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अब राइट टू एम्प्लॉयमेंट पास होना चाहिए

सोसल साइट पर देश भर के युवा अपना डी पी बदल रहे हैं। इसपर लिखा है यूथ फॉर राइट टू एम्प्लॉयमेंट। ये बेरोज़गार युवा हैं, इन्हें रोज़गार चाहिए। अगर यह आंदोलन बढ़ा तो मोदी जी के लिए कठिनायी हो सकती है।



      इनका कहना है कि भारत के राजनीतिक दल बेरोजगारों के प्रति अमानवीय हद तक गैरजिम्मेदार हैं। वाम दलों की नीतियाँ सिर्फ़ कागजी हैं, कांग्रेस की- अपना अमानवीय चेहरा छिपाने की,भाजपा का इसे भुनाने की। वे इस समस्या के प्रति एकदम गंभीर नहीं हैं। इस देश में हर दिन शताधिक युवा जीवन हार रहे हैं और आत्महत्या कर रहे हैं। दक्षिण से उत्तर भारत तक कम ही राज्य होंगे जिसमें दस लाख से कम पद रिक्त हों। अगर केंद्र और राज्य की सारी रिक्तियों को जोड़ दिया जाय तो भारत की बेरोज़गारी का तात्कालिक समाधान हो सकता है। पर जान-बूझकर इसे रोका जाता है ताकि हमेशा मुद्दा बना रहे! उत्तर प्रदेश में पुलिस की 60 प्रतिशत पद रिक्त हैं। देश स्तर पर 25 प्रतिशत पद रिक्त हैं! उत्तम प्रदेश में तीन लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं। तमाम राज्यों में इससे भी बुरा हाल है। चपरासी के तीन सौ पदों के लिए 23 लाख अप्लीकेशन आते हैं,SSC के सात हजार पदों के लिए 80 लाख आवेदन पड़ते हैं,राज्य सरकारों की गैर-ज़िम्मेदारी के चलते सहायक शिक्षकों को न्यायालय रद्द कर देती है और शताधिक लोग आत्महत्या कर लेते हैं। आए दिन देश में नौकरी माँग रहे लोग पीटे जाते हैं। पढ़ा-लिखा बेटा अपने पैरों पर खड़ा हो जाए- इसकी राह देखते-देखते माँ-बाप दुनिया से चले जाते हैं। आत्महीनता से ग्रस्त युवा गलत रास्ते पर लग जाते हैं। उनका इस देश और समाज से, इसके मूल्यों से विश्वास उठने लगता है। अगर इसपर तत्काल ध्यान न दिया गया तो याद देश बिखर जाएगा।
सरकार को चाहिए, कि वी पी सिंह ने जिस रोज़गार के अधिकार को लागू करने की शपथ ली थी, जिसे उनकी कमेटी ने तत्काल लागू करने की बात कही थी, उसे कम से कम तीस सालों बाद ही सही पर अब ज़रूर लागू कर देना चाहिए। राइट टू एम्प्लॉयमेंट को आसानी से लागू किया जा सकता है। और अगर सरकार राइट टू एम्प्लॉयमेंट नहीं पास कर सकती तो आत्महत्या के अधिकार को पास कर दे!
रोज़गार के अधिकार को आसानी से लागू किया जा सकता है। तमाम कमेटियों की रिपोर्ट और विद्वानों ने इसके तरीके बताए हैं। इसके लिए बस ज़रूरी इतना ही है कि अंबानी-अडानी का घर भरने वाली,ग्रोथ ओरियंटेड नीतियों के बजाए रोज़गार ओरियंटेड नीतियाँ बनायी जाएँ और पहले से रिक्त पदों को भरा जाए।
अबतक हमारे देश के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि यह ठीक-ठीक पता लगाया जाए कि किस सेक्टर में कितने लोग लगे हुए हैं और कितने लोगों को रोज़गार मिला और कितनों की चली गयी। इसमें कोई कठिनाई नहीं है। हर व्यक्ति के पास वोटर आई डी है। एक ऑन लाइन व्यवस्था की जा सकती है जिससे हर दिन कितने लोगों को किस क्षेत्र में रोज़गार मिल रहा है और कितने लोग बेरोज़गार हो गये हैं, इसका पता लगाया जा सकता है और तत्संबंधी नीतियाँ बनाई जा सकती हैं। पर सरकारें इसके लिए गंभीर तो हों,उनकी सदेच्छा तो हो।
सरकार को आज और अभी से सोचना चाहिए जिससे हर दिन बेकारी के चलते आत्महत्या कर रहे युवाओं को बचाया जा सके ।                           


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