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बलात्कार को रोकने 19 साल की सीनू ने बनाई 'रेप प्रूफ पैंटी'

असली हीरो- बलात्कार को रोकने 19 साल की सीनू ने बनाई 'रेप प्रूफ पैंटी'
दोस्तों, जैसा कि आपकी सहेली की हमेशा कोशिश रहती हैं कि देश के असली हीरो से आप लोगों को मिलवाऊं। इसी कोशिश के अंतर्गत आज मीलिए, 19 साल की सीनू से जिन्होंने महिलाओं और लड़कियों को समाज की हैवानियत और बलात्कार से बचाने के लिए 'रेप प्रूफ पैंटी' बनाई हैं! उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद की रहने वाली 19 वर्षीय सीनू कुमारी ने एक ऐसी पैंटी का आविष्कार किया है, जो महिलाओं को रेप से बचाएगी। साधारण किसान परिवार की यह लड़की बीएससी थर्ड ईयर की स्टूडेंट है। हम बलात्कारियों को भला-बुरा कह कर चूप बैठ जाते हैं। कुछ लोग पीड़िता को ही दोष देने लगते हैं कि उसने बहुत छोटे कपड़े पहने होंगे या रात को अकेली घर से बाहर क्यों निकली आदी। लेकिन इस नन्हीं सी बच्ची ने इसका उपाय ढूंढने की कोशिश की।

इसलिए बनाई ये रेप प्रूफ पैंटी
हर रोज होनेवाली रेप की घटनाओं से सीनू बुरी तरह आहत थी। वो हमेशा सोचती रहती कि इन रेप की घटनाओं को रोकने के लिए मैं क्या करूँ? एक सात साल की बच्ची से दुष्कर्म और उसके बाद उस बच्ची की हत्या ने तो सीनू को झकझोर कर रख दिया। तब उसने मन ही मन निश्चय किया कि अब तो मुझे रेप की घटनाओं को रोकने के लिए कुछ न कुछ तो करना हैं! कहा जाता हैं-
उम्मीदों के दिए बुझाया नहीं करते,
दूर हो मंजील पर पांव डगमगाया नहीं करते, हो दिल में जज्बा जिसके मंजील छुने का, वो मुश्किलों से कभी घबराया नहीं करते!!

इसी दृढनिश्चय के चलते उसने बनाई ये रेप प्रूफ पैंटी! इस पैंटी की लागत फिलहाल लगभग 5 हजार रुपए हैं। लेकिन जब उसे कुछ कंपनियों का साथ मिलेगा तो इसकी लागत कम हो सकती हैं। फिलहाल इस पैंटी को इलाहाबाद स्थित नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के पास पेटेंट के लिए भेजा गया हैं। आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक जब बाल एवं महिला विकास मंत्री मेनका गांधी तक ये बात पहुंची, तो उन्होंने सीनू के इस मॉडल को सराहा और भविष्य में ऐसे और अविष्कारों के लिए शुभकामनाएं दी।
'रेप प्रूफ पैंटी' ऐसे रोकेगी रेप की घटनाओं को
आपके मन में यह सवाल ज़रुर आ रहा होगा कि एक पैंटी रेप की घटनाओं को कैसे रोक सकती हैं? तो आपको जानकर हैरानी होगी कि ये कोई आम पैंटी नहीं हैं, बल्कि नई इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से लैस हैं जिसमें एक स्मार्टलॉक लगा हैं, जो पासवर्ड से ही खुलता हैं। लोकेशन की सही जानकारी बताने के लिए इसमें जीपीआरएस सिस्टम लगा हैं और घटनास्थल की बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए रेकॉर्डर भी लगा हैं! ये पैंटी ब्लेडप्रूफ भी हैं मतलब इसे ब्लेड या किसी भी धारदार हथियार से काटा नहीं जा सकता। इसे जलाया भी नहीं जा सकता। पैंटी के साथ छेडखानी करने पर या बटन दबाने पर पुलिस हेल्पलाइन नंबर (100) और महिला हेल्पलाइन नंबर (1090) पर कॉल अपनेआप चली जाती हैं।

कब इस्तेमाल करना हैं?
दोस्तो, शायद आप के मन में यह सवाल भी आ रहा होगा कि किसी महिला या लड़की को यह पैंटी क्या हर रोज इस्तेमाल करनी होगी? तो ऐसी कोई बात नहीं हैं। जैसे बुलेट प्रूफ जॅकेट सिर्फ युद्ध आदी आपातकाल की स्थिती में ही पहनी जाती हैं ठीक उसी तरह यह पैंटी भी जब महिलाएं या लड़कियां अकेली बाहर जा रहीं हो या लडकियां अपने प्रेमी के साथ अकेली कहीं जा रहीं हो तो यह पैंटी ज़रुर काम आयेंगी। क्योंकि कई बार लड़कियाँ जिसे सच्चा प्यार समझने की भूल करती हैं, अपने प्रेमी पर खुद से ज्यादा भरोसा करती हैं, वो ही प्रेमी...!!!

अत: मुझे लगता हैं इस पैंटी के इस्तेमाल से पूरी तरह तो नहीं कह सकते लेकिन थोड़े बहुत प्रमाण में तो बलात्कार की घटनाओं में कमी ज़रुर आ सकती हैं। यदि बलात्कार की घटनाओं में थोड़ी बहुत भी कमी आई तो यह  इंसानियत के दृष्टिकोण से बहुत बड़ी उपलब्धि होगी! कहा जाता हैं,
''यदि हम पेंसिल से किसी का सुख नहीं लिख सकते तो रबर बन कर दुख को मिटा तो सकते हैं!''
बलात्कार को रोकने रबर रुपी 'रेप प्रूफ पैंटी' बनाकर सीनू कुमारी ने महिलाओं के दु:ख को मिटाने की कोशिश की हैं! इस नन्हीं कलाम को मेरा व्यक्तिश: सलाम! 

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