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एक खयाल आजाद एक खयाल गुलाम एक गुलाम आजाद एक आजाद गुलाम

गुलामों के
गुलामों की
किसी एक
श्रृंखला के
गुलाम
तेरे आजाद
होने के
खयाल को
एक गुलाम
का सलाम
सोच ले
कर ले मनन
लगा ले ध्यान
लिखना चाहे
तो लिख भी
ले एक कलाम
कल के दिन
आने वाली
एक दिन
की आजादी
के जश्न का
आज की शाम
देख कर
दिनदर्शिका में
अवकाश के
दिनों में
दिखाये गये
लाल रंग में रंगे
पन्द्रह अगस्त
का लेकर नाम
कल निकल
जायेगा हाथ से
एक साल तक
नहीं मिलेगा
फिर मौका
हो जायेंगे
तेरे सारे
अरमान धड़ाम
करले करले
बिना शरमाये
किसी बड़े
गुलाम के
छोटे गुलाम को
झंडा तानते समय
जोर से जूता
ठोक कर सलाम
आजाद खयाल
आजाद रूहें
करें अपने
हिसाब किताब
लिये अपने
जारी और रुके
हुए जरूरी
देश के सारे काम
एक गुलाम
‘उलूक’ का
अपने जैसे
गुलामों के लिये
है बस ये
गुलाम खयाल
आजाद पैगाम ।

चित्र साभार: www.shutterstock.com


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