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हमारे उस्ताद - कैफ़ अहमद सिद्दीकी

कितनी मेहनत से पढ़ाते हैं हमारे उस्ताद हम को हर इल्म सिखाते हैं हमारे उस्ताद तोड़ देते हैं जहालत के अँधेरों का तिलिस्म इल्म की शम्अ' जलाते हैं हमारे उस्ताद मंज़िल-ए-इ'ल्म के हम लोग मुसाफ़िर हैं...

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