी भी देश या राज्य को चलाने के लिए एक नियम की जरूरत होती है उस नियम को ही संविधान ( Sanvidhan )  कहते हैं।

Sanvidhan sabha ke Adhyaksh kaun the ( संविधान सभा का अध्यक्ष कौन था? )

1946  को दिन डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भारतीय संविधान सभा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

Bharat ka sanvidhan kab lagu hua ( भारत का संविधान कब लागू हुआ? )

26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ था।

भारतीय संविधान का संक्षिप्त परिचय

भारतीय संविधान में वर्तमान समय में भी केवल 395 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियाँ हैं और ये 25 भागों में विभाजित है। परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियाँ थीं। संविधान में सरकार के संसदीय स्‍वरूप की व्‍यवस्‍था की गई है जिसकी संरचना कुछ अपवादों के अतिरिक्त संघीय है। केन्‍द्रीय कार्यपालिका का सांविधानिक प्रमुख राष्‍ट्रपति है। भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसार, केन्‍द्रीय संसद की परिषद् में राष्‍ट्रपति तथा दो सदन है जिन्‍हें राज्‍यों की परिषद राज्‍यसभा तथा लोगों का सदन लोकसभा के नाम से जाना जाता है।

भारतीय संविधान बनाने में कितना समय लगा?

संविधान सभा ने भारत के संविधान को 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में 26 नवम्बर 1949 को पूरा कर राष्ट्र को समर्पित किया। गणतंत्र भारत में 26 जनवरी 1950 से संविधान अमल में लाया गया।

संविधान ( Sanvidhan ) को किसने बनाया?

संविधान का जनक डॉ. भीमराव अंबेडकर  को कहा जाता हैं । संविधान का पूरा श्रेय डॉ. भीमराव अंबेडकर  को जाता हैं जिन्होने संविधान को बानाया था।

संविधान ( Sanvidhan ) क्या हैं?

  • संविधान एक लिखित दस्तावेज हैं जिसमें सरकार के लिए नियमों का एक सेट होता हैं।
  • यह शोषण को रोकने और लोगो के कुछ अधिकारों के गारंटी के लिए सरकार की शक्ति को सीमित करता हैं।
  • संविधान शब्द किसी भी समग्र कानून पर लागू किया जा सकता हैं। जो सरकार के कामकाज को परिभाषित करता हैं।
  • कर्तव्यों की स्थापना के मौलिक राजनीतिक सिध्दान्तों को परिभाषित करता हैं।

संविधान की विशेषता

  • भारत के संविधान की विशेषता यह हैं कि यह संघात्मक हैं और एकात्मक भी हैं।
  • भारत के संविधान में संघात्मक संविधान की सभी उपर्युक्त विशेषताएं सम्मिलित हैं।
  • आपातकाल में भारतीय संविधान में एकात्मक संविधानों के अनुरूप केन्द्र को अधिक शक्तिशाली बानाने के लिए प्रावधान निहित हैं।
  • भारतीय संविधान में कुछ अच्छी चीजे विश्व के दूसरे संविधानों से भी संकलित की गई हैं।

भारत का संवैधानिक इतिहास

31 दिसम्बर 1600 में अंग्रेजी ईस्ट इण्डिया कम्पनी भारत में व्यापार करने के लिए आई। बंगाल में अंग्रेजी राज्य की स्थापना को ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारियों ने किया था. ईस्ट इंडिया कंपनी का उद्देश्य भारत और अन्य पूर्वी देशों के व्यापार से लाभ उठाना था ।

1757 ई. की प्लासी की लड़ाई और 1764 ई. बक्सर के युद्ध को अंग्रेजों द्वारा जीत लिए जाने के बाद बंगाल पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने शासन का शिकंजा कसा. इसी शासन को अपने अनुकूल बनाए रखने के लिए अंग्रेजों ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1773 रेग्यूलेटिंग एक्ट अमल में लाए , जो भारतीय संविधान के विकास की सीढ़ियां बनीं. वे निम्न हैं ।

