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EVM मशीन पर अब तक का सबसे बड़ा ख़ुलासा, पढ़े ये सनसनीख़ेज़ रिपोर्ट !!

भाजपा के UP में चुनाव जीतने और केजरीवाल के पंजाब में चुनाव हारने के बाद EVM के घोटाले को लेकर देश में अलग -अलग बातें चल पड़ी हैं , आज हम आपको इससे जुड़ी एक एक जानकारी मुहैया कराते हैं जिसके बाद किसी क़िस्म का कोई शक नहीं रह जाएगा ।

जैसा आज हो रहा है वैसे 2012 में भी बहुत चिल्लम चिल्ली हुई थी EVM EVM  ,  एक आदमी ने उस वक़्त EVM टेम्पर करके दिखाई थी और विडियो You Tube पर भी दाल दी थी । परिणाम यह था की उस आदमी को जेल में डाल दिया गया और पूरे मामले को दबा दिया गया था। जेल में डालने वाले और कोई नहीं बल्कि कांग्रेसी ही थे तब कांग्रेस  ये ब्यान देती फिर रही थी की EVM टेम्पर हो ही नहीं सकता ।

ऐसा नहीं है कि उसके बाद कुछ नहीं किया गया दरसल यह खींचतान एक साल तक चली थी और ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी गया था और उस समय यह निर्णय लिया गया था की EVM में से एक पर्ची भी निकलेगी जो यह बताएगी की आपका वोट किसे गया । लेकिन बात ये है कि जब तक बीजेपी हार रही थी तब तक EVM सही थी और आज बीजेपी जीत रही है तो सारे विरोधी दल इसको मुद्दा बना देना चाहते हैं  । इसी EVM के साथ 2009 के आम चुनाव लड़े गए थे ज़िनमे कांग्रेस की बड़ी जीत हुई थी  , इसी EVM के साथ दिल्ली के चुनाव हुए जिसमें केजरीवाल को 67 सीट मिली थी , इसी EVM के साथ बिहार चुनाव हुए थे जहाँ भाजपा बुरी तरह हारी थी । इसी EVM के साथ अभी हाल के चुनाव हुए हैं जिसमें यदि देखा जाए तो भाजपा दो जगह जीती है , गोवा और मणिपुर में उसने संख्या के बल पर सरकार बनायी है लेकिन EVM में गड़बड़ होती तो वहाँ और पंजाब में भी भाजपा अपनी जीत दिखा देती , किसने रोका था  ?

खैर अब मुद्दा यह है : 5 से 10 EVM कोई उड़ाकर या कोई भी छेड़खानी कर दे यह बात तो सबके समझ में आती है , लेकिन लाखो की तादात में EVM के साथ छेड़छाड़ करना सम्भव नहीं लगता क्यूँकि इसके लिए  लाखो की तादात में लोगो की ज़रूरत पड़ती जो EVM के परिणामो को बदल देते  क्या यह मुमकिन हो सकता है  ? ये तो तभी हो सकता है जब चुनाव आयोग और सारी पार्टियाँ मिलकर खुल्लम खुल्लम EVM टेम्परिंग करें , क्यूँकि सभी पार्टियों की सहमति के बिना इसको छुपाया नहीं जा सकता ।

माना कि कांग्रेस के कल्चर के चलते कुछ लोगों को लगता हो कि देश में अंधेर गर्दी है ,  लेकिन इतनी भी नहीं है  । और एक बड़ी बात आपको बता देते हैं कि EVM मशीन पर सील लगाईं जाती है, और सील को सभी पार्टी के लोग/कार्यकर्ता अपनी आँखों से लगता हुआ देखते है , और जब सील खोली जाती है तब भी सभी पार्टी के कार्यकर्ता होते है । लेकिन बड़ा सवाल फिर खड़ा हो जाता है कि क्या आज किसी भी पार्टी के एक भी बंदे ने EVM की सील टूटने की खबर नहीं दी ?? नहीं ना तो इसका साफ़ मतलब है कि  सब कुछ सही चल रहा है , कुछ जगह EVM के बाद पर्ची मिलने का सिस्टम लागू हुआ है और अब भविष्य में  सभी लोगो को पर्ची मिलेगी कि उनका वोट किसे गया तो फिर EVM की विश्वसनीयता और बढेगी ।

लेकिन बड़ा मुद्दा ये है कि फिर हारने वाली पार्टी कोई नया सवाल उठा देगी , यहाँ हम आपको एक बड़ी बात और बता देना चाहते हैं कि BSP को 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से 19.60 % वोट मिले थे और अभी हाल ही में ख़त्म हुए चुनावों में  23 % वोट ही BSP को मिले हैं तो इसका मतलब क्या निकलता है  ? ये चित्र देखें पहले बसपा और सभी पार्टियों का का उत्तर प्रदेश का वोट शेयर दिखाते हैं ।

