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इस उपद्रव के पीछे के षड्यंत्र को समझना होगा

क्या ये एक संयोग मात्र है कि कल भारत बंद के दौरान हिंसा केवल भाजपा शासित प्रदेशों में भड़की। मध्यप्रदेश में सबसे अधिक हिंसा ग्वालियर में हुई, जबकि बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय भी वहां पूर्ण रूप से शांति रही थी। देश अच्छी तरह समझ रहा है कि इस हिंसा के पीछे दलित नहीं बल्कि दलितों के नाम पर स्वांग रचने वाले गुण्डे थे। सरकार के ख़ुफ़िया तंत्र को चौकन्ना रहने की जरूरत है क्योंकि कल के उपद्रव में भीम-मीम गठजोड़ खुलकर सामने आ गया है।

भारत बंद शुरू होने के तीन घंटे के भीतर ही जिस तरह से कुशल प्रबंधन के साथ हिंसा को अंजाम दिया गया, उससे ये साफ़ हो गया कि उपद्रव की तैयारी लंबे समय से की जा रही थी। आगजनी, महिलाओं और बच्चों पर हमले, ट्रेन यातायात बाधित करने का प्रयास तुरंत नहीं किया जा सकता। ऐसी घटनाओं को अंजाम देने के लिए व्यापक पैमाने पर धन-बल की आवश्यकता होती है। जाहिर है दलित समुदाय खुद होकर ऐसा कर पाने में अक्षम है जब तक कि पीछे से बड़ा सहयोग न मिले।

नीले झंडे लेकर हिंसा करने वालों को दलित कहा जा रहा है लेकिन सच का पता लगाना होगा। तलवारे लेकर सड़कों पर आतंक मचाने वाले ये अनाम गुंडे कौन हैं। ऐसे कौनसे दलित हैं जो ढाई लाख की बुलेट पर हज़ारों रूपये की डिजाइनर कपडे पहनकर प्रदर्शन करने आते हैं। निश्चित ही कल के हिंसक प्रदर्शनों के पीछे बड़ी देश विरोधी ताकतों का हाथ है। ये कहने में गुरेज नहीं कि देश को आने वाले कठिन समय की आहट मिल चुकी है।

राज्य सरकारों का ख़ुफ़िया तंत्र भांपने में नाकाम रहा कि इस पैमाने पर हिंसा होने जा रही है। षड्यंत्रकारियों ने ऐसी जगहों पर ही वार किया जहाँ पुलिस की पुख्ता तैयारी नहीं थी। कल विरोध कर रहे कई लोगों में ये अफवाह फैला दी गई थी कि सरकार आरक्षण बंद करने जा रही है। यहीं कारण रहा कि सही जानकारी के अभाव में अनजाने में कई राष्ट्रवादी दलित भी इस विरोध में साथ आ गए। विपक्षी दलों का अफवाह तंत्र बहुत सशक्त दिखाई दे रहा है और इसे तुरंत नष्ट करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

इस मामले में राष्ट्रवादियों को भी बहुत धैर्य के साथ काम लेना होगा। जातिवादी विद्वेष में एकता न बिखर जाए, इसका ध्यान रखना होगा। कल के जख्मों से घायल होने के बाद देश आज फिर पटरी पर चल पड़ा है। सोशल मीडिया पर अचानक दलित और सामान्य वर्ग के लोगों में तनाव का माहौल बन गया है। इस तनाव को कम करने के प्रयास होने चाहिए नहीं तो ये तनाव आभासी दुनिया से वास्तविकता के धरातल पर उतर कर आ सकता है।



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