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डीएम के रडार पर छाए एआरटीओ कार्यालय के दलाल

सिद्धार्थनगर : एआरटीओ कार्यालय के इर्द-गिर्द सक्रिय दलाल शनिवार को जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार के रडार पर आ गए। जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में टीम ने कार्यालय पर छापेमारी की और 22 व्यक्तियों को मौके से संबंधित दस्तावेजों के साथ दबोच भी लिया। सदर थाना व क्यूआरटी की टीम आरोपियों को थाने पर ले आई। यहां तीन व्यक्तियों का विशेष दोष न मिलने पर उन्हें चेतावनी देकर छोड़ा गया। इसके अलावा 19 व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।

सुबह करीब 11 बजे सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय के बाहर दुकानों पर लाइसेंस, वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन, फिटनेस आदि को लेकर वाहन स्वामियों की भीड़ जुट ही रही थी कि जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार व पुलिस अधीक्षक राकेश शंकर टीम समेत मौके पर पहुंच गए। टीम ने पूछताछ के पश्चात दलाली के आरोप में 22 व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया और उन्हें लेकर वह थाने चली आई। इस दौरान पुलिस कर्मियों ने बाहर अवैध रूप से चलाई जा रही दुकानें तोड़ीं गई। करीब आधे घंटे तक कार्यालय पर अफरा-तफरी की स्थिति रही। इस दौरान टीम में सदर थानाध्यक्ष, पुलिस अधीक्षक पीआरओ आदि शामिल रहे। आवश्यक कार्रवाई के लिए एसपीओ एसके पाठक की भी सलाह ली गई।दोपहर में ही बंद हो गया कार्यालय पूछताछ के लिए संभागीय परिवहन विभाग पर कर्मचारियों को थाने पर बुलाया गया। इससे दोपहर में ही कार्यालय पर ताला लटक गया। यह और बात है कि बाद में कर्मचारी अपने अपने काम धाम पर लौटे।डीएम ने खुद की पूछताछ हिरासत में लिए गए कई आरोपियों से जिलाधिकारी ने खुद पूछतांछ की। एक व्यक्ति ने जानकारी दी कि कार्यालय में सक्रिय रहने वाले एक व्यक्ति को उसने वाहन के बीमे के लिए 1800 रुपये दिया था। रुपये दिए हुए छह माह हो गए और अभी तक बीमा का कागज नहीं मिल सका है। डीएम से पूछताछ में उसने 1700 रुपयों की जानकारी दी। दोनों पक्ष सामने तो पता चला कि उसने 1800 रुपये लिए थे। जिलाधिकारी ने उससे तत्काल रुपये वापस करने को कहा और मुकदमा लिखकर जेल भेजने के लिए निर्देशित किया।–छात्र के दृष्टिकोण से डीएम असंतुष्ट

आरोपी में एक व्यक्ति ने पूछताछ में खुद को विधि का छात्र बताया। जिलाधिकारी ने उससे पूछा छात्र होकर ऐसा कार्य किस लिए करते हो। उसने जवाब दिया कि खर्च चलाने के लिए कुछ न कुछ करना पड़ेगा। उसने बताया कि पिता चाय की दुकान चलाते हैं। जिलाधिकारी ने समझाया कि कुछ करने का यह मतलब हरगिज नहीं कि गलत कार्यों के जरिए धन इकट्ठा किया जाए। ला में ऐसी शिक्षा नहीं दी जाती। उन्होंने उसे एटीट्यूड ठीक करने के लिए कहा। साथ ही यह भी कहा कि दृष्टिकोण ठीक रहता तो छोड़ दिया जाता। हालांकि सदर थानाध्यक्ष शिवाकांत मिश्र ने बताया कि आरोपी का मुख्य पेशा ही यही है। वह कोई छात्र नहीं हैं। ऐसे में उनके विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत किया गया है।19 के विरुद्ध दर्ज किया गया मुकदमा सदर थानाध्यक्ष ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर यह अभियान चलाया गया था। 22 व्यक्तियों को उठाया गया था। यह भी कहा गया था जो व्यक्ति दोषी न हों। उन्हें चेतावनी देकर छोड़ा जाए। तीन आरोपियों को चेतावनी दी गई है। 19 के विरुद्ध धारा 420, 406 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। इसमें जगदीश मद्धेशिया, जुबेर, मनोज आदि शामिल हैं।

संबाददाता- श्याम सुन्दर शुक्ला
उत्तर प्रदेश»सिद्धार्थ नगर



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