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दस दिन के अन्दर पाकिस्तान में हो सकता है तख्ता पलट?

पाकिस्तान में सैन्य कब्ज़ा, वर्ष 1958 में पहली बार हुआ. उसके बाद, पाकिस्तानी जनरल अपनी और अपने चहेतों की मौज के लिए, बार बार सत्ता को हथियाते रहे. इस्लामिक कट्टरवाद से परिपूर्ण, फौजी हुकूमतें विकास पर ध्यान देने की बजाये, भारत पर फोकस करती रही. पाकिस्तान बार-२ युद्ध हारा, दुनिया भर में बदनाम हुआ, बेइज्जत हुआ.. लेकिन, सिलसिला आज भी चालू है.

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अब लगा है की नवाज शरीफ की civilian गवर्नमेंट के दिन अब पूरे हो गये हैं. पाकिस्तान में छपी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार, अब केवल दस दिन में नए सेना अध्यक्ष की नियुक्ति पर मुहर लगाने वाली है.

लेकिन, मौजूदा पक्सितानी आर्मी चीफ, जनरल रहील शरीफ, अपनी पॉवर को छोड़ने के मूड में बिलकुल नहीं हैं. जनरल का कार्यकाल नवम्बर महीने में खत्म हो रहा है लेकिन, वो अपनी गद्दी इतनी जल्दी नहीं छोड़ना चाहते. आखिरकार, पाकिस्तानी जनरल नवाबों से भी ज्यादा आराम-परस्त जिंदगी के आदि हैं. इनके परिवार के अधिकतर लोग विदेशों में मौज से रहते हैं, इनके पास दुबई, अमेरिका इत्यादि में बंगले हैं, विदेशों में आपार काला धन है.

अब इस सम्भावना को टाला नहीं जा सकता की जनरल शरीफ, प्रधानमंत्री शरीफ को ठिकाने लगाने के लिए कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं. जो जनरल मुशर्रफ ने नवाज शरीफ के साथ किया था, वही अब फिर से होने वाला है.

भारत के साथ युद्ध की जब-२ सम्भावना बनती है, या फिर जब-२ पाकिस्तान में भारत-विरोधी लहर (public sentiment) चलती है, तब-२ पाकिस्तानी आर्मी, वहां की चुनी हुई सरकार से अधिक शक्तिशाली हो जाती है.

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से, पाकिस्तानी आर्मी अपनी सरकार से काफी नाखुश है. पाकिस्तानी जनरल के हिसाब से, जहाँ पाकिस्तान को भारत की सर्जिकल स्ट्राइक का पूरजोर विरोध करना चाहिए था, वहां पाकिस्तान ने कायरता दिखाते हुए, सर्जिकल स्ट्राइक के होने की बात से मुहं मोड़ लिया.

वैसे भारत के लिए बेहतर यही है कि पाकिस्तान में एक civilian गवर्नमेंट रहे. क्योंकि ऐसी गवर्नमेंट अपने लोगों के लिए कुछ न कुछ काम करने के लिए वचनबद्ध होती है. लेकिन, एक इस्लामी फौजी सरकार का पूरा फोकस, भारत में आतंकवाद बढाने पर रहेगा.

अब जो भी हो, भारत हर प्रकार से पाकिस्तान को सँभालने में सक्षम है. हम इनसे कई गुना शक्तिशाली हैं. बस देखना ये है की हमें पाकिस्तान की चुनी हुई सरकार से डील करना है या फिर कुछ दिनों में, एक पागल इस्लामिक फौजी dictator से!

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