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महिलाएं भी स्वयं का भरण पोषण करने में सक्षम है

महिलाएं भी स्वयं का भरण पोषण करने में सक्षम है

इंदौर | परिवार न्यायालय ने एक विशेष निर्देश में भरण पोषण का आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया की महिला एमएस-सी, एमफिल पढ़ाई में उत्तीर्ण कर चुकी है महिला ने कई प्रकार के विश्वविधालयो में सहायक प्रोफेसर के पद पर भी नौकरी कर चुकी है |

वह महिला का स्वास्थ्य ठीक है तथा आय कमाने में भी पूर्ण रूप से सक्षम है अपने पति के साथ नहीं रहने का भी कोई उचित कारण नहीं है इसके लिए अपने पति से अपना भरण पोषण प्राप्त करने का कोई अधिकार प्राप्त नहीं है पति ने अपने पक्ष में कहा कि शादी के कुछ समय पश्चात से ही उसकी पत्नी साथ में नहीं रहना चाहती थी |

इंदौर शहर के रावजी बाजार क्षेत्र में निवास करने वाली महिला ने खुद के पास रोजगार उपलब्ध नहीं होने की बात को बताते हुए उसके पति अरुण बामने जो कि वैशाली नगर में रहता है से 30 हजार रुपए प्रति महीने अपने भरण पोषण तथा पांच हजार रुपए महीना मकान के किराए की मांग की गई थी |

इन दोनों की शादी साल 2015 में हुई थी पति अरुण की तरफ से वकील जेएस ठाकुर तथा वकील अफशान पठान ने प्रधान जज सुबोधकुमार जैन के सामने पक्ष रखा गया कि महिला शादी के पश्चात से अपने पति को सही पसंद नहीं करती तथा साथ में भी नहीं रहना चाहती है महिला ने एमएससी कर रखी है शादी के पहले इंदौर शहर के कई विश्वविधालयो में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर काम भी कर चुकी है शादी के पश्चात भी इन विश्वविधालयो में कार्य कर चुकी है |

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