1773 का रेग्यूलेटिंग एक्ट :

ब्रिटिश क्राउन का कम्पनी के शासन पर संसदीय नियंत्रण स्थापित किया गया इसके द्वारा केंद्रीय प्रशासन की नींव रखी गई ।

इस एक्ट के द्वारा पहली बार कंपनी के प्रशासनिक और राजनैतिक और प्रशासनिक कार्यों को मान्यता मिली बंगाल के गर्वनर वारेन हेस्टिंग्स को गर्वनर जनरल पद दिया गया एवं उसकी सहायता के लिए एक चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद् का गठन किया गया । जिसके सारे निर्णय बहुमत से लिए जाते थे।

बम्बई एवं मद्रास के गवर्नर बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन रखे गए।

इस अधिनियम के अन्तर्गत कलकत्ता में 1774 में एक उच्चतम न्यायालय की स्थापना की गई । जिसमें मुख्य न्यायाधीश हाइट चैम्बर और लिमेस्टर को रखा गया और तीन अन्य न्यायाधीश थे इसके विरूद्ध अपील लंदन की प्रिंवी काउंसिल में की जा सकती थी।

ब्रिटिश सरकार बोर्ड ऑफ कन्ट्रोल और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के माध्यम से कंपनी पर नियंत्रण सशक्त हो गया शासन चलाने और नियंत्रण हेतु बोर्ड ऑफ़ कन्ट्रोल और बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर बनाए गए।

1784 का पिट्स इण्डिया एक्ट :

कंपनी के राजनैतिक और वाणिज्यिक कार्यो का पृथककरण कर दिया ।

राजनीतिक मामलों के प्रबंधन के लिए बोर्ड ऑफ़ कण्ट्रोल का गठन कर दिया ।

द्वैध शासन व्यवस्था का शुरुआत किया गया ।

ब्रिटिश सरकार का कंपनी के कार्यो पर पूर्ण नियंत्रण,कंपनी क्षेत्र को ब्रिटिश आधिपत्य का क्षेत्र कहा गया ।

1793 का चार्टर एक्ट :

नियंत्रण बोर्ड के सदस्यों तथा कर्मचारियों के वेतन आदि को भारतीय राजस्व में से देने की व्यवस्था की गई ।

व्यापारिक अधिकार को भारत में २० वर्ष और बढ़ा दिया गया ।

कौंसिलों के निर्णय को रद्द करने का अधिकार गवर्नल जनरल के साथ साथ अन्य गवर्नरों को भी दिया गया ।

1813 का चार्टर एक्ट :

कंपनी के भारत के साथ व्यापर करने के एकाधिकार को छीन लिया गया ।

चीन और पूर्वी देशों के साथ चाय के व्यापार के संबंध में 20 सालों के लिए एकाधिकार प्राप्त रहा ।

कुछ सीमाओं के अधीन सभी ब्रिटिश नागरिकों के लिए भारत के साथ व्यापार खोल दिया गया ।

भारत में इसाई धर्म के प्रचार की अनुमति दी गई।

1833 का चार्टर एक्ट :

बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया ।

विलियम बैंटक पहला भारत का गवर्नर जनरल बना ।

ईस्ट इंडिया कंपनी की व्यापारिक गतिविधियो को समाप्त कर दिए गए ।

गवर्नल जनरल के कार्यकारिणी चौथा सदस्य टी. बी. मैकाले को जोड़ा लेकिन उसे कार्यकारिणी में मत देने का अधिकार नहीं था मैकाले ने शिक्षा के विकास के लिए ड्रेन थ्योरी दी। जिसमें समाज के अन्य वर्ग को भी शिक्षा देना तय किया गया।

मैकाले कमीशन की सिफारिशों के आधार पर भारत में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी बनाया गया तथा सरकारी नौकरीयों में भेदभाव निसेधित किया गया।

