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Savitribai Phule Biography in Hindi | सावित्रीबाई फुले की जीवनी

नमस्कार दोस्तों आज की ये पोस्ट बहुत ख़ास होने वाली है क्योंकि आज की इस पोस्ट में हम Savitribai Phule Biography in Hindi / सावित्रीबाई फुले की जीवनी और आसान भाषा में कहे तो  Savitribai Phule ke baare me hindi me में बताने वाले है.
 
विभिन्न संस्कृति,विभिन्न धर्मो वाले इस देश की माटी पर एक ऐसी भी महिला हुई है जिसके भीतर देशभक्ति का जज्बा भी था और अपने समस्त जीवन को लोगो की सेवा में समर्पित करने का अनूठा त्याग भी, आज आपकी अपनी वेबसाइट ‘गजब है’ के माध्यम से हम आपको रूबरू कराएंगे इसी महिला की जीवनी से ,तो चलिए शुरुआत करते है ।

Savitribai Phule Biography in Hindi | सावित्रीबाई फुले की जीवनी

 
जीवन परिचय –
 
Savitribai Phule Biography in Hindi सावित्रीबाई फुले की जीवनी

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सावित्रीबाई फुले ( Savitribai Phule ) का जन्म 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ था । इनके पिता का खण्डोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। जब वो मात्र नौ वर्ष की थी तब उनका विवाह बारह वर्ष के ज्योतिबा फुले से हो गया था ।
 
 
महान विचारक,क्रांतिकारी,लेखक जैसे गुणों को समाहित रखने वाली –
 
 
यूँ तो सावित्रीबाई पढ़ी लिखी नही थी लेकिन शादी के बाद ज्योतिबा ने उन्हें पढ़ना लिखना सिखाया और बाद में सावित्री ने अपने पति के द्वारा हासिल की गई शिक्षा का प्रचार प्रसार किया । उन दिनों लड़कियों की शिक्षा के लिए कोई प्रयास नही करता था और उनको मात्र चूल्हे तक ही सीमित समझा जाता था । लड़कियो की इसी दशा को सावित्री बाई ने बखूबी समझा और 1848 में उन्होंने लड़कियों के लिए विद्यालय की स्थापना की,स्त्रियों के लिए खुलने वाला ये देश का एकमात्र स्कूल था । इस तरह वो देश की पहली शिक्षिका बन गयी । लेकिन इस दौरान उनको काफी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा । बताया जाता है की जब वो पढ़ाने जाती थी तो उनके ऊपर धर्म के कथित ठेकेदारों ने कूड़े कचरे व पत्थर को भी फेंका और उन्हें अपशब्द भी कहे लेकिन सावित्रीबाई चुपचाप सब कुछ सहती रही और डटकर स्त्रियों के पुनर्वास, व शिक्षा के क्षेत्र में निरन्तर कार्य करती रही ।
 
Savitribai Phule Biography in Hindi सावित्रीबाई फुले की जीवनी

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विधवा पुनर्विवाह व सती प्रथा के लिए चलाये कई अभियान-
 
सावित्रीबाई फुले ने स्त्री शिक्षा के साथ विधवाओं की शोचनीय दशा की तरफ भी अपना ध्यान केंद्रित करते हुए विधवा पुनर्विवाह की भी शुरुआत की और 1854 में विधवाओं के लिए आश्रम भी बनाया। इसके अलावा उन्होंने कन्या हत्या पर रोकथाम के लिए नवजात शिशुओं का आश्रम खोला । अपने जीवनकाल के उन्होंने पुणे के भीतर 18 विद्यालयों की नींव डाली थी । उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में तो बेहतर किया ही साथ ही विधवाओं की स्थिति को भी सुधारा और सती-प्रथा जैसी कुप्रथाओं को रोकने व विधवा महिलाओ के पुनर्विवाह के लिए भी बहुत प्रयास किए। 1854 में उन्होंने अनाथों के उत्थान के लिए देश का पहला अनाथालय बनाया । सावित्रीबाई फुले ने अपने पति ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर काशीबाई नामक एक गर्भवती विधवा महिला को आत्महत्या करने से रोका और उसे अपने घर पर रखकर उसकी उचित देखभाल की और समय पर उसकी डिलीवरी करवाई। बाद में सावित्रीबाई व ज्योतिबा फुले ने उसके पुत्र यशवंत को गोद लेकर उसको खूब पढ़ाया लिखाया और बड़ा होकर यशवंत एक प्रसिद्ध डॉक्टर बना ।
 

