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प्लास्टिक वाले सिप्पी कप से बढ़ रहा है बच्चों में कैंसर का खतरा, करे ऐसे बचाव

आज की इस बदलती लाइफस्टाइल के चलते किसी को भी किसी काम के लिए समय ही नहीं है. सभी हर काम में अपना समय ही बचाना चाहते है, और इसके लिए वे अपनी ही सेहत से खिलवाड़ कर रहे है. बदलते समय के साथ ही माँ भी अपने बच्चें को अपना दूध पिलाना छोड़कर अब डिब्बे वाला दूध पिलाने लग गयी है. लेकिन समय बचाने और अपने शरीर की खूबसूरती को बनाए रखने की वजह से बच्चों में ये समस्या करता है. आप इस बात को शायद ही जानते होंगे कि यह बच्चों में कैंसर कर देता है.

उनके निर्माण में इस्तेमाल किए गए Bisfinol-A (BPA) रसायन है. यह रसायन हार्मोन प्रणाली को प्रभावित करके बच्चों के विकास को प्रभावित करता है. इस प्रभाव के कारण, जहां लड़कियों में मासिक धर्म की उम्र कम होने लगती है, लड़कों में जल्द ही यौवन विकसित हो रहा है.

टॉक्सिक्स लिंक के वरिष्ठ कार्यक्रम समन्वयक पीयूष महापात्रा ने कहा कि अध्ययन ने दिल्ली के विभिन्न बाजारों से सिप्पी कप के 13 नमूने एकत्र किए. दिल्ली में श्री राम औद्योगिक अनुसंधान संस्थान में उनकी जांच की गई. रिपोर्ट से पता चला कि 13 में से 10 नमूनों में BPA है। यानी 77 प्रतिशत नमूनों में बिसफेनॉल-ए है. सिप्पी कपों में BPA की मात्रा 14.9 पीपीएम (भागों प्रति मिलियन) जितनी होती है, जो बेहद हानिकारक है. हैरानी की बात यह है कि इन उत्पादों को बीपीए-फ्री के रूप में लेबल करके बाजार में बेचा जा रहा है. उपभोक्ताओं के लिए यह सुनिश्चित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है कि कौन सा सिप्पी कप उनके बच्चे के लिए सुरक्षित है.

क्या है बिसफिनोल-ए

बिसफिनोल-ए (बीपीए) एक रसायन है जो एंडोक्राइन में गड़बड़ी का कारण बनता है. शिशुओं के हार्मोन को परेशान करने के अलावा, BPA तीन साल तक की लड़कियों के व्यवहार और भावनात्मक पहलुओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है. लड़कों की बात करें तो इसके दुष्प्रभाव अवसाद और चिंता की भावना को बढ़ाते हैं. BPA आमतौर पर हृदय रोग, जिगर विषाक्तता और शरीर में मधुमेह का कारण बनता है. इसका उपयोग प्लास्टिक उत्पाद सिप्पी कप के निर्माण में किया जा रहा है, जो बच्चों के लिए हानिकारक हैं.

गर्भपात की बढ़ती है आशंका

अमेरिकन सोसायटी फॉर रिप्रोडक्टिव मेडिसिन (एएसआरएम) ने पाया है कि जिन महिलाओं के खून में बीपीए की मात्रा अधिक होती है, उनमें गर्भपात की आशंका उन महिलाओं की तुलना में अधिक होती है जिनके खून में बीपीए का स्तर निम्नतम है.

व्यवहार पर भी डालता है असर

244 माताओं पर किए गए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया है कि जन्म से पहले बीपीए से जुड़ा जोखिम तीन साल की उम्र में लड़कियों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है.

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