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हिंदी दिवस: हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व कीजिए...

हिंदी दिवस: हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व कीजिए...
हिंदी हमारी राजभाषा हैं। आज भी कई लोग हिंदी को ही राष्ट्रभाषा समझते हैं! लेकिन हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं, राजभाषा हैं!! भारत की कोई राष्ट्रभाषा नहीं हैं। क्योंकि भारत में कई प्राचीन भाषाएं हैं जो पूरी तरह विकसित हैं और बड़े जनसमूह द्वारा बोली जाती हैं। भारत में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी हैं। हमारे देश के 77% लोग हिंदी लिखते, पढ़ते, बोलते और समझते हैं। हिंदी उनके कामकाज का भी हिस्सा हैं। इसलिए 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा घोषित किया। इसी निर्णय के चलते सन 1953 से संपूर्ण भारत में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ मनाया जाता हैं।

किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी भाषा और संस्कृति से होती हैं। हमें दूसरों की भाषा सीखने का मौका मिले यह अच्छी बात हैं लेकिन दूसरों की भाषा के चलते हमें अपनी मातृभाषा को छोड़ना पड़े तो कहीं न कहीं दिक्कत का सामना ज़रुर करना पड़ता हैं। हमने अंग्रेजी को हिंदी में इतना ज्यादा मिला दिया हैं कि शुद्ध हिंदी लिखना ही भूल गए। बाजार में विभिन्न दुकानों के नामों पर गौर कीजिए...

• अजय सर्विस सेंटर
• संजय फोटो कॉपी सेंटर
• विजय हेयर कटिंग सैलून
• अभय बार एंड होटल
• अनय हॉस्पिटल
• मोहन लॉन
• सुदिप मेडिकल स्टोर
• संदीप बिरयानी कॉर्नर

और आजकल व्हाट्स एप जैसे सोशल मीडिया पर तो हिंदी ऐसे लिखी जा रही हैं कि बेचारी हिंदी को ही शर्म आती होगी। शायद ही दुनिया में 'हिंदी दिवस' की तरह किसी और भाषा के नाम पर दिवस का आयोजन होता हो! क्योंकि दुनिया के हर मुल्क के लोगों को अपनी भाषा पर गर्व हैं। और गर्व होने की बात वे लोग सिर्फ़ बोलते ही नहीं तो उसे व्यवहार में अपनाते भी हैं। लेकिन हम लोग हिंदी दिवस पर 'हिंदी हमारी मातृभाषा हैं, हमें हिंदी पर गर्व हैं...' ऐसा बोलते तो हैं पर असलियत में हिंदी में बातचीत करने वालों को आज भी हेय दृष्टि से ही देखा जाता हैं। यदि कोई व्यक्ति दो-चार वाक्य फर्राटेदार अंग्रेजी में बोलता हैं तो सब उसे बहुत होशियार समझते हैं।
एक बार एक नेता द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर दिए गए भाषण के कुछ अंश देखिए। आज अपने देश में हिंदी की क्या हालत हैं यह समझ में आ जाएगा।

''लेडीज एंड जेंटलमेन, ब्रदर्स एंड सिस्टर्स,
हम इंडिया के सिटिजन हैं।
हिंदी में बोलना हमारी ड्युटी हैं, पर हिंदी की किस्मत फूटी हैं!
आज की यंग जनरेशन व्हेनएव्हर माउथ खोलती हैं,
ओनली एंड ओनली इंग्लिश बोलती हैं,
परसन की एबिलिटी को अंग्रेजियत में तोलती हैं।
यह कम्पलिटली रॉंग हैं।
हमें हिंदी को अपने डेली यूज में लाना हैं।
हिंदी को वर्ल्ड में फैलाना हैं।
आओ हिंदी को स्ट्रॉंग बनाएं...
सभी भारतीय हिंदी यूज करें...
क्योंकि वुई लव हिंदी...
वुई लव इंडिया...!!!''

दोस्तों, कैसी लगी आपको नेताजी की हिंदी? इन थोड़ी सी पंक्तियों से ही हिंदी की वर्तमान स्थिति स्पष्ट हो जाती हैं। जब बच्चे का जन्म होता हैं तो घर के लोगों से हिंदी सुन कर बच्चा भी हिंदी बोलने और समझने लगता हैं। पर जैसे ही बच्चे को स्कूल भेजने की बात आती हैं तो हिंदी मीडियम स्कूलों के हालात अच्छे न होने से हमारे पास बच्चे को अंग्रेजी स्कूल में भेजने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं रहता। यहीं से बच्चे की हिंदी कमजोर होने लगती हैं। इसलिए ही अंग्रेजी में पढ़ा-लिखा नौजवान सब्जी वाले से हिसाब-किताब करते वक्त उन्यासी और नवासी का फर्क समझ नहीं पाता। सच्चाई यहीं हैं कि अंग्रेजी की तुलना में हिंदी इंसान को ज्यादा समृद्ध बना सकती हैं। लेकिन तकनीक और बाजार में अंग्रेजी का दबदबा कायम होने से हिंदी रोजी-रोटी का मजबूत जरिया नहीं बन सकती।

फ़िर भी हमें हिंदी पर गर्व होना चाहिए, क्योंकि...
• हिंदी की खास बात यह हैं कि इसमें जिस शब्द को जिस प्रकार उच्चारित किया जाता हैं, उसे लिपि में लिखा भी उसी प्रकार जाता हैं।
• इंसान की कल्पनाशक्ती का विकास मातृभाषा में ही हो सकता हैं।
• इंग्लिश आज की जरुरत हैं। लेकिन क्या जरुरत के लिए नींव को छोड़ा जा सकता हैं?
• आज दैनंदिन काम भी इंटरनेट के बिना नहीं हो सकते। जरा सोचिए, यदि इंटरनेट का उपयोग करने के लिए हर एक व्यक्ति पहले इंग्लिश लिखना-पढ़ना सिखेगा तो इंग्लिश सिखने में ही उसको बहुत समय लग जाएगा। तो वह अपने काम समय पर कैसे पूरे करेगा? इसलिए ही गूगल खुद भी आजकल हिंदी को प्रोत्साहन दे रहा हैं।
• अंग्रेजी भाषा 'A for apple से मतलब एक फल से शुरू हो कर Z for zebra' याने एक जानवर पर खत्म होती हैं। लेकिन हमारी हिंदी भाषा 'अ अननस का से शुरु हो कर मतलब एक फल से शुरु होकर ज्ञ ज्ञानी का' पर खत्म होती हैं। दूसरे उदाहरण में 'अ अनपढ़ का से शुरु हो कर ज्ञ ज्ञानी का' पर खत्म होती हैं। याने हिंदी भाषा एक अनपढ़ को ज्ञानी बनाती हैं तो अंग्रेजी जानवर!
• हिंदी हमारी अपनी भाषा हैं और अंग्रेजी मेहमान हैं। हमें इस बात पर गौर करना चाहिए कि मेहमान, आखिरकार मेहमान होता हैं...उसे घर का सदस्य नहीं बनाया जा सकता!!
अत: हमें हिंदी बोलने पर शर्म नहीं, गर्व करना चाहिए!!
                        हर भाषा की इज्जत करों,

                         पर हिंदी को न बेइज्जत करों!!!

 Keywords: Hindi divas, Rashtrabhasha, rajbhasha, mother tongue, matrubhasha


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