Savitribai Phule Biography in Hindi | सावित्रीबाई फुले की जीवनी

 
सावित्रीबाई फुले की लिखी किताबे – सावित्री बाई एक कवि भी थी और उन्होंने दो काव्य रचना भी की थी उनकी लिखी पुस्तको के नाम निम्न थे.
 
1. ‘काव्य फुले’
2. ‘बावनकशी सुबोधरत्नाकर’
 
दलित उत्थान के लिए हमेशा तत्पर रही –
 
Savitribai Phule Biography in Hindi सावित्रीबाई फुले की जीवनी

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समाज के हित मे काम करने के अपने अभियान पर कार्य करते हुए ज्योतिबा फुले ने 24 सितंबर 1873 को अपने अनुयायियों के साथ ‘सत्यशोधक समाज’ नामक एक संस्था का निर्माण किया। इसके अध्यक्ष ज्योतिबा फुले खुद रहे जबकि इसकी महिला प्रमुख सावित्रीबाई फुले को बनाया गया था । इस संस्था की स्थापना के पीछे का मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति शूद्रों को उच्च जातियों के शोषण व अत्याचारो से मुक्ति दिलाना था । अपने पति ज्योतिबा के हर कार्य में सावित्रीबाई ने कंधे से कंधे मिलाकर सहयोग किया । बताया जाता है कि ज्योतिबा फुले कोई भी कार्य करने से पूर्व अपनी पत्नी सावित्रीबाई का मार्गदर्शन प्राप्त करते थे इसी बात से सावित्रीबाई की दिग्दर्शिता,कुशाग्रता का पता चलता है ।
 
जब धरती छोड़ गई ये ‘पुण्यात्मा’
 
जब 28 नवम्बर 1890 को सावित्रीबाई फुले के पति महात्मा ज्योतिबा फुले की मौत हुई तो अपने पति के अधूरे कार्यो को पूरे करने का बीड़ा भी सावित्रीबाई ने अपने कंधों पर ही उठा लिया और समाज की सेवा का कार्य जारी रखा । 1897 की बात है जब पुणे में “प्लेग” काफी खतरनाक तरीके से फैला तो सावित्री ने उससे पीड़ित लोगों की जमकर सेवा करनी शुरू कर दी,वो रात दिन जागकर मरीजो की सेवा में लगी रहती थी लेकिन एक दिन ऐसा भी आया जब वो खुद भी इस जानलेवा बीमारी के जकड़े में आ गयी और 10 मार्च 1897 को उन्होंने इस नश्वर शरीर का त्याग कर दिया । सैकड़ो परेशानियो के बावजूद जिस तरह से सावित्रीबाई ने एक लेखक, क्रांतिकारी, समा­जिक कार्यकर्ता बनकर समाज के हित मे काम किया वो वाकई युगों युगांतर तक याद रखा जाएगा ।
 
दोस्तों उम्मीद करते है की आपको Savitribai Phule Biography in Hindi / सावित्रीबाई फुले की जीवनी से जुडी हुई जानकारी अच्छी लगी होगी. अगर आपके पास Savitribai Phule Biography in Hindi / सावित्रीबाई फुले की जीवनी से जुड़ी हुई और कोई जानकारी है तो आप हमे कमेंट में जरुर बताएं.

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