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इश्क किससे करूँ, बैराग कहाँ से लाऊं - शकील आज़मी

इश्क किससे करूँ, बैराग कहाँ से लाऊं दिल जलाने के लिए आग कहाँ से लाऊं मसला ज़हर की ख्वाहिश का भी पेचीदा है जिस्म डसवाऊं मगर नाग कहाँ से लाऊं मैंने भी चाँद को चाहा से बड़ी शिद्दत से रात के जैसा मगर भाग कहाँ से लाऊं मेरे पानी से नमक छान लिया दुनिया ने मै किनारों के लिए झाग कहाँ से लाऊं जिंदगी! मै तिरे सुर-ताल से नवाकिफ़ हूँ तुझको गाने के लिए राग कहाँ से लाऊं - शकील आज़मी Roman ishq kisase karuN,



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