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शिकार को निकला शेर - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

एक शेर एक रोज जंगल में शिकार के लिए निकला। उसके साथ एक गधा और कुछ दूसरे जानवर थे। सब-के-सब यह मत ठहरा कि शिकार का बराबर हिस्साे लिया जाएगा। आखिर एक हिरन पकड़ा और मारा गया। जब साथ के जानवर हिस्सार लगाने चले, शेर ने धक्केए मारकर उन्हेंर अलग कर दिया और कुल हिस्से छाप बैठा। उसने गुर्राकर कहा, ''बस, हाथ हटा लो। यह हिस्साा मेरा है, क्योंरकि मैं जंगल का राजा हूँ और यह हिस्सार इसलिए मेरा है,



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