सती प्रथा, दास प्रथा और कन्यावध को ख़त्म करने का प्रावधान इसी चार्टर एक्ट में किया गया ।

1853 का चार्टर एक्ट :

गवर्नर जनरल की परिषद के विधायी एव प्रशासनिक कार्यो को अलग कर दिया ।

पी. डब्यु. डी. तथा सार्वजनिक निर्माण विभाग बनाया गया ।

परिषद् में छह (6) नए पार्षद और जोड़े गए ,इन्हें विधान पार्षद कहा गया ।

सिविल सेवाओं की भर्ती एवं चयन हेतु प्रतियोगिताको भारतीयो के लिये खोल दिया गया और इसके लिए 1854 में मैकाले समिति की नियुक्ति की गई ।

भारतीय केन्द्रीय विधान परिषद मे स्थानीय प्रतिनिधित्व प्रारंभ किया गया ।

1858 का चार्टर एक्ट :

1857 की क्रांति के बाद ईस्ट इण्डिया कम्पनी का शासन समाप्त कर भारत का शासन सीधे ब्रिटीश ताज के अधीन किया गया।
गवर्नर जनरल को वायसराय कर दिया,कैनिग पहला वायसराय बना ।

नियन्त्रण बोर्ड व निदेशक कोर्ट (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स एवं बोर्ड ऑफ कन्ट्रोल )समाप्त कर दिया द्वैध प्रणाली समाप्त कर दी ।

भारतीय सचिव की परिषद का गढन किया जिसे भारत व इंग्लैड मे मुकदमा करने का अधिकार था ।जिसकी कार्यकारिणी में 15 सदस्य रखे गए। 7 मनोनित और 8 निर्वाचित।

भारत सचिव चाल्र्स वुड को बनाया गया ।

इन्होंने शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए वुड डिस्पेच दिाया जिसमें प्राथमिक प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में देना निर्धारित था। इसलिए वुड डिस्पेच को “शिक्षा का मैग्नाकार्टा” कहा जाता है ।

बम्बई, मद्रास और कलकत्ता में विश्व विद्यालयों की स्थापना की गई ।

1861 का भारत शासन एक्ट :

गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी परिषद का विस्तार किया गया, तथा गवर्नर जनरल को पहली बार अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई ।

विभागीय प्रणाली का प्रारंभ हुआ,

कानून बनाने मे भारतीय प्रतिनिधियो को सामिल किया गया,

कैनिग द्वारा शुरु की गयी पोर्ट फोलियो प्रणाली को मान्यता दी गयी,

बम्बई, कलकत्ता, और मद्रास में हाईकोर्ट की स्थापना की गई ।
वायसराय को आपातकाल मे बिना कोसिल की अनुमती के अध्यादेश जारी करने के लिये अधिक्रत किया जो ६ माह तक रह सकता था

1892 का भारत – परिषद एक्ट :

इसके माध्यम से केन्द्रीय तथा प्रांतीय विधान परिषद मे अतिरिक्त सदस्यो की संख्या बढ़ायी गयी जो गैर सरकारी थे,

1885 में कांग्रेस की स्थापना के बाद सुधार की मांगे तीव्र होती चली गई। और अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्वति को प्रारम्भ किया गया। अर्थात् बड़े उद्योगपति, व्यापारी और जमीदार गैर सरकारी सीटों के लिए चुनाव लड़ सकते है।

इसके द्वारा राजस्व एवं व्यय अथवा बजट पर बहस करने तथा कार्यकारिणी से प्रश्न पूछने की शक्ति दी गई. लेकिन मत देने का अधिकार नहीं था।

1909 का मार्लेमिन्टो सुधार एक्ट :

जॉन मार्ले भारत सचिव और लार्ड मिन्टो वायसराय थे।

प्रांतीय विधान परिषदों की संख्या में वृद्धि की गई,

सतेन्द्र प्रसाद वायसराय की कार्यपालिका के प्रथम भारतीय सदस्य बने,

निर्वाचन के आधार पर मुस्लिमो के लिये सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व का प्रावधान किया सांप्रदायिकता को वैधानिकता प्रदान की इसलिये मिंटो को सांप्रदायिक निर्वाचन के

