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विडियो : जय हिंद वन्दे मातरम :ये है भारत के 10 परम वीर चक्र विजेता नमन ज़रूर करें !!

भारत माँ के दस लाल जिन्हें मिला था परमवीर चक्र !

1. मेजर सोमनाथ शर्मा
मेजर सोमनाथ शर्मा को सन् नवंबर 1947 में उनकी बहादुरी के लिए परम वीर चक्र से नवाज़ा गया था. हालाँकि मेजर सोमनाथ शर्मा के दाहिने हाथ में प्लास्टर चढ़े होने के बाद भी उन्होंने तय किया कि वे उनके साथियों के साथ ही जियेंगे-मरेंगे. वे जब दुश्मन से लड़ने में व्यस्त थे की तभी उनके पास रखे गोले-बारूद पर मोर्टार बम गिर कर फट गया.

2. कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया
बेल्जियम के कांगो छोड़ने के बाद वहा पर शीत-युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होने लगीं | तब संयुक्त राष्ट्र ने स्थिति को संभालने के लिए भारत की मदद लेने का फैसला लिया | भारत ने इस संयुक्त राष्ट्र के इस अभियान में लगभग 3000 जवानों को वहां भेजे | उस वक्त कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया सन् 1957 में 1 गोरखा राइफल्स में कमीशन्ड हुए थे.

3. मेजर धन सिंह थापा
सन् 1949 में मेजर थापा इंडियन आर्मी के 8 गोरखा राइफल्स में कमीशन्ड हुए थे.सन् 1962 में जब चीनी सैनिकों ने लद्दाख के उत्तरी हिस्से में स्थित सिरिजाप घाटी पर धाबा बोल दिया, तो मेजर थापा की अगुआई में लड़ रही भारतीय सेना ने उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया. हालांकि इस पूरी कार्रवाई के दौरान मेजर थापा उनकी जान गंवा बैठे और उन्हें मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया.

4. वीर अब्दुल हमीद
वीर अब्दुल हमीद भारत-पाक के बीच चले 65 के युद्ध के वे हीरो थे. दुश्मनों की टैंकों ने भारत की सेना को बहुत परेशान कर रखा था. तब वीर अब्दुल हामिद पाक सेना के साथ बिना किसी टैंक के ही भीड़ गए और दुश्मन के दो टैंकों को धराशायी कर दिया.इससे दुश्मन बौखला गया और उन पर मशीन गन और भारी गोला बारूद से हमला कर दिया.

5. फ्लाइंग अफ़सर निर्मल जीत सिंह सेखो
सन् 1971 के ऑपरेशन के दौरान फ्लाइंग अफ़सर निर्मल जीत सिंह सेखो 18 नंबर के फ्लाइंग बुलेट्स स्क्वाड्रन के साथ श्रीनगर में ड्यूटी पर थे | श्रीनगर एयरफील्ड पर दुश्मनों के सबसे मारक सबरे एयरक्राफ्टों ने हमला कर दिया था. जीत सिंह ने ठीक उसी समय उड़ान भरी और दो सबरे एयरक्राफ्टों को ख़ुद में उलझा लिया.

6. मेजर रामास्वामी परमेश्वरन्
सन् 1987 के नवंबर में भारत से कई सैन्य टुकड़ियों को भारत-श्रीलंका समझौते के तहत श्रीलंक में कानून व्यवस्था के निगरानी हेतु भेजा गया था.इसी क्रम में मेजर परमेश्वरन् और उनकी टुकड़ी को वहां के अतिवादियों ने चारो तरफ से घेर लिया था जो कुछ समय में ही हिंसा में तब्दील हो गया इसके बाद वह विद्रोहियों से एक के मुकाबले एक की मुद्रा में लड़ गए लेकिन उनके सीने पर अचानक ही कहीं से एक गोली लग गई.

7. कैप्टन मनोज कुमार पांडे
सन् 1999 के ऑपरेशन विजय में कैप्टन मनोज कुमार पांडे प्लाटून कमांडर थे | उनके बटालियन के इस पूरी बढ़त पर दुश्मनों ने बुरी तरह रोक रखा था जो कि उनसे ऊपर की पहाड़ियों पर पोजीशन लेकर आश्वस्त थे

8. ग्रेनेडियर योगेन्दर सिंह यादव
सन् 1999 के कारगिल युद्ध में अभूतपूर्व वीरता के प्रदर्शन हेतु ग्रेनेडियर योगेन्दर सिंह यादव सम्मानित किया गया था. वे घातक प्लाटून का हिस्सा थे | इनको टाइगर हिल पर दोबारा से कब्जे की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गयी ग्रेनेडियर ने जान की परवाह किये बिना ही आगे बढ़ने लगे इस पर बौखलाए दुश्मनो ने इनके ऊपर ग्रेनेड, रॉकेट और गोले-बारूद से हमला कर दिया. इसमें कमांडर और उनके दो साथियों की मौत हो गई उनके इस अद्भुत साहस के लिए उन्हें परम वीर चक्र से नवाज़ा गया.

9. राइफलमैन संजय कुमार
उस समय राइफलमैन संजय कुमार जम्मू कश्मीर राइफल्स के साथ पोस्टिंग पर थे और उनको 4875 प्वाइंट के फ्लैट टॉप एरिया पर कब्ज़े की ज़िम्मेदारी दी गई थी. संजय कुमार अपनी जान की परवाह किये बिना ही रेंगते हुए दुश्मन के एरिया में पहुँच गए |

10. कैप्टन विक्रम बत्रा
कैप्टन विक्रम बत्रा को प्वाइंट 5140 पर फिर से कब्ज़ा करने की ज़िम्मेदारी दी गई थी. उन्होंने बहुत नज़दीक से हमला करके तीन दुश्मनों को मार गिराया था और इस क्रम में वे बुरी तरह घायल भी हो गए थे. हालांकि उनके चोटों से बेपरवाह वे लगातार लड़ते रहे | उनके इस शौर्य और पराक्रम हेतु उन्हें परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया.

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