अब देखें विकिपीडिया की वेबसाइट के अनुसार BSP को 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश से कितने % वोट मिले थे , बता दें कि उस समय बसपा को एक भी सीट नहीं मिली थी  ।

देख लिया आपने कि बसपा को 2014 के लोकसभा चुनाव के मुक़ाबले अभी के विधानसभा चुनाव में चार % ज़्यादा ही वोट मिले हैं यानी अगर मायावती का EVM का इल्ज़ाम सही है तो ये जो वोट % है ये भी ग़लत ही जान पड़ता है , मतलब उन्हें अपने मिले  23 % वोट पर बिलकुल भी भरोसा नहीं है ।

अब जानें वो दस कारण जो ये बताते हैं कि EVM मशीन में छेड़छाड़ क्यूँ सम्भव नहीं है । 

1. ईवीएम मशीन किसी भी तरह से इंटरनेट से कनेक्ट नहीं होती, ऐसे में इसे ऑनलाइन हैक करना संभव नहीं है।

2. कौन सी ईवीएम मशीन किस पोलिंग बूथ पर रहेगी इस बात का पता पहले से नहीं होता, पोलिंग पार्टी को एक दिन पहले पता चलता है कि उनके पोलिंग बूथ पर कौन से सीरिज़ की ईवीएम आएगी।

3. ईवीएम मशीन दो तरह की होती है। बैलट और कंट्रोल यूनिट। इसके साथ ही एक तीसरी तरह की यूनिट भी अब जोड़ दी गई है इसे VVPAT कहा जाता है।

4. इसमें वोट देने के कुछ सेकेंड के अंदर मतदाता को पर्ची दिखाती है कि उसने किसको वोट दिया है। हालांकि चुनाव आयोग की तरफ से अभी तक इस तरह की मशीन का इस्तेमाल सभी पोलिंग बूथों पर नहीं किया गया है।

5. वोटिंग शुरू होने से पहले ही ईवीएम मशीन को टेस्ट किया जाता है कि मशीन ठीक है या नहीं। ये भी देखा जाता है कि इससे किसी तरह की कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई है।

6. इस प्रक्रिया को मॉक पोलिंग भी कहा जाता है। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही वोटिंग शुरू करवाई जाती है।

7.  सभी पोलिंग एंजेट से मशीन में वोट डालने को कहा जाता है ताकि ये जांचा जा सके कि सभी उम्मीदवारों के पक्ष में वोट गिर रहा है कि नहीं. ऐसे में यदि किसी मशीन में टेंपरिंग या तकनीकि गड़बड़ी होगी तो मतदान के शुरू होने के पहले ही पकड़ ली जायेगी।

8. मॉक पोल के बाद सभी उम्मीदवारों के पोलिंग एंजेट मतदान केन्द्र की पोलिंग पार्टी के प्रभारी को सही मॉक पोल का सर्टिफिकेट देते है। इस सर्टिफिकेट के मिलने के बाद ही संबंधित मतदान केन्द्र में वोटिंग शुरू की जाती है. ऐसे में जो उम्मीदवार ईवीएम में टैंपरिंग की बात कर रहे हैं वे अपने पोलिंग एंजेट से इस बारे में बात कर आश्वस्त हो सकते है।

9. मतदान शुरू होने के बाद मतदान केन्द्र में मशीन के पास मतदाताओं के अलावा मतदान कर्मियों के जाने की मनाही होती है, वे ईवीएम के पास तभी जा सकते है जब मशीन की बैट्री डाउन या कोई अन्य तकनीकि समस्या होने पर मतदाता द्वारा सूचित किया जाता है।

10. हर मतदान केन्द्र में एक रजिस्टर बनाया जाता है, इस रजिस्टर में मतदान करने वाले मतदाताओं की डिटेल अंकित रहती है और रजिस्टर में जितने मतदाता की डिटेल अंकित होती है, उतने ही मतदाताओं की संख्या ईवीएम में भी होती है। काउंटिंग वाले दिन इनका आपस मे मिलान मतदान केंद्र प्रभारी की रिपोर्ट के आधार पर होता है।

शायद अब आपके सारे शक दूर हो गए होंगे यदि फिर भी EVM को लेकर आपके कोई सवाल हैं तो हमें कॉमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएँ , हम उनका निवारण करने का भरसक प्रयास करेंगे  ।

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