1919 का मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार :

इसे मान्टेस्क्यू चेम्सफोर्ड सुधार कानून भी कहा गया। इसकी घोषणा 20 अगस्त 1917 से प्रारम्भ की गई। जिसके प्रावधान निम्नलिखित थे।

केंद्र में द्विसदनात्मक विधायिका की स्थापना की गई- प्रथम राज्य परिषद तथा दूसरी केंद्रीय विधान सभा, भारत में द्विसदनीय विधायिका बनाई गई जिसका एक सदन केन्द्रीय विघानसभा जिसमें 104 निर्वाचित 41 मनोनित सदस्य थे। तथा दुसरा सदन राज्य परिषद रखा गया।जिसकी सदस्या संख्या 60 रखी गई। इसमें भी मनोनित 27 एवं निर्वाचित 33 सदस्य थे।

प्रांतो में द्वैध शासन प्रणाली का प्रवर्तन किया गया. इस योजना के अनुसार प्रांतीय विषयों को दो उपवर्गों में विभाजित किया गया
1. आरक्षित
2. हस्तांनान्तरित

(1) आरक्षित विषय थे : कारखाना, बिजली, गैस, व्यालर, श्रमिक कल्याण, औघोगिक विवाद, वित्त, भूमिकर, अकाल सहायता, न्याय, पुलिस, पेंशन, आपराधिक जातियां, छापाखाना, समाचार पत्र, सिंचाई, जलमार्ग, खान, मोटरगाड़ियां, छोटे बंदरगाह और सार्वजनिक सेवाएं आदि ।

(2) हस्तांतरित विषय : शिक्षा, पुस्तकालय, संग्रहालय, स्थानीय स्वायत्त शासन, सार्वजनिक निर्माण विभाग, चिकित्सा सहायता.,आबकारी, उघोग, तौल तथा माप, सार्वजनिक मनोरंजन पर नियंत्रण, धार्मिक तथा अग्रहार
दान आदि ।

ब्रिटेन में एक हाईकमिश्नर का पर सृजित किया गया। राष्ट्रमंडल देशों के साथ मिलकर कमिश्नर की नियुक्ति की जाती है। भारत इसका सदस्य गई 1949 में बना।

फेडरल लोक सेवा आयोग का गठन किया गया।

महिलाओं को सिमित क्षेत्रों में मतदान डालनें का अधिकार दिया गया।

सांप्रदायिक निर्वाचन का विस्तार किया गया।

यह अधिनियम 1 अप्रैल 1921 से प्रारम्भ हुआ और 1 अप्रैल 1937 तक रहा। बालगंगाधर तिलक ने इसे एक बिना सूरज का अंधेरा कहा।

इसकी समीक्षा के लिए 10 साल बाद एक रोयल कमीशन के गठन का प्रावधान किया गया।

1935 का भारत शासन अधिनियम

1928 की नेहरू रिपोर्ट,
1929 लाहौर अधिवेशन -पुर्ण स्वराज्य की मांग,
1930,31,32 -तीन गोलमेज सम्मेलन इन सभी को ध्यान में रखते हुए 1935 का भारत शासन अधिनियम लाया गया।
प्रान्तों में द्वैद्य शासन हटाकर केन्द्र में लगाया गया।

इसमें प्रस्तावना का अभाव था।

केंद्र एंव राज्यों के मध्य शक्तियों का विभाजन तीन सुचियों में किया गया।

(A) केन्द्र सूची (97)
(B) राज्य सूची (66)
(C) समवर्ती सूची (47)

फेडरल सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की गई। जो अपील का सर्वोच्च न्यायालय नहीं था। इसके विरूद्ध अपील लंदन की प्रिवी कांउसिल में सम्भव थी।

रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया की स्थापना का प्रावधान किया गया।

