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Essay on Mere Jeevan ka Lakshya Engineer in Hindi – मेरे जीवन का लक्ष्य इंजीनियर बनना

दोस्तो आज हमने Essay on Mere Jeevan ka Lakshya Engineer in Hindi लिखा है मेरे जीवन का लक्ष्य इंजीनियर बनना पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 के विद्यार्थियों के लिए है. जीवन में लक्ष्य निर्धारित करना बहुत जरूरी होता है इस लेख में हमने बताया है कि लक्ष्य निर्धारित करके एक व्यक्ति कैसे इंजीनियर बन सकता है और Engineer बन कर वह समाज कि किस प्रकार सेवा कर सकता है.

इंजीनियर बन कर किसी व्यक्ति को सिर्फ पैसा ही नहीं कमाना होता है उसे देश की सेवा कर के आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करना होता है. यह हमारे देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है. इनके कारण ही हम प्रतिदिन नई नई तकनीके देख पाते हैं और अपने जीवन को सरल बना पाते है.

Essay on Mere Jeevan ka Lakshya Engineer in Hindi

जीवन में लक्ष्य निर्धारित करना बहुत जरूरी होता है क्योंकि यह वैसा ही हो जाता है जब हम किसी रेस में दौड़ते रहते हैं लेकिन उसमें अंत रेखा होती ही नहीं है जिससे हम जीवन भर तोड़ते ही चले जाते हैं लेकिन कोई लक्ष्य हासिल नहीं होता है.

उसी प्रकार जीवन में भी अगर हम कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं करते हैं तो पूरे जीवन भर हम बिना लक्ष्य के इधर उधर भटकते रहते है. इसीलिए लोग सफल नहीं हो पाते हैं और असफलता से निराश होकर कुछ गलत कदम उठा लेते है.

Essay on Mere Jeevan ka Lakshya Engineer in Hindi

बिना लक्ष्य के लोग कुछ भी काम करते रहते हैं जैसे कि आपने अपने ही दोस्तों में देखा होगा कि अगर कोई काम आप लक्ष्य लेकर कर रहे हैं और आपका दोस्त आपको देख लेता है तो बिना कुछ सोचे समझे वही लक्ष्य वह तैर कर लेता है लेकिन थोड़ी सी कठिनाई आने पर है उसे छोड़ देता है फिर दूसरा कोई और काम अपना लेता है जिससे वह जिंदगी भर ऐसा ही करता रहता है और किसी भी काम में सफल नहीं हो पाता है.

मेरे जीवन का लक्ष्य है मैंने कक्षा दसवीं से ही निर्धारित कर लिया था कि मुझे बड़ा होकर एक अच्छा होनहार और ईमानदार इंजीनियर बनना है. ताकि मैं देश की सेवा कर सकूं और देश का विकास करने में सहायता कर सकूं. यह मेरे जीवन का अहम पर था जब मैंने अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित किया अगर मैं उस समय लक्ष्य निर्धारित नहीं करता तो शायद आज इंजीनियर बनने की तैयारी नहीं कर रहा होता.

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चूँकि मैंने कक्षा दसवीं निर्धारित कर लिया था कि मुझे इंजीनियर बनना है इसलिए आज मैं कॉलेज में सही विषय का चुनाव कर पाया और जी जान लगा कर उसकी तैयारी भी कर रहा हूं.

अब बात मैंने इंजीनियरिंग कि अपना लक्ष्य क्यों चुना ?

मैं बचपन से ही अपने आसपास इंजीनियर लोगों को ही देखता आया हूं और मेरे पिताजी भी एक इंजीनियर है जिसके कारण हमारे घर में लगभग रोज ही इंजीनियर लोग मेरे पिताजी से मिलने आया करते थे मैं उनकी बातों से बहुत प्रभावित होता था और फिर मैंने पिताजी से पूछा कि एक इंजीनियर क्या-क्या कार्य कर सकता है.

तब पिता जी ने बताया कि एक इंजीनियर का हमारे देश में बहुत महत्व होता है एक इंजीनियर के कारण ही देश का सही मायने में विकास होता है क्योंकि एक इंजीनियर की उन सभी जगहों पर जरूरत पड़ रही होती है जहां पर कितना किसी प्रकार का निर्माण हो रहा होता है.

