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पैसे से क्यों सांस मिले - डॉ. ज़िया उर रहमान जाफरी

पैसे से क्यों सांस मिले है जीवन तो आस मिले घुटन नहीं हो जीने में सोचें न जल पीने में खुली फ़िज़ा से बचना क्या बंद घरों में रहना क्या घर की खिड़की खोल सकें बिना मास्क के बोल सकें दफ्तर हो आसान...

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