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अखंड दीप | श्वेता सिन्हा


दीपक में भरकर आशाएँ
बाती नेह की मैं 
जलना चाहती हूँ 
खुशियों की दीप सी
तुम्हारे मन के आँगन में,
पी कर अंधियारा 
हर दर्द तुम्हारा
बिखेरना चाहती हूँ
कतरनें रोशनी की 
तुम्हारे हृदय के प्रांगण में,
पनियाले आँखों के
बुझे हुये हर ख्वाब को
जगाना चाहती हूँ
अपनी अधरों की मुस्कुराहट से
खाली आँचल में बँधी
अनगिनत दुआओं के
रंगीन मन्नत के धागों के सिवा
कुछ नहीं 
तुम्हें देने के लिए,
पर,मैं भेंट करना चाहती हूँ
इस दिवाली पर तुम्हें
अनमोल उपहार,
दे दो इज़ाजत तो बन जाऊँ
तुम्हारे आँगन की
तुलसी बिरवे का दीया
तुम्हारे सुख समृद्धि की
प्रार्थना में अखंड जलती हुई।


श्वेता सिन्हा जी कवि व नियमित ब्लॉगर है अौर जिनका ब्लॉग 'मन के पाखी' बहुत प्रसिद्व है। आपसे E-Mail : [email protected] पर सम्पर्क किया जा सकता है।


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