चाहे फिर वो इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक, कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल, इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी, सिविल, केमिकल, माइनिंग, बायोकेमिकल इंजीनियरिंग आदि क्षेत्रों में एक इंजीनियर की ही आवश्यकता होती है इसलिए यह देश के विकास के लिए एक अहम व्यक्ति होता है.

यह सुनकर मैं बहुत प्रभावित हुआ मुझे लगा कि अगर मैं भी इंजीनियर बन जाता हूं तो मैं भी देश के निर्माण मैं सहायक होगा और इससे हमारा देश दिन दुगुनी और रात चौगुनी तरक्की करेगा इसलिए मैंने अपने जीवन का लक्ष्य इंजीनियर बनना रखा.

एक दिन मैंने पिताजी से कह दिया कि मैं भी आपकी तरह इंजीनियर ही बनूंगा तब उन्होंने पूछा कि तुम किस तरह के इंजीनियर बनना चाहते हो तुम्हे क्या पसंद है?

फिर मैंने उनको बताया कि मैं कंप्यूटर इंजीनियरिंग करना चाहता हूं मुझे कंप्यूटर चलाने में बहुत ही रुचि है. यह बात होने की कुछ दिनों बाद मेरे पिताजी ने मुझे एक लैपटॉप लाकर दिया जिसकी सहायता से मुझे कंप्यूटर की और अधिक जानकारी मिलने लगी यह मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं था. क्योंकि मैं जो बनना चाहता था मैं उसकी राह पकड़ चुका था यह मेरे जीवन का सबसे अच्छा दिन था.

फिर मुझे विश्वास हो गया कि मैं अपने लक्ष्य को पा सकता हूं इसलिए मैंने कक्षा बारहवीं में कंप्यूटर साइंस विषय का चुनाव किया और मैंने खूब मेहनत की और अंत में जब परीक्षाओं का रिजल्ट आया तब मैं 12वीं क्लास का टॉपर था. यह देख कर मैं बहुत ही प्रसन्न हुआ मेरी मेहनत रंग लाई थी क्योंकि मेरा लक्ष्य निर्धारित था.

विद्यालय में मेरे अच्छे नंबर आने के कारण मुझे एक अच्छे कॉलेज में प्रवेश मिल गया और वहां पर मैंने कंप्यूटर साइंस विषय का ही चुनाव किया. कॉलेज में आने के बाद मुझे एक से एक अच्छे प्रोफ़ेसर मिले इस दिन की सहायता से मुझे कंप्यूटर साइंस फील्ड में बहुत कुछ सीखने को मिला, कभी-कभी तो ऐसी बातें सामने आती कि मैं उनको देखकर चौक जाता. यह मेरे लिए किसी सपने के साकार होने के जैसा ही था.

कॉलेज के दिनों में मैंने अपने लक्ष्य को पाने के लिए दिन रात मेहनत की हालांकि कभी कभी निराशा जरूर होती थी क्योंकि कुछ चीजें समझ में नहीं आ पाती थी लेकिन फिर मैं जब दूसरे दिन प्रोफ़ेसर से वह बातें डिस्कस करता था तब मुझे समझ में आ जाता था.

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और मुझे फिर एक नया हौसला मिलता था. मेरे कॉलेज के प्रोफ़ेसर भी मुझे कहते थे कि आप एक दिन अच्छे कंप्यूटर इंजीनियर बनोगे. बस इस छोटी सी सराहना के कारण मुझे इतना आत्मविश्वास मिलता है कि मेरी सारी निराशा दूर हो जाती थी.

कॉलेज में अव्वल नंबरों से पास होने के बाद मैंने एक बहुत बड़े इंजीनियर के साथ काम करना चालू किया और आज मैं एक सफल कंप्यूटर इंजीनियर हूं. मुझे खुशी है कि मैं मेरे लक्ष्य पर डटा रहा और मैंने आखिरकार मेरा कंप्यूटर इंजीनियरिंग का लक्ष्य प्राप्त ही कर लिया.

मैं आप सभी से भी कहना चाहूंगा कि आपको भी अपना लक्ष्य पहले से ही निर्धारित कर लेना चाहिए ताकि हम जीवन में इधर-उधर नहीं भटकते रहे.


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