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अन्नकूट पर कोटा के राजाओं ने दलितों के साथ किया ऐसा व्यवहार, सन्न रह गया हर कोई !!

आज अन्नकूट का त्योहार पुरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है.

इसी तरह कोटा में भी आज के दिन राजपरिवार के द्वारा गोवर्धन पूजा बड़ी हर्षोल्लास से मनाई जाती थी. साथ ही ब्रजनाथ जी के अन्नकूट का भी आयोजन किया जाता था. पूजा व अन्नकूट का कार्यक्रम सुबह 11 बजे से शुरू हो जाता था. इसके पश्चात गायों से उन्हें घुंघाया जाता था और मुखिया कुमकुम का छापा लगाकर कांडवारे से नजर किया करता था.

जिस समय देश में जाटव जाति के लोगों को अछूत माना जाता था. इस कास्ट के लोगों के सामने से गुजरने या इनसे बात करना पाप माना जाता था. लेकिन कोटा के राजाओं ने ये जात-पात का भेद खत्म करने में अपनी कमर कस ली और तभी कोटा के राजपरिवार ने इस जाति को बहुत सम्मान दिया और उन्हें राजमहल बुलाकर अन्नकूट लुटाने का हक़ प्रदान किया.

ये सब देखकर ना केवल राजस्थान के राजा बल्कि देश के अन्य राजा भी दंग रह गये. महाराव भीम सिंह ही वो राजा थे जिन्होनें धार्मिक उदारता का परिचय दिया. इसके साथ ही गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, होली, कृष्ण जन्मोत्सव जैसे बड़े-बड़े मौकों पर पुरे राजपरिवार की ओर से दलितों को राजमहल तक आने का अधिकार दिया.

राजा के दलितों के प्रति इस स्नेह को देखकर पूरी दुनिया सन्न रह गयी थी. अन्नकूट वाले दिन शाम को 4 बजे से अन्नकूट महोत्सव शुरू होता था. आरती के बाद ही अन्नकूट लुटाने का हुक्म दिया जाता था. दलितों को इस महोत्सव के लिए ख़ास न्योता दिया जाता था. इस महोत्सव में शूद्र लोग सबसे पहले महाराव को प्रसाद देते थे. इसके बाद ही महोत्सव में मौजूद अतिथि, राजा-महाराजा, मनसबदारों और ठिकानेदारों के साथ-साथ बृजनाथ के सभी भक्तों को अन्नकूट बांटने की जिम्मेदारी दी जाती थी.

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