उत्तरदायी शासन का विकास किया गया।

अखिल भारतीय संद्य की स्थापना का प्रावधान था।जिसमें देशी रियासतों का मिलना ऐच्छिक रखा गया।

केन्द्रीय एंव राज्य विद्यायिकाओं का विस्तार किया गया।

महत्वपूर्ण अनुच्छेद

❇️ अनुच्छेद 1 :- भारत अर्थात India राज्यों का संघ होगा।
❇️ अनुच्छेद 2 :- नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना
❇️ अनुच्छेद 3 :- राज्य का निर्माण तथा सीमाओं या नामों मे परिवर्तन
❇️ अनुच्छेद 4 :- पहली अनुसूची व चौथी अनुसूची के संशोधन तथा दो और तीन के अधीन बनाई गई विधियां
❇️ अनुच्छेद 5 :- संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता
❇️ अनुच्छेद 6 :- भारत आने वाले व्यक्तियों को नागरिकता
❇️ अनुच्छेद 7 :-पाकिस्तान जाने वालों को नागरिकता
❇️ अनुच्छेद 8 :- भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों का नागरिकता
❇️ अनुच्छेद 9 :- विदेशी राज्य की नागरिकता लेने पर नागरिकता का ना होना
❇️ अनुच्छेद 10 :- नागरिकता के अधिकारों का बना रहना
❇️ अनुच्छेद 11 :- संसद द्वारा नागरिकता के लिए कानून का विनियमन
❇️ अनुच्छेद 12 :- राज्य की परिभाषा
❇️ अनुच्छेद 13 :- मूल अधिकारों को असंगत या अल्पीकरण करने वाली विधियां
❇️ अनुच्छेद 14 :- विधि के समक्ष समानता
❇️ अनुच्छेद 15 :- धर्म, मूल वंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव पर रोक।
❇️ अनुच्छेद 16 :- लोक नियोजन में अवसर की समानता
❇️ अनुच्छेद 17 :- अस्पृश्यता का अंत
❇️ अनुच्छेद 18 :- उपाधियों का अंत
❇️ अनुच्छेद 19 :- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
❇️ अनुच्छेद 19 A :- सूचना का अधिकार
❇️ अनुच्छेद 20 :- अपराधों के दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण
❇️ अनुच्छेद 21 :-प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण
❇️ अनुच्छेद 21 A :- 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार
NOTE – निजता का अधिकार भी अनुच्छेद 21 के अंतर्गत ही आता है।
❇️ अनुच्छेद 22 :– कुछ दशाओं में गिरफ्तारी से सरंक्षण
❇️ अनुच्छेद 23 :- मानव के दुर्व्यापार, बेगारी एवं बलात श्रम पर प्रतिबंध
❇️ अनुच्छेद 24 :- 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खान या किसी खतरनाक उद्योग में कार्य नही कराया जा सकता है।
❇️ अनुच्छेद 25 :- धर्म का आचरण और प्रचार की स्वतंत्रता
❇️ अनुच्छेद 26 :-धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता
❇️ अनुच्छेद 29 :- अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण
❇️ अनुच्छेद 30 :- शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार
❇️ अनुच्छेद 32 :-संवैधानिक उपचारों का अधिकार (संविधान की आत्मा)
❇️ अनुच्छेद 39 A :- सभी के लिए समान न्याय एवं निःशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था राज्य सरकार करेगी।
❇️ अनुच्छेद 40 :- ग्राम पंचायतों का संगठन
❇️ अनुच्छेद 44 :- समान नागरिक संहिता
❇️ अनुच्छेद 48 :- कृषि और पशुपालन संगठन
❇️ अनुच्छेद 48 A :- पर्यावरण वन तथा वन्य जीवों की रक्षा
❇️ अनुच्छेद 49 :- राष्ट्रीय स्मारक स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण
❇️ अनुच्छेद 50 :- कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण
❇️ अनुच्छेद 51 :- अंतर्राष्ट्रीय शांति और सु



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