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घटाए नहीं घट रही दिल्ली में धूल, लगातार बढ़ रहा खतरा

नई दिल्ली । दिल्ली से प्रदूषण का खतरा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बारिश के बाद प्रदूषण के स्तर में अचानक आयी कमी से यह फिर से तेजी से बढ़ने लगी है। हालांकि इसकी एक बड़ी वजह धूल को बताया जा रहा है, जो हवा में तेजी से लगातार घुल रही है। इसके पीछे रात दिन चलने वाले निर्माण कार्यों को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। मौजूदा समय में निर्माण कार्यो के घंटों पर फिलहाल कोई रोक नहीं है।

इसी बीच दिल्ली के प्रदूषण का स्तर अचानक फिर से खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। सफर-इंडिया के गुरूवार शाम को जारी आंकड़े के मुताबिक पीएम-10 का स्तर 177 पर आ चुका है, जबकि रविवार तक इसके 232 के पार जाने की उम्मीद जताई गई है। इसी तहत पीएम-2.5 की स्तर गुरूवार को जहां 107 हो गया है, वहीं रविवार तक इसके 140 तक पहुंचने का अनुमान है। यानि यदि ऐसी ही स्थिति रही तो रविवार तक दिल्ली का हवा फिर से खतरनाक स्थिति में पहुंच जाएगी।

पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो दिल्ली के तेजी से बिगड़ रहे प्रदूषण के स्तर के पीछे धूल ही मुख्य वजह है। जिसकी ओर किसी का ध्यान नहीं है। इनमें इसलिए भी कमी नहीं हो रही है, क्योंकि पहले निर्माण कार्य सिर्फ दिन में ही होते थे, जबकि मौजूदा समय में रात दिन निर्माण कार्य चल रहे है। सड़कों पर बगैर पानी के छिड़काव के लगने वाली झाड़ू से भी हर दिन तेजी से धूल हवा में घुल रही है। इसके अलावा दिल्ली और एनसीआर में रात भर बालू और गिट्टी से भरे ट्रकों की होने वाली आमद भी तेजी से धूल उड़ा रहे है। इस पर कोई पाबंदी नहीं लग रही है।

यह स्थिति तब है जब पिछले दिनों बारिश के चलते प्रदूषण के स्तर में आई गिरावट पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने दिल्ली और एनसीआर के राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के साथ मिलकर खुशी जताते सभी की पीठ थपथपाई थी। साथ ही राज्य सरकारों के प्रयासों के सराहा भी था।

सड़कों पर फिर से होगा पानी छिड़काव

पर्यावरण मंत्रालय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण के तेजी से बढ़ रहे स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार सहित संबंधित एजेंसियों को सड़कों पर फिर से पानी छिड़काव करने को कहा है। विशेषज्ञों की मानें तो प्रदूषण में जिस तरह से धुल का मात्रा ज्यादा घुली हुई है, ऐसे में पानी या तेज हवा के जरिए ही इससे निपटा जा सकता है। इसके अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। विशेषज्ञों की मानें तो धूल के कण इतने हल्के होते है, कि इनमें गुरुत्वाकर्षण काम नहीं करता है। ऐसे में इन्हें खत्म करने के लिए पानी या हवा ही विकल्प है।



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