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कापालिक साधू – इंसानी खोपड़ी में खाना खाते है, जाने क्या है रहस्य और रोचक जानकारी

अगर आपको किसी इंसानी खोपड़ी में खाना और पानी दिया जाए तो क्या आप उसे ग्रहण करेंगे? जी नहीं. आप ऐसी बातें सोच भी नहीं सकते पर कापालिक संप्रदाय के लोग इंसानी खोपड़ी में भी भोजन करते है और पानी पीते है. आज हम आपको कापालिक साधुओ के बारे में कुछ बेहद ही रोचक जानकारी बताने वाले है.
आप जानते है तंत्र शास्त्र में कापालिक संप्रदाय के लोग और शैव संप्रदाय के लोग मानव की खोपड़ियो के माध्यम से ही खाना ग्रहण करते है इसीलिए उन्हें ‘कापालिक’ कहा जाता है.
क्या है इनका इतिहास
प्राचीन काल में कापालिक साधना को विलास तथा वैभव का रूप मानकर कई सारे साधक इन संप्रदाय में शामिल हुए. ये एक ऐसा मार्ग है जहा पर भोग के आलावा और कुछ भी नहीं. अगर साफ़ शब्दों में बताये तो कापालिक की चक्र साधना को भोग विलास और पिपासा शांत करने के लिए ऐसा साधन बना दिया है. इसीलिए इस मार्ग को लोग घृणा की द्रष्टि से देखते है.
कैसे होती है साधना
कुछ इतिहास कारो का मानना है की कापालिक पंथ से ही शैव मार्ग प्रचलित हुआ है. इस धर्म की सभी साधनाएँ बेहद ही महत्वपूर्ण होती है. इस पंथ के कापालिक चक्र के मुख्य साधक को ‘भैरव’ तथा साधिका को ‘त्रिपुर सुंदरी’ कहा जाता है. इस काम शक्ति के विभिन्न साधन में ऐसी साधना में असीम शक्तियां पायी जाती है.
ऐसी साधना में सिर्फ फल की इच्छा से ही शारीरिक अवयवो को नियंत्रित रखा जाता है या यु कहे तो किसी भी प्रकार का निर्माण और विनाश करने की बेजोड़ शक्ति इस मार्ग से ही पायी जाती है.
क्या आपको पता भी है इस मार्ग में कापालिक अपनी भैरवी (साधिका) को पत्नी के रूप में भी स्वीकार कर सकता है. कापालिक संप्रदाय के कुछ मठ आज भी पूर्व राज्यों में देखे जाते है. इन सभी में आपको भेद को जानना है तो शिवपुराण और आगम पुराण के कुछ तांत्रिक संप्रदायों से भेद देखने को मिल जायेगा.
कौन है इष्टदेव
कापालिको के इष्टदेव की बात करे तो इसके इष्टदेव में महाकाली, चांडाली, चामुंडा, भैरव, शिव और त्रिपुरासुंदरी जैसे देवी-देवताओं की साधना की जाती है. सदियों पहले मंत्र की शक्ति से ही कापालिक साथियों की काम शक्ति को न्यूनता और उद्वेग दिया जाता है, जिससे साधना अच्छे से पूरी हो सके. आज ऐसी कई सारी साधनाएँ लुप्त हो चुकी है या यु कहे की आज भी ऐसी साधनाएँ आम इंसान से गुप्त और सुरक्षित रखी गयी है. आज भी कई सारे तांत्रिक मठो में गुप्त रूप से कापालिक साधनाएँ करते है.


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