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क्षेत्रीय कहानियाँ: क्या आपको पता है कि रायगढ़ में क्या हो रहा है?

मैंने छत्तीसगढ़ के छोटे से जिले, रायगढ़ में पिछले कुछ हफ्ते बिताए। रायगढ़ ऐतिहासिक रूप से विभिन्न आदिवासी समुदायों से आबाद रहा है क्योंकि यह पाँचवें अनुसूचित क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

At Bhengari Village | Amnesty International India

रायगढ़ के आदिवासी, कृषि के कार्य में अपना समय व्यतीत करते हैं। प्रत्येक घर में पैतृक भूमि होती है, और इस भूमि पर उनकी

आजीविका और जीवनशैली टिकी है। लेकिन रायगढ़ के निवासियों के अनुसार आज, जिले की हरी भरी भूमि आसपास की कंपनियों

द्वारा किए गए प्रदूषण की वजह से तबाह हो रही है।

Bindabai Patel | Amnesty International India

टीआरएन ऊर्जा, जो एसीबी इंडिया पावर लिमिटेड की एक सहायक कंपनी है, आदिवासी भूमि की अवैध खरीद फरोख्त में शामिल

है। घरघोरदा, रायगढ़ के भेंगरी गाँव से अरुणसिंह राठिया, बुधवारा पटेल और बिंदाबाई पटेल द्वारा लगाए गए आरोप के अनुसार,

यह उद्योग अब नियमों का उल्लंघन कर रहा है और निजी जनजातीय भूमि पर खतरनाक काला प्रदूषण छोड़ रहा है।

The water is polluted allege the residents | Amnesty International India

उन्होंने आरोप लगाया है कि यह काला प्रदूषण कृषि भूमि को बुरी तक प्रभावित कर रहा है। पानी में इसके रिसाव की (चित्र में

दिखाया गया है)वजह से खेतों में काम करने के दौरान जब वे पानी के संपर्क में आते हैं, तो उनकी त्वचा में खुजली होती है।

लड़ाई अभी जारी है मेरी यह रायगढ़ यात्रा जिले में स्वदेशी अधिकारों के लिए लड़ने वाले हमारे अभियान कार्य का एक हिस्सा थी।

पिछले साल, एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यकर्ताओं के तौर पर हमनें रायगढ़ के 4 गाँवों के 98 आदिवासी व्यक्तियों को एकजुट

होते हुए देखा। वे अपने जमीन के लिए लड़ने हेतु एकजुट हुए थे। उनका दावा था कि यह जमीन उनसे गलत तरीके से ली गई थी

इसलिए वे एफआईआर दर्ज कराने हेतु अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के पुलिस स्टेशन गए। उन्हें अनुसूचित जाति/अनुसूचित

जनजाति पर अत्याचार के रोकथाम अधिनियम ने सशक्त बनाया था जिसके तहत बिना सहमति विस्थापन एक आपराधिक जुर्म है।

Jageswar Rathia | Amnesty International India

अपनी यात्रा के दौरान मैंने कुछ आदिवासी व्यक्तियों से मुलाकात की, और उन्होंने बताया कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से मना

कर दिया है। लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है, वे अभी भी पुलिस द्वारा अपना एफआईआर दर्ज कराने और सही तरीके से अपनी

जमीन वापस पाने हेतु लड़ रहे हैं।

पवित्री मांझीः साहस का प्रतीक

Pavitri Manjhi | Amnesty International India

जमीन के लिए संघर्ष का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है भेंगरी गाँव के ग्राम पंचायत की सरपंच,पवित्री मांझी।

2012 में पवित्री ने प्रभावित व्यक्तियों को टीआरएन कंपनी के विरुद्ध एकजुट करके कंपनी के गेट के सामने धरना दिया था। पिछले

साल उन्होंने लोगों को बड़े पैमाने पर संगठित किया और प्रतिदिन उनके और रायगढ़ के आदिवासियों द्वारा कठिन परिस्थितियों का

सामना किए जाने पर भी उन्होंने समुदायों को प्रेरित करना जारी रखा। अपने बहादुर कारनामों के लिए लगातार धमकियाँ मिलने के

बावजूद उन्होंने यह कार्य जारी रखा।

अप्रैल में उन्हें उनके घर में धमकी मिली और उनसे कंपनी के खिलाफ दर्ज किए गए सभी मामले वापस लेने को कहा गया। एमनेस्टी

इंडिया में हमने वैश्विक नेटवर्क को एक त्वरित कार्यवाही जारी की और ऑस्ट्रेलिया में हमारे सहयोगियों ने समर्थन में एक याचिका

दायर की।

जब मैं पवित्री से मिला, तो वे अडिग थी और उनका साहस बरकरार था, उन्होंने कहा, "यदि हमें सफल होना है तो, हमें

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