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ज़ुल्म किस-किस गरीब पर न किया - दाग़ देहलवी

ज़ुल्म किस-किस गरीब पर न किया तुमने इस काम से हज़र न किया दिल के हाथो है सख्त मजबूरी अब किया वह जो उम्र भर न किया इश्क ने कैद कर लिया मुझ को क़ब्जा उनके मिज़ाज पर न किया कोई दिन और सब्र करना...

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