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राष्ट्रभक्ति का शोर - Rashtrabhakti Ka Shor

वही हुआ, जिसका डर था। यह राष्ट्रभक्ति यह दिखावे की राष्ट्रभक्ति यह किसी के सीने पर छाती पर पैर रखकर चिल्लाने वाली राष्ट्रभक्ति, यह किसी को ठेस पहुंचाने के लिए दिखाई गई राष्ट्रभक्ति, हजारों युवाओं को रोजगार के पथ से विमुख करके उन्हें उन्मादी , उन्हें उग्र बनाने वाली नेताओं की राष्ट्रभक्ति किसी ना किसी का तो खून लेने ही वाली थी। आज कासगंज का बेटा मरा है। कल किसी और का मरेगा ना उन नेताओं को कुछ फर्क पड़ेगा और ना ही हजारों की भीड़ के हुजूम को , जो राष्ट्रभक्ति के नाम पर कुछ भी करने के लिए तैयार हैं। न तो अपना भविष्य देखना है ना समाज देखना है बस चिल्लाना है। किसी ने शोर मचाया तो बिना सोचे हम भी शोर मचाएंगे । कब तक यह भावना हमारे मन में बैठी रहेगी कब तक हम राष्ट्रभक्ति का शोर मचाते रहेंगे ?
कई लोग राष्ट्रभक्ति के  शोर में दफन हो जाते हैं? और कई लोग नेता बन जाते हैं कुछ को नेता बनाने के लिए कुछ युवाओं को बलि का बकरा बनाया जाए शायद यही है उनकी राष्ट्रभक्ति। अगर आपके अंदर देश प्रेम की भावना है, तो उसके लिए चिल्लाने की क्या जरूरत है? अपने घर पर, किसी मैदान में, किसी एक नियत स्थान पर जाकर राष्ट्रभक्ति का जोहर दिखाइए। किंतु किसी को नीचा दिखाने के लिए किसी के दिल पर शब्दों और तानों की गोली चलाने के लिए उसके मोहल्ले में जाकर उसके घर के सामने शोर मचाना राष्ट्रभक्ति नहीं तानाशाही और रंगबाजी ही कही जा सकती है जो अनैतिक है। अगर  राष्ट्रभक्ति दिखानी ही है ईंट भट्ठों पर ना जाने कितने मासूम  बचपन में पेट भर खाना भी नहीं पाते शिक्षा तो बहुत दूर की बात है । उनके लिए कुछ करिए।
देश आपका है देश को आपकी ज़रूरत है, आपके द्वारा किया जाने वाला शोर, देश की आवश्यकता नहीं है।।



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