Get Even More Visitors To Your Blog, Upgrade To A Business Listing >>

प्रीत ना पराई

"प्रीत न पराई"

मोहे बचाइले साजणा
मोरी प्रीत न पराई
तूने दिए मुझको ये यादों के मेले
यादों के मेंले राजा प्यार के झमेले
फिर मेलों में दे दी तन्हाई .....
हो राजा मोरी प्रीत न पराई
मोहे बचाइले साजणा मोरी प्रीत न पराई
कैसे सजाऊ खुद को
कैसे में संवारु
अखियाँ बिछाये तेरी राह में निहारूं
राहों में लिखीं रुस्वाई हो राजा
मोरी प्रीत न पराई
मोहे बचाइले साजणा मोरी
प्रीत न पराई
अंगना में काग, बोले बागा में कोयलियां
छन छन निगोड़ी बाजे , मोरी ये पयलियां
महँगी पड़ी रे ये जुदाई हो राजा
मोरी प्रीत न पराई
मोहे बचाइले साजणा मोरी प्रीत न पराई
प्रीत है तो आजा साजन काहे तड़पाये
बैरन हवा आ आके मोहे छेड़े जाये
हो ! अब न बचुँगी हरजाई राजा
मोरी प्रीत न पराई
मोहे बचाइले साजणा मोरी प्रीत न पराई ।।

  Viky Chahar



This post first appeared on TheShayar - A Hindi Poetry Destination, please read the originial post: here

Share the post

प्रीत ना पराई

×

Subscribe to Theshayar - A Hindi Poetry Destination

Get updates delivered right to your inbox!

Thank you